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Chitrakoot Amavasya Mela: दीपावली मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, 50 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डूबकी
Chitrakoot Amavasya Mela: मंदाकिनी स्नान कामदगिरि परिक्रमा को आए श्रद्धालु। प्रस्तावित कॉरिडोर अयोध्या, प्रयागराज, चित्रकूट, मैहर, खजुराहो व बागेश्वर धाम को जोड़ेगा। रोजगार की भी उम्मीद।
दीपावली मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, 50 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डूबकी (Photo- Newstrack)
Chitrakoot News: भगवान श्रीराम की तपोभूमि धर्मनगरी चित्रकूट में दीपावली अमावस्या मेले में आस्था का अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा। मंदाकिनी के घाटों से लेकर भगवान कामतानाथ के दरबार और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी। अनुमानित 50 लाख श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में पुण्य की डुबकी लगाई और कामदगिरि की परिक्रमा कर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए। जय श्रीराम और जय कामतानाथ के जयकारों से पूरी धर्मनगरी भक्तिमय हो उठी। देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की तपोभूमि में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी भी देखने को मिली। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह स्वयं मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रहे। सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन के लिए अधिकारी और कर्मचारी आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी करते रहे। प्रशासन का पूरा प्रयास रहा कि श्रद्धालुओं को स्नान, दर्शन और परिक्रमा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
अयोध्या से मैहर तक धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर की मांग
दीपावली मेले में उमड़े लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ ने चित्रकूट की धार्मिक और पर्यटन क्षमता को एक बार फिर उजागर किया है। इसी बीच चित्रकूट को अंतरराष्ट्रीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग भी उठी है। इसके तहत अयोध्या, प्रयागराज, चित्रकूट, मैहर, खजुराहो और बागेश्वर धाम को जोड़कर श्रीराम अंतरराज्यीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है।
प्रस्ताव में चित्रकूट को कॉरिडोर का प्रमुख केंद्र बनाकर 100 से 200 हेक्टेयर भूमि पर अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं ग्रामोदय मेला नगरी विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इसमें स्थायी मेला मैदान, अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं भारतीय संस्कृति संग्रहालय, भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख स्मृति एवं ग्रामोदय संग्रहालय, शोध केंद्र, संत निवास, धर्मशालाएं, सांस्कृतिक सभागार, हस्तशिल्प ग्राम, आधुनिक पार्किंग और श्रद्धालुओं के ठहरने की सुविधाएं विकसित करने की मांग शामिल है।
सालभर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का बने केंद्र
प्रस्ताव का उद्देश्य चित्रकूट को केवल दीपावली और अन्य प्रमुख मेलों तक सीमित न रखकर वर्षभर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का केंद्र बनाना है। इससे भगवान श्रीराम की वनवासकालीन स्मृतियों को संरक्षित करने के साथ राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख के ग्रामोदय, स्वावलंबन और सामाजिक पुनर्निर्माण के विचारों को भी वैश्विक पहचान मिल सकेगी।
इसके लिए केंद्र सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय से परियोजना की तकनीकी और आर्थिक संभाव्यता का परीक्षण कराने तथा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार के संयुक्त समन्वय से इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के रूप में विकसित करने का आग्रह किया गया है। परियोजना साकार होने पर बुंदेलखंड में पर्यटन को नई गति मिलने के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार, हस्तशिल्प, ग्रामोद्योग और व्यापार के अवसर मिलने की उम्मीद है।
दीपावली मेले में उमड़ा आस्था का जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि चित्रकूट में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि प्रस्तावित पर्यटन कॉरिडोर और अंतरराष्ट्रीय मेला नगरी धरातल पर उतरती है तो भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट देश ही नहीं, बल्कि विश्व के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना सकती है।


