Chandauli Panchayat Chunav: प्रधान नीलम ओहरी खुश, कहा- 'DM साहब की अनुमति से तेज होगा विकास

Chandauli Panchayat Chunav: हाईकोर्ट की टिप्पणी और शासन के नए आदेशों के बीच गांवों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस बीच चुनावी सरगर्मी तेज है।

Sunil Kumar
Published on: 10 Jun 2026 2:29 PM IST (Updated on: 10 Jun 2026 2:32 PM IST)
Chandauli Panchayat Chunav
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Chandauli Panchayat Chunav (Social Media).jpg

Chandauli News: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पंचायत चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। हाईकोर्ट की टिप्पणी और शासन के नए आदेशों के बीच गांवों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस बीच, सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों का शासनकाल बढ़ाए जाने की संभावना पर नौगढ़ के बाघी गांव की ग्राम प्रधान नीलम ओहरी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के सहयोग से गांवों में विकास की गति और तेज होगी।

विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार, DM साहब देंगे अनुमति: नीलम ओहरी

नौगढ़ तहसील के ग्राम पंचायत बाघी की प्रधान नीलम ओहरी ने वर्तमान स्थिति पर बेबाकी से अपनी राय रखी। सरकार द्वारा कार्यकाल बढ़ाए जाने के संकेत पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा, "रही बात DM साहब की, तो वे सभी सही और जनहित के कार्यों की अनुमति जरूर देंगे। इससे गांवों के विकास की गति बिल्कुल नहीं रुकेगी, बल्कि और तेज होगी।"

चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने साफ किया कि वे ठेकेदारी करने नहीं, बल्कि समाज सेवा करने राजनीति में आई हैं। पद पर रहें या न रहें, जनता की सेवा जारी रहेगी और उनका अगला राजनीतिक कदम भी जनता ही तय करेगी।


चुनाव में देरी और प्रशासक राज पर अन्य प्रधानों का रुख

दूसरी तरफ, जिले की पिपराही ईशु मिया और बसौली के ग्राम प्रधान पप्पू गोड़ जैसी अन्य ग्राम पंचायतों के निवर्तमान प्रधानों में असमंजस की स्थिति भी है। कुछ प्रधानों का मानना है कि यदि गांवों में सीधे प्रशासक राज लागू होता है, तो जिलाधिकारी से हर छोटे काम की अनुमति लेने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है। हालांकि, शासनकाल बढ़ने की चर्चाओं के बीच अब विकास कार्यों के सुचारू रूप से चलने की उम्मीद जगी है।

पिछड़ा वर्ग आरक्षण और गांवों का गरमाया सियासी माहौल

आरक्षण सूची और पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को लेकर चंदौली के स्थानीय जनप्रतिनिधियों में उत्सुकता और चिंता दोनों बनी हुई है। चुनाव टलने या कार्यकाल बढ़ने की चर्चाओं के बावजूद गांवों में भावी प्रत्याशियों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के स्थानीय नेता भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

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