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फिर लौटा कोरोना? यूपी में मिला नया कोरोना केस, अस्पताल में भर्ती युवक
UP Corona Case: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 27 वर्षीय युवक कोरोना पॉजिटिव मिला। सांस लेने में दिक्कत के बाद बीएचयू अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने सतर्क रहने की सलाह दी।
UP Corona Case: उत्तर प्रदेश में एक बार फिर कोरोना संक्रमण का नया मामला सामने आया है। वाराणसी के 27 वर्षीय युवक की कोरोना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। युवक को सांस लेने में परेशानी होने पर अस्पताल ले जाया गया था, जहां जांच के बाद संक्रमण की पुष्टि हुई। फिलहाल उसका इलाज बीएचयू (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों की निगरानी में मरीज की देखभाल की जा रही है।
आशापुर का रहने वाला है संक्रमित युवक
जानकारी के अनुसार संक्रमित युवक वाराणसी के आशापुर क्षेत्र का निवासी है। कई दिनों से उसे सांस लेने में तकलीफ महसूस हो रही थी। इसके बाद चेस्ट और टीबी विभाग के डॉक्टरों ने कोविड-19 की जांच कराने की सलाह दी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की हालत फिलहाल नियंत्रण में है।
हर महीने मिल रहे हैं एक-दो कोरोना मरीज
बीएचयू के डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल में अब भी समय-समय पर कोरोना के मरीज सामने आ रहे हैं। औसतन हर महीने एक या दो लोगों की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव मिल रही है। हालांकि संक्रमितों की संख्या पहले की तुलना में बहुत कम है, लेकिन इससे यह साफ होता है कि कोरोना वायरस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और अभी भी सीमित स्तर पर लोगों को संक्रमित कर रहा है।
कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस अब पहले जैसा खतरनाक रूप नहीं दिखा रहा है। इसकी बड़ी वजह लोगों में बनी प्राकृतिक और वैक्सीन से विकसित हुई प्रतिरक्षा क्षमता (इम्यूनिटी) है। डॉक्टरों के अनुसार जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, बुजुर्ग हैं या पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें संक्रमण से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं होगा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस पूरी तरह समाप्त होने की संभावना कम है। अब यह अन्य मौसमी वायरस की तरह समय-समय पर सामने आ सकता है। पहले जब यह वायरस नया था, तब लोगों के शरीर में इसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता नहीं थी, इसलिए संक्रमण तेजी से फैला था। लेकिन वैक्सीनेशन और पहले हुए संक्रमण के कारण अब अधिकांश लोगों के शरीर में इससे लड़ने की क्षमता विकसित हो चुकी है। इसी वजह से अब गंभीर मामलों की संख्या काफी कम हो गई है।
पांच साल पहले दूसरी लहर ने मचाई थी तबाही
करीब पांच साल पहले कोरोना महामारी ने पूरे देश में भारी तबाही मचाई थी। खासकर दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ देखी गई थी। कई जगह बेड, ऑक्सीजन और जरूरी इलाज की कमी हो गई थी। अस्थायी अस्पताल बनाने पड़े थे और श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता था। उस दौर की भयावह तस्वीरें आज भी लोगों के मन में ताजा हैं।
लापरवाही नहीं, सतर्कता जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज से संक्रमण को गंभीर होने से रोका जा सकता है।


