TRENDING TAGS :
Etah News: “खाद नहीं, पानी नहीं, पूरी बिजली भी नहीं”: धान की रोपाई से पहले संकट में किसान
Etah News: एटा जिले में धान की रोपाई से पहले किसान खाद, सिंचाई के पानी और बिजली की कमी से जूझ रहे हैं। किसानों ने खाद की कालाबाजारी, नहरों में पानी की कमी और अनियमित बिजली आपूर्ति को लेकर सरकार से तत्काल समाधान की मांग की है।
Etah News
Etah News: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही जिले के किसानों की समस्याएं खुलकर सामने आने लगी हैं। भारतीय हलधर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरेंद्र सोलंकी ने किसानों की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार किसानों को पर्याप्त खाद, बीज, पानी और बिजली उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर किसानों से अधिक उत्पादन की अपेक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर खेती की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। ऐसे में धान की रोपाई का समय नजदीक आने के बावजूद किसान चिंता और असमंजस की स्थिति में हैं।
सोलंकी ने कहा कि किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए फार्मर रजिस्ट्री की व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन धरातल पर किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि कई किसानों को एक भी बोरी खाद नहीं मिली है, जबकि बाजार में यूरिया और अन्य उर्वरक निर्धारित मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर बेचे जा रहे हैं। उन्होंने सरकार की जैविक खेती को बढ़ावा देने की नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जैविक खेती के शुरुआती वर्षों में उत्पादन कम होता है, जिससे छोटे और मध्यम किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है।
ग्राम भोजपुर निवासी किसान अनिल कुमार ने बताया कि उनके खेतों के पास से नहर गुजरती है, लेकिन कुलावा न होने के कारण नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने कहा कि धान की खेती के लिए पानी सबसे बड़ी आवश्यकता है, लेकिन सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही बिजली की आपूर्ति भी केवल तीन से चार घंटे ही हो रही है, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।खाद की समस्या को लेकर अनिल कुमार ने बताया कि 275 रुपये मूल्य वाली खाद की एक बोरी कई जगह 700 से 800 रुपये तक में बिक रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को आवश्यकता के अनुसार खाद नहीं मिलने से धान की बुवाई प्रभावित हो सकती है।
ब्लॉक शीतलपुर के ग्राम चुरैथा निवासी किसान महेंद्र कुमार ने बताया कि भीषण गर्मी और बारिश की कमी के कारण गांव में पानी का संकट गहरा गया है। धान की फसल पूरी तरह पानी पर निर्भर होती है और किसान मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से प्रतिदिन 10 से 12 घंटे नियमित बिजली आपूर्ति की मांग की।वहीं, ब्लॉक निधौली कलां के ग्राम होर्ची निवासी किसान दिग्दर्शन ने बताया कि उनके क्षेत्र में वर्षों से बंबे की सफाई नहीं हुई है, जिससे उसमें पर्याप्त पानी नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि बंबे में पर्याप्त पानी आने पर क्षेत्र के किसानों की धान की खेती बेहतर होती है, लेकिन इस बार सिंचाई की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि उनके परिवार के पास लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि है और फार्मर रजिस्ट्री के अनुसार उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद मिलनी चाहिए, लेकिन अब तक उन्हें एक भी बोरी खाद नहीं मिली है। मजबूरी में किसानों को 600 से 700 रुपये तक देकर ब्लैक मार्केट से यूरिया खरीदनी पड़ रही है।धीरेंद्र सोलंकी ने यह भी कहा कि निधौली कलां क्षेत्र से गुजरने वाली अरिहंत नदी में पिछले वर्ष आई बाढ़ से दर्जनों गांव प्रभावित हुए थे। उस समय किसानों ने जल निकासी और नदी की सफाई की मांग को लेकर आंदोलन किया था। उन्होंने मांग की कि नदियों, नहरों, नालों और बंबों की समय रहते सफाई कराई जाए, ताकि सिंचाई का पानी किसानों के खेतों तक पहुंच सके।
किसान देवेश कुमार का कहना है कि डीजल के बढ़ते खर्च, खाद की कमी, अनियमित बिजली आपूर्ति और मानसून की अनिश्चितता ने खेती की लागत बढ़ा दी है। जिले के किसान अब आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं और चाहते हैं कि समय पर मानसून पहुंचे, सिंचाई व्यवस्था में सुधार हो, खाद की कालाबाजारी पर रोक लगे तथा उन्हें खेती के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।किसानों का मानना है कि यदि उनकी मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो खरीफ सीजन की फसल के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।


