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'20 हजार करोड़ का हुआ घपला...' Ram Mandir को लेकर इटावा में Ramgopal Yadav का बड़ा दावा, जांच की उठाई मांग
Ramgopal Yadav On Ram Mandir Donation: रामगोपाल यादव का यह बयान ऐसे वक़्त सामने आया है, जब राजनीतिक गलियारों में विभिन्न मुद्दों को लेकर बयानबाजी तेज है।
Ramgopal Yadav
Ramgopal Yadav: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर बड़ा बयान दिया है। इटावा में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर निर्माण से जुड़े चंदे में बड़े पैमाने पर बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है और इसकी निष्पक्ष रूप से जांच कराई जानी चाहिए।
रामगोपाल यादव का यह बयान ऐसे वक़्त सामने आया है, जब राजनीतिक गलियारों में विभिन्न मुद्दों को लेकर बयानबाजी तेज है। उनके आरोपों के बाद एक बार फिर राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
'20,000 करोड़ के घपले' का लगाया आरोप
इटावा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रामगोपाल यादव ने कहा कि "कम से कम 20 हजार करोड़ रुपये का घपला किया गया है। इसमें बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। लोगों ने 50-50 किलो सोना दान में दिया, लेकिन उसका कोई स्पष्ट रूप से कोई हिसाब नहीं है। हीरे के हार और अन्य कीमती आभूषण भी चढ़ाए गए, लेकिन वे कहां गए, इसकी जानकारी सामने नहीं आई।"
उन्होंने कहा कि पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ मंदिर निर्माण के लिए नकद राशि, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं दान की थीं। ऐसे में दान की गई संपत्ति का पूरा और पारदर्शी हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
सपा नेता ने कहा कि यदि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़े इस विषय में पारदर्शिता बेहद आवश्यक है और सभी लेन-देन का सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए।
रामगोपाल यादव ने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक ट्रस्ट से जुड़े आर्थिक मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राजनीतिक बयान से बढ़ी हलचल
रामगोपाल यादव के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष जहां इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांग सकता है, वहीं सत्तारूढ़ दल की तरफ से भी इस बयान पर प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल में इस तरह के बयान