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UP चुनाव के लिए चंद्रशेखर आजाद ने भरी हुंकार! 403 सीटों पर अकेले ठोकेंगे ताल, बिगड़ेगा सियासी गणित?
Chandrashekhar Azad UP Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले चंद्रशेखर आजाद ने बड़ा चुनावी ऐलान किया है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
Chandrashekhar Azad UP Election 2027: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी चुनावी हलचल के बीच आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट घोषणा की है कि उनकी पार्टी राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी। पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए अब तक 45 प्रभारियों की नियुक्ति पूरी की जा चुकी है, जबकि 20 नए प्रभारियों की सूची बहुत जल्द जारी कर दी जाएगी। चंद्रशेखर के इस ऐलान से प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर घेरा
प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए चंद्रशेखर आजाद ने सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि आज पूरे उत्तर प्रदेश में आम जनता को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही है। अस्पतालों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का बुरा हाल है, जबकि युवा डिग्री हाथ में लेकर भटक रहे हैं और उनके लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर मौजूद नहीं हैं। आजाद ने साफ किया कि उनकी पार्टी इन बुनियादी और जनहित से जुड़े मुद्दों को ही अपना मुख्य चुनावी हथियार बनाएगी और जनता के बीच जाकर उनका समर्थन और अधिकार मांगेगी।
अन्याय के खिलाफ बनाएंगे अपनी सरकार
आजाद समाज पार्टी के प्रमुख ने सत्ताधारी दल पर हमला करते हुए कहा कि इस समय पूरे प्रदेश में आम लोगों के साथ लगातार अन्याय देखने को मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को इस तरह से तैयार कर रही है कि वे वर्तमान सरकार को सत्ता से बाहर कर सकें। उनका मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश में आजाद समाज पार्टी की एक मजबूत सरकार बनाना है। चंद्रशेखर का मानना है कि जब तक आम जनता खुद सत्ता में भागीदार नहीं बनेगी, तब तक राज्य में सही बदलाव संभव नहीं है।
2022 के चुनाव में प्रदर्शन कैसा रहा?
अगर पिछले चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी का प्रदर्शन खास नहीं रहा था। उस चुनाव में पार्टी ने कुल 111 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। पूरी ताकत से चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी को पूरे राज्य में कुल केवल 1,19,564 वोट ही मिल सके थे, जो कुल पड़े वोटों का मात्र 0.13 प्रतिशत था। परिणाम यह रहा कि पार्टी के सभी 111 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी और कोई भी उम्मीदवार 4 प्रतिशत वोट शेयर नहीं पा सका था।
सपा से गठबंधन की टूट का असर
वर्ष 2022 के चुनाव में उत्तर प्रदेश का सियासी मैदान मुख्य रूप से बीजेपी, सपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा रहा। इस कठिन राजनीतिक संघर्ष के बीच आजाद समाज पार्टी को जनता का अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं हो सका। चुनाव से ठीक पहले चंद्रशेखर की पार्टी का समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर विचार-विमर्श भी चला था। हालांकि, आजाद समाज पार्टी द्वारा अधिक सीटों की मांग किए जाने के कारण दोनों दलों के बीच बात नहीं बन सकी और बातचीत खत्म हो गई थी, जिसके बाद पार्टी अकेले चुनाव मैदान में उतरी थी।
संसद पहुंचने के बाद बढ़ा कद
भले ही पिछला चुनाव उम्मीद के मुताबिक न रहा हो, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश का राजनीतिक समीकरण बदल चुका है। खुद चंद्रशेखर आजाद नगीना लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर देश की संसद पहुंच चुके हैं। सांसद बनने के बाद उन्होंने लोकसभा में जनता से जुड़े तमाम अहम मुद्दों को बड़ी ही बेबाकी से उठाया है। इसके चलते लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हो रहा है। खास तौर पर दलित मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ काफी मजबूत हो चुकी है, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव पहले से काफी बढ़ गया है।
बसपा की सुस्ती से बढ़ा दायरा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आए इस बड़े बदलाव की सबसे प्रमुख वजह बसपा का निरंतर कमजोर होना और मायावती की राजनीतिक निष्क्रियता को माना जा रहा है। बसपा के घटते जनाधार के कारण बने राजनीतिक खालीपन को भरने के लिए चंद्रशेखर आजाद एक मजबूत विकल्प बनकर उभरे हैं। ऐसे में यह माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी को बड़ा फायदा मिल सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए चंद्रशेखर अभी से अपनी रणनीतियों को धरातल पर उतारने में जुट गए हैं ताकि आगामी चुनाव में पार्टी बड़ी सफलता हासिल कर सके।


