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Etah News: मेडिकल कॉलेज की लैब में ओपीडी शुरू होने के 35 मिनट तक नहीं पहुंचा स्टाफ, मरीज भटकते रहे
Etah News: एटा मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी लैब में ओपीडी शुरू होने के 35 मिनट बाद तक स्टाफ नहीं पहुंचा। मरीज सैंपल जांच के लिए परेशान रहे, अव्यवस्था पर उठे सवाल।
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Etah News: वीरांगना रानी अवंतीबाई स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी लैब का गुरुवार सुबह किया गया रियलिटी चेक स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने लेकर आया। सुबह 8 बजे ओपीडी शुरू होने का निर्धारित समय है, लेकिन सैंपल कलेक्शन कक्ष संख्या-24 पर सुबह 8:35 बजे तक कोई भी तकनीकी कर्मचारी मौजूद नहीं मिला।
बीमारी से परेशान, इलाज की उम्मीद लेकर समय से पहुंचे मरीज और उनके परिजन स्टाफ का इंतजार करते रहे। लैब का कमरा लंबे समय तक बंद रहा और खुलने के बाद भी वहां कोई तकनीकी कर्मचारी मौजूद नहीं था।मौके पर मौजूद मरीज सुधीर और प्रमोद कुमार ने बताया कि सैंपल लेने के लिए विभाग द्वारा चार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन निर्धारित समय पर कोई भी कर्मचारी नहीं पहुंचता। सुबह करीब 8:10 बजे एक वार्ड बॉय आया, जिसने पहले कमरे की साफ-सफाई की। अन्य कर्मचारियों के बारे में पूछने पर उसने बताया कि संबंधित कर्मचारी कासगंज से एटा आते हैं, इसलिए अक्सर देर हो जाती है। उसने यह भी बताया कि अन्य कर्मचारी करीब 9 बजे तक आते हैं।
हैरानी की बात यह रही कि जब इस अव्यवस्था के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो मौके पर मौजूद एक कर्मचारी ने कहा, "सभी को लैब ही दिखाई देती है।"यह जवाब उन मरीजों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है, जो सुबह से बिना कुछ खाए लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। सवाल यह है कि जब समय पर सेवा देना कर्मचारियों की जिम्मेदारी है, तो इस लापरवाही की जवाबदेही कौन तय करेगा?उक्त मामले की जानकारी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बलवीर सिंह को फोन और फोटो के माध्यम से दी गई। उन्होंने तत्काल सैंपल लेने के लिए कर्मचारी भेजने का आश्वासन दिया, लेकिन करीब 20 मिनट तक कोई तकनीकी कर्मचारी नहीं पहुंचा। अंततः परेशान मरीजों की मजबूरी को देखते हुए वार्ड बॉय ने ही सैंपल लिए। प्राचार्य ने यह भी स्वीकार किया कि ओपीडी का समय सुबह 8 बजे है, लेकिन अधिकांश स्टाफ 9 बजे तक पहुंचता है। हालांकि, यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है।
मेडिकल कॉलेज की लैब को लेकर पहले भी कई शिकायतें सामने आती रही हैं। मरीजों और तीमारदारों ने समय-समय पर साफ-सफाई, जांच व्यवस्था और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाया है कि मरीजों को सरकारी जांच के बजाय निजी लैब में जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मेडिकल कॉलेज में रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, तब ओपीडी शुरू होने के बाद भी लैब कर्मचारियों का समय पर न पहुंचना किसकी जिम्मेदारी है? क्या मरीजों का समय और उनकी पीड़ा किसी की जवाबदेही नहीं है?
स्वास्थ्य विभाग को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिले। यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का भरोसा कायम रह सके।व्यवस्था से परेशान लोगों ने जिलाधिकारी एटा, अरविंद सिंह से लैब में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदारी तय करने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


