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Chandauli News: वन विभाग की कार्रवाई से भड़के नौगढ़ के ग्रामीण, जयमोहनी रेंज कार्यालय का घेराव
Chandauli News: चंदौली के नौगढ़ में वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों ने जयमोहनी रेंज कार्यालय का घेराव किया। ग्रामीणों ने हल-बैल समेत सामान जब्त करने और 10 हजार रुपये जुर्माना लेने के बावजूद रसीद नहीं देने का आरोप लगाया।
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Chandauli News: चंदौली के वनांचल क्षेत्र नौगढ़ में वन विभाग की तानाशाही और मनमानी के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सालों से जमीनों पर जोत-कोड़ कर अपना पेट पाल रहे गरीब किसानों पर अचानक वन महकमे की गाज गिर गई। विभाग की इस एकतरफा कार्रवाई से आक्रोशित ग्रामीणों ने गुरुवार को जयमोहनी रेंज कार्यालय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने सीधे तौर पर वन कर्मियों पर अवैध वसूली करने और सामान जब्त कर हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है।
पीड़ित ग्रामीण आशिक ने दर्द बयां करते हुए बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से जमीन पर खेती कर अपना परिवार चला रहे हैं। मंगलवार को वन विभाग की टीम दबंगई दिखाते हुए गांव पहुंची और किसानों के तीन हल, जुआ और साइकिल जबरन जब्त कर ले गई। इतना ही नहीं, दो ग्रामीणों (मुरली और प्रवेश) को उठाकर रेंज कार्यालय ले जाया गया, जिन्हें बुधवार को छोड़ा गया। आरोप है कि रिहाई के नाम पर उनसे 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूल लिया गया, लेकिन जेब गर्म करने के बाद भी विभाग ने रसीद तक नहीं थमाई।
बिना रसीद जुर्माना जमा, फिर भी सामान डकार गया विभाग
पैसा ऐंठने के बावजूद वन विभाग ने किसानों का जब्त सामान वापस नहीं किया, जिससे नाराज महिलाओं और ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। शकुंतला, कलावती, संतरा, रामराजी और शीला समेत दर्जनों महिलाओं ने रेंज कार्यालय पहुंचकर मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब जुर्माना ले लिया गया तो सामान क्यों दबाकर रखा गया है? क्या वन विभाग अब किसानों के औजार जब्त कर उनकी रोजी-रोटी छीनना चाहता है?
अफसरों की गोलमोल सफाई: प्रक्रिया पूरी होते ही मिलेगा सामान
उधर, चौतरफा घिरे वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने मामले पर लीपापोती करते हुए कहा कि वन भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत पर यह विभागीय कार्रवाई की गई थी। उन्होंने जुर्माना जमा होने की बात तो मानी, लेकिन रसीद न देने के आरोप पर गोलमोल जवाब दिया। रेंजर का दावा है कि विभागीय कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद जब्त सामान ग्रामीणों को लौटा दिया जाएगा। हालांकि, पीड़ित किसानों ने साफ चेताया है कि अगर जल्द उनका सामान नहीं मिला तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।


