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Chandauli News: मुनाफाखोरी का नंगा नाच: नौगढ़ में चीनी के दाम 70 रुपये किलो तक पहुंचे, जनता बेबस
Chandauli News: चंदौली के नौगढ़ बाजार में चीनी के दाम एक दिन में 56 से बढ़कर 70 रुपये किलो पहुंच गए। व्यापारियों की मनमानी से ग्राहक परेशान हैं, प्रशासन पर सवाल उठे।
मुनाफाखोरी का नंगा नाच: नौगढ़ में चीनी के दाम 70 रुपये किलो तक पहुंचे, जनता बेबस (Photo- Social Media)
Chandauli News: चंदौली जिले के नौगढ़ बाजार में कालाबाजारी और मुनाफाखोरी का खुला खेल खेला जा रहा है, और शासन- प्रशासन गहरी नींद में सो रहा है। जिस चीनी का भाव कल तक ₹56 प्रति किलो था, उसके दाम देर शाम से अचानक बढ़कर ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गए। महज कुछ घंटों के भीतर ₹14 प्रति किलो का यह अप्रत्याशित उछाल सीधे-सीधे गरीब और मध्यम वर्ग की जेब पर डकैती है। बाजार में सरेआम जमाखोरी और कालाबाजारी हो रही है, लेकिन आपूर्ति विभाग और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।
शाम होते ही बदली चाल: दुकानदारों की चांदी, गरीब बेहाल
देर शाम जैसे ही चीनी के दाम बढ़ाने की खबर फैली, मुनाफाखोर दुकानदारों की पौ-बारह हो गई। गोदामों में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के बावजूद कई दुकानदारों ने माल होने से साफ इनकार कर दिया, ताकि बाद में इसे और महंगे दामों पर खपाया जा सके। वहीं, कई व्यापारियों ने बढ़े हुए दामों पर चीनी बेचकर मनमाना मुनाफा वसूला। इसका सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि शाम को रोजमर्रा का सामान खरीदने निकले छोटे तबके और दिहाड़ी मजदूरों को चीनी के अचानक बढ़े दाम सुनकर बिना खरीदे ही खाली हाथ घर लौटना पड़ा।
'सेल क्लोज' का ड्रामा: कृत्रिम किल्लत बनाकर और लूटने की तैयारी
मुनाफाखोरी का यह खेल सिर्फ खुदरा बिक्री तक सीमित नहीं रहा। थोक बाजार में ₹6000 प्रति क्विंटल के भाव पर धड़ल्ले से बिक्री करने के बाद अचानक चीनी का 'सेल क्लोज' घोषित कर दिया गया। व्यापारियों की तरफ से साफ फरमान जारी कर दिया गया है कि 'अब नया माल आने पर नया भाव दिया जाएगा।' यह सीधा-सीधा कृत्रिम किल्लत पैदा करके आने वाले दिनों में और ज्यादा रेट वसूलने का सोचा-समझा पैंतरा है।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठते सवाल
आखिर देर शाम अचानक ऐसा क्या हुआ कि चीनी के दाम रातों-रात आसमान पर पहुंच गए? नौगढ़ बाजार में चल रही इस मनमानी पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की खामोशी कई गंभीर संदेह पैदा करती है। क्या यह सब जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे उनकी साठगांठ से हो रहा है, या फिर प्रशासन जमाखोरों के आगे पूरी तरह लाचार हो चुका है? जनता अब यह जवाब चाहती है कि इस अंधी लूट पर कार्रवाई कब होगी।


