Chitrakoot News: पाठा की गौशालाओं में बदहाली, भूख-प्यास से तड़प रहे गौवंश

Chitrakoot News: चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र की सकरौहा गौशाला में गौवंशों की बदहाल स्थिति सामने आई है। ग्रामीणों ने एनजीओ संचालकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

Sunil Shukla (Chitrakoot)
Published on: 27 May 2026 3:53 PM IST
Chitrakoot News: पाठा की गौशालाओं में बदहाली, भूख-प्यास से तड़प रहे गौवंश
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Chitrakoot News: बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े इलाकों में शामिल मानिकपुर क्षेत्र में भीषण गर्मी के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त है। इसी बीच विकासखंड की ग्राम पंचायत सकरौहा स्थित गौशाला में गौवंशों की बदहाल स्थिति सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से यहां की गौशाला एक एनजीओ द्वारा संचालित की जा रही है, लेकिन उनसे गौशाला की व्यवस्था संभल नहीं रही है।

गौशाला में संरक्षित गोवंशों की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। सुबह होते ही जानवरों को जंगलों में छोड़ दिया जाता है और शाम को जो जानवर वापस आ जाते हैं, उन्हें आसपास की चौकड़ियों में पानी पिलाकर फिर गौशाला में बंद कर दिया जाता है। इसके बावजूद सरकार से निर्धारित शुल्क लिया जा रहा है।मानिकपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सकरौहा की गौशाला की दयनीय स्थिति स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि एनजीओ संचालक “खाओ-कमाओ” नीति के तहत गौशाला तो संचालित कर रहे हैं, लेकिन गौवंशों की देखभाल पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।भीषण गर्मी से बचाव के लिए गौवंशों के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। भूख, प्यास और कुपोषण के कारण आए दिन गोवंश दम तोड़ रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं।

एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौशालाओं के लिए भारी-भरकम बजट जारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यहां गौवंशों को सूखा भूसा तक नसीब नहीं हो रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गौवंश भूख और प्यास से मर रहे हैं, तो हर माह भूसे के नाम पर आने वाला पैसा आखिर कौन खा रहा है? जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की लाख कोशिशों के बावजूद गौशालाओं की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। विस्तृत खबर अगले अंक में प्रकाशित की जाएगी।ग्रामीणों के अनुसार, केवल एक-दो चरवाहों के भरोसे गौशाला संचालित हो रही है। वहीं कुछ एनजीओ संचालकों में अधिक से अधिक गौशालाएं आवंटित कराने की होड़ मची हुई है। बिना किसी अनुभव के गौशालाओं को व्यवसाय के रूप में चलाया जा रहा है।इस पूरे मामले में जिला पशु चिकित्सा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि डॉक्टर से लेकर अधीक्षक तक इस पूरे खेल में शामिल हैं।

Shalini singh

Shalini singh

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उप संपादक | डिजिटल मीडिया पत्रकार

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