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Chandauli News: प्रचार का दिखावा क्यों, पढ़ाई पर ध्यान क्यों नहीं?
Chandauli News: चंदौली में छात्र नेता सम्राट अक्षय पाल ने प्रचार-प्रसार पर खर्च के बजाय सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने की मांग की। उन्होंने सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
Chandauli News
Chandauli News: दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है कि बड़े-बड़े होर्डिंग और बैनरों पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं, लेकिन जहां असली जरूरत है यानी हमारे स्कूलों में, वहां बजट की हमेशा कमी रहती है? बिल्कुल इसी मुद्दे पर चंदौली में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्र नेता सम्राट अक्षय पाल ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने सरकार और स्थानीय प्रशासन से एक सीधा और तीखा सवाल पूछा है—"जब प्रचार पर इतना खर्च कर सकते हैं, तो फिर बच्चों के भविष्य पर क्यों नहीं?"
दिखावा बंद हो, काम पर ध्यान दें
सम्राट अक्षय पाल का कहना है कि आज भी कई सरकारी स्कूलों का हाल बेहाल है। कहीं पीने के लिए साफ पानी नहीं है, तो कहीं बच्चों के बैठने के लिए बेंच और डेस्क तक गायब हैं। शौचालयों की हालत खराब है, तो कहीं छत टपक रही है और किताबों से सजी लाइब्रेरी तो सपना जैसी लगती है। ऐसे में सोचिए, हमारी प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? चमचमाते हुए प्रचार बैनर या हमारे बच्चों के लिए एक safe और बेहतर शैक्षणिक माहौल? जवाब साफ है, पर शायद जिम्मेदार लोग देखना नहीं चाहते।
जनता का पैसा, बच्चों के हक में खर्चे
छात्र नेता ने सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकारी खजाने का पैसा फिजूल के पोस्टरों पर उड़ाने के बजाय सीधे स्कूलों की जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल होना चाहिए। बच्चों का भविष्य किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक पब्लिसिटी से कई गुना ज्यादा अहम है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन तुरंत एक सर्वे कराए ताकि पता चले कि किस स्कूल को क्या चाहिए और फिर प्राथमिकता के आधार पर वहां की सुविधाएं ठीक की जाएं।
सुधार नहीं हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन
यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है। सम्राट अक्षय पाल ने साफ कह दिया है कि अगर शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो छात्र चुप नहीं बैठेंगे। वे लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरकर एक बड़े आंदोलन की शुरुआत करेंगे। अब देखना यह है कि प्रशासन इस जायज मांग को सुनता है या फिर वही ढर्रा जारी रहता है।


