‘IAS बनना आसान, लेकिन विधायक बनना…’, दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के ऐलान पर बिफरे OP राजभर

Divya Mittal Politics Entry: पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के ऐलान पर मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी। राजभर ने कहा कि IAS बनना आसान है, लेकिन चुनाव लड़ना और विधायक बनना मुश्किल है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 29 Sept 2026 2:44 PM IST
Divya Mittal Politics Entry | Om Prakash Rajbhar Reacts
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Divya Mittal Politics Entry: उत्तर प्रदेश की चर्चित पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल (Divya Mittal) ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अब राजनीति में आने का ऐलान कर दिया है। करीब 13 साल तक आईएएस (IAS) के तौर पर काम करने के बाद दिव्या मित्तल ने अगस्त में अपनी इच्छा से नौकरी से इस्तीफा दिया था। अब उन्होंने अपनी नई पारी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। दिव्या ने कहा है कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जिनकी बात सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती या पहुंचने के बाद भी नहीं सुनी जाती। उन्होंने किसी राजनीतिक दल के साथ जाने के बजाय आम लोगों के साथ मिलकर नया मंच बनाने की बात कही है।

दिव्या मित्तल के इस फैसले पर उत्तर प्रदेश के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आईएएस बनना आसान है, लेकिन चुनाव लड़ना और विधायक बनना आसान नहीं है। राजभर ने यह भी कहा कि दिव्या के पास खूब पैसा होगा, इसलिए वह चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन विधायक बनना इतना आसान नहीं है।

राजभर ने विपक्ष पर भी साधा निशाना

ओमप्रकाश राजभर ने इस दौरान विपक्षी गठबंधन पर भी निशाना साधा। उन्होंने ‘इंडिया’ ब्लॉक (INDIA Bloc) को लेकर कहा कि इसमें सब दगे कारतूस हैं। उन्होंने सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच चल रही तनातनी पर भी तंज कसा।

राजभर ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी 150 सीटों पर लड़ें या 403 सीटों पर, इससे कुछ नहीं होने वाला। उन्होंने अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर भी निशाना साधते हुए एनडीए (NDA) की जीत का दावा किया।

13 साल की IAS सेवा के बाद राजनीति का फैसला

दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद अगस्त में इस्तीफा देने का फैसला किया था। उनके इस्तीफे के बाद से ही यह सवाल लगातार बना हुआ था कि आखिर वह आगे क्या करेंगी। उनके राजनीति में आने की अटकलें पहले से लगाई जा रही थीं, लेकिन इसके साथ ही कोचिंग पढ़ाने, विदेश लौटने या परिवार के साथ समय बिताने जैसे कयास भी लगाए जा रहे थे।

अब दिव्या मित्तल ने खुद इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए अपनी आगे की योजना का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का फैसला अचानक नहीं लिया गया। इस्तीफे के बाद उनके मन में भी आगे की जिंदगी को लेकर कई सवाल थे और इन सवालों का जवाब देने के लिए उन्हें एक बड़ा फैसला लेने के साथ हिम्मत जुटानी पड़ी।

'सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंचने वाली आवाज बनना चाहती हैं'

दिव्या मित्तल ने कहा कि राजनीति में आने का उनका मकसद उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी समस्याएं सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पातीं या पहुंचने के बाद भी सुनी नहीं जातीं।

उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के अनुभवों का जिक्र करते हुए शिक्षा, सड़क, पुल, भ्रष्टाचार और आम लोगों को न्याय मिलने में होने वाली देरी जैसे मुद्दे उठाए। उनका कहना है कि प्रशासन में काम करते हुए उन्होंने ऐसे कई मामले देखे, जहां नियम और संसाधन मौजूद होने के बावजूद काम जमीन पर नहीं पहुंच पाया।

'लहुरियादह की पहाड़ी का वो स्कूल'

दिव्या मित्तल ने लहुरियादह की पहाड़ी का एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान एक महिला उनके पास आई और उसने अपने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद भी बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करने की मांग की।

दिव्या के मुताबिक, उस महिला के घर में उस समय पानी की सुविधा तक नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद वह अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित थी। उसने गांव में आगे की कक्षाओं के लिए स्कूल बनाने की मांग की थी।

दिव्या मित्तल ने बताया कि नियमों के तहत स्कूल को मंजूरी भी दे दी गई, लेकिन तीन साल गुजरने के बाद भी उसका निर्माण शुरू नहीं हो सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पैसा था, नियम थे और स्कूल की स्वीकृति भी थी, तो फिर निर्माण क्यों नहीं हुआ।

उनके मुताबिक, ऐसे मामलों के पीछे केवल इरादे की कमी थी। उन्होंने कहा कि वह ऐसे अधूरे स्कूलों का हिसाब चाहती हैं।

'जमीन का पट्टा मिला, फिर भी कब्जा नहीं'

पूर्व आईएएस अधिकारी ने राजस्व विभाग में विशेष सचिव रहते हुए एक भूमिहीन व्यक्ति से जुड़े मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति को सरकारी जमीन का पट्टा मिला था, लेकिन इसके बावजूद उसे जमीन पर कब्जा नहीं मिल पाया।

