Etah News: द्रौपदी चीरहरण प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, भगवान को बताया अंतिम सहारा

Etah News: एटा के मीसाखुर्द स्थित मीशेश्वर धाम में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन डॉ. विनीतानंद जी महाराज ने द्रौपदी चीरहरण प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब मानव के सभी सहारे समाप्त हो जाते हैं, तब भगवान ही अंतिम आश्रय बनते हैं।

Sunil Mishra
Published on: 19 Jun 2026 8:40 PM IST
Etah News: द्रौपदी चीरहरण प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, भगवान को बताया अंतिम सहारा
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Etah News: उत्तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर क्षेत्र स्थित गांव मीसाखुर्द (Misakhurd) के प्राचीन मीशेश्वर धाम (Misheshwar Dham) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा (Shrimad Bhagwat Katha) के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास भगवताचार्य डॉ. विनीतानंद जी महाराज (Dr. Vineetanand Ji Maharaj) ने द्रौपदी चीरहरण (Draupadi Cheerharan) का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए भक्त और भगवान के अटूट संबंध का भावपूर्ण वर्णन किया। उनके प्रवचनों से पूरा कथा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूब गया और श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए।

द्रौपदी ने संकट में किया था भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण

कथा के दौरान डॉ. विनीतानंद जी महाराज ने कहा कि द्वापर युग (Dwapar Yuga) में जब कौरव सभा में द्रौपदी का चीरहरण किया जा रहा था, तब वहां मौजूद बड़े-बड़े योद्धा और विद्वान मौन बने रहे। कोई भी उनकी रक्षा के लिए आगे नहीं आया।उन्होंने बताया कि ऐसे कठिन और असहाय क्षण में द्रौपदी ने पूरे विश्वास, श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) का स्मरण किया। भक्त की पुकार सुनकर स्वयं भगवान ने उनकी लाज बचाई और उनकी रक्षा की।

जहां मानव की शक्ति समाप्त होती है, वहीं से भगवान की कृपा शुरू होती है

डॉ. विनीतानंद जी महाराज ने कहा कि द्रौपदी चीरहरण का प्रसंग केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन का गहरा संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के सभी सांसारिक सहारे समाप्त हो जाते हैं और वह सच्चे मन से ईश्वर को पुकारता है, तब भगवान उसकी रक्षा अवश्य करते हैं।उन्होंने कहा, "जहां मानव की शक्ति समाप्त होती है, वहीं से भगवान की कृपा प्रारंभ होती है।" यही अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण व्यक्ति को जीवन के बड़े से बड़े संकट से बाहर निकालने की शक्ति प्रदान करता है।

जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयघोष से गूंजा कथा पंडाल

द्रौपदी चीरहरण प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में पूरी तरह लीन दिखाई दिए। कथा के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।पूरा कथा पंडाल "राधे-राधे" और "जय श्रीकृष्ण" के जयघोष से गूंज उठा। भक्तों ने कथा के माध्यम से भक्ति, समर्पण और ईश्वर पर विश्वास का संदेश ग्रहण किया।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे मौजूद

कार्यक्रम में परीक्षित कमल कुमार एवं मधुवाला देवी के साथ संजू शर्मा, सुबोध कुमार सिंह, रवेंद्र पाल सिंह, प्रवीण कुमार, अशोक कुमार समेत क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।कथा के समापन के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती में भाग लिया और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति तथा कल्याण की कामना की। आयोजकों के अनुसार आगामी दिनों में भी कथा के विभिन्न प्रसंगों का श्रद्धालु लाभ उठाएंगे।

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