Chitrakoot News: बुंदेलखंड की धरती पर धान की फसल ने दिखाई दमदार उपज, प्रति हेक्टेयर 47 कुंतल उत्पादन

Chitrakoot News: कर्वी माफी में डीएम ने क्रॉप कटिंग का निरीक्षण किया। सीसीई ऐप पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार किसान कल्लूराम के खेत में प्रति हेक्टेयर 47 कुंतल धान की उपज दर्ज की गई।

Sunil Shukla (Chitrakoot)
Published on: 8 Nov 2026 10:30 AM IST
Rice crop shows breathtaking yield, 47 quintals per hectare
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बुंदेलखंड की धरती पर धान की फसल ने दिखाई दमदार उपज, प्रति हेक्टेयर 47 कुंतल उत्पादन (Photo- Newstrack)

Chitrakoot News: चित्रकूट। बुंदेलखंड में खेती-किसानी की मेहनत अब रंग लाने लगी है। खरीफ वर्ष 2026-27 में धान की फसल के उत्पादन का आकलन करने के लिए तहसील कर्वी के विकासखंड कर्वी के ग्राम पंचायत कर्वी माफी में क्रॉप कटिंग का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान चयनित किसान कल्लूराम के खेत में धान की फसल कटवाकर उत्पादन का आकलन किया गया। क्रॉप कटिंग के आधार पर प्रति हेक्टेयर 47 कुंतल धान की उपज प्राप्त होने का अनुमान सामने आया है।

किसान के गाटा संख्या 619 में निर्धारित 43.3 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के प्लॉट पर क्रॉप कटिंग कराई गई। कटाई के बाद प्राप्त धान का वजन 20.400 किलोग्राम पाया गया। इसके बाद इस आंकड़े के आधार पर सीसीई ऐप के माध्यम से उत्पादन का आकलन दर्ज किया गया। सामने आए परिणाम क्षेत्र में धान की खेती के बेहतर उत्पादन का संकेत दे रहे हैं।

सिंचाई और नियमित देखभाल से मिली मदद

इस दौरान किसान कल्लूराम ने बताया कि धान की रोपाई से लेकर फसल तैयार होने तक खेत में समय पर सिंचाई की गई और नियमित रूप से देखभाल की गई। फसल को बेहतर बनाने के लिए खेत में खरपतवार नियंत्रण पर भी ध्यान दिया गया। इसके अलावा जरूरत के अनुसार कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया गया, जिससे फसल को रोग और कीटों से बचाने में मदद मिली।


जिलाधिकारी ने की किसान की सराहना

जिलाधिकारी ने किसान की ओर से अपनाई गई कृषि पद्धतियों और खेत में प्राप्त उत्पादन की सराहना की। उन्होंने बेहतर सिंचाई प्रबंधन, समय पर कृषि कार्य और वैज्ञानिक तरीके से खेती को बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

क्रॉप कटिंग के माध्यम से जुटाए गए आंकड़े केवल फसल के वास्तविक उत्पादन का आकलन करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि किसानों के हित में संचालित होने वाली योजनाओं के निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे कृषि उत्पादन की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और खेती से जुड़ी योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार करने में मदद मिलेगी।

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