जब मामले की जांच की गई तो संबंधित रिपोर्ट गलत पाई गई और रिपोर्ट तैयार करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। हालांकि, दिव्या के मुताबिक, जमीन पर कब्जा दिलाने के मामले में कथित तौर पर ऊपर से रोक लगाए जाने की बात सामने आई।

यही सवाल उन्होंने अपनी राजनीतिक मुहिम के साथ जोड़ा। दिव्या ने पूछा कि आखिर यह ‘ऊपर’ कौन है, जबकि संविधान के मुताबिक जनता सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को उसका अधिकार देना किसी की कृपा नहीं, बल्कि उसका हक है।

सड़क, पुल और गड्ढों से लेकर पेपर लीक तक मुद्दे

दिव्या मित्तल ने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को भी अपनी राजनीति के केंद्र में रखा है। उन्होंने कहा कि आज भी कई गांव ऐसे हैं, जहां सड़क नहीं है। कई जगह नदियों पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में गांवों का संपर्क कट जाता है।

उन्होंने खराब सड़कों और गड्ढों की वजह से होने वाली दुर्घटनाओं पर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को भी उठाया।

दिव्या ने पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि युवा सालों तक मेहनत करके परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनकी मेहनत प्रभावित होती है।

AI के दौर में रोजगार को लेकर भी सवाल

दिव्या मित्तल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई (Artificial Intelligence) के बढ़ते इस्तेमाल को भी अपनी चिंताओं में शामिल किया। उनका कहना है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच रोजगार के भविष्य को लेकर युवाओं और अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं।

उन्होंने इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा और दूरगामी सोच की जरूरत बताई। यानी उनकी प्रस्तावित राजनीतिक मुहिम में सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सवाल ही नहीं, बल्कि युवाओं और रोजगार का भविष्य भी अहम मुद्दा होगा।

किसी पार्टी में नहीं जाएंगी, नया मंच बनाने की बात

दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक सोच को भी साफ किया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक राजनेता को बदलना नहीं है, बल्कि राजनीति में इरादे, न्याय, संवेदनशीलता और दूरदर्शिता को प्राथमिकता देना है।

उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीति करना चाहती हैं, जिसमें लोगों को सिर्फ वोट के आंकड़ों के तौर पर नहीं देखा जाए। उनकी बात सुनी जाए और उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।

दिव्या ने साफ कहा है कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़कर राजनीति नहीं करेंगी। इसके बजाय वह आम लोगों के साथ मिलकर एक नया मंच तैयार करेंगी। हालिया घोषणा में भी उन्होंने उत्तर प्रदेश से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत और लोगों के साथ स्वतंत्र मंच बनाने की बात कही है।

सोशल मीडिया की कथित गलत जानकारी पर भी बोलीं

दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर सामने आई कुछ चर्चाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जहां कई लोगों ने उनके फैसले का समर्थन किया, वहीं एक राजनीतिक मुलाकात को लेकर कथित तौर पर गलत जानकारी भी साझा की गई।

उन्होंने इसे एक महिला को राजनीति में आने से डराने की कोशिश बताया और कहा कि वह ऐसी बातों से डरने वाली नहीं हैं।

IAS की नौकरी उनके लिए सिर्फ एक चैप्टर

दिव्या मित्तल पहले ही कह चुकी थीं कि आईएएस की नौकरी उनके जीवन का सिर्फ एक चैप्टर है, पूरी जिंदगी नहीं। 13 साल प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद उन्होंने अपनी इच्छा से यह रास्ता छोड़ा।

उनका इस्तीफा अगस्त में सामने आया था और बाद में सरकार ने इसे मंजूर कर लिया। इसके बाद उनके अगले कदम को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी।

विदेश की नौकरी से IAS और अब राजनीति तक का सफर

दिव्या मित्तल और उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों का सफर भी काफी अलग रहा है। दोनों ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई करने के बाद विदेश में मल्टीनेशनल कंपनियों में काम किया था।

दिव्या ने लंदन में जेपी मॉर्गन (JP Morgan) में नौकरी की, जबकि उनके पति गगनदीप सिंह ढिल्लों सिटी ग्रुप (Citi Group) में काम करते थे। विदेश में नौकरी करने के बाद दोनों ने भारत लौटकर सिविल सेवा में जाने का फैसला किया।

मिर्जापुर से देवरिया तक प्रशासनिक पहचान

दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश की चर्चित आईएएस अधिकारियों में रही हैं। अपने करीब 13 साल के प्रशासनिक कार्यकाल में उन्होंने मिर्जापुर, संत कबीर नगर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी के तौर पर जिम्मेदारी संभाली।

इन जिलों में काम करने के दौरान उनकी सख्त और संवेदनशील कार्यशैली चर्चा में रही। खासकर जनता से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर उनके काम करने के तरीके ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।

अब प्रशासनिक सेवा के बाद दिव्या मित्तल ने राजनीति का रास्ता चुना है। एक तरफ वह आम लोगों के साथ नया राजनीतिक मंच बनाने की बात कर रही हैं, तो दूसरी तरफ ओमप्रकाश राजभर ने उनके चुनाव लड़ने और विधायक बनने की राह को लेकर सवाल उठाए हैं। ऐसे में दिव्या मित्तल की यह नई राजनीतिक पारी उत्तर प्रदेश की राजनीति में किस तरह आगे बढ़ती है, इस पर अब नजर रहेगी।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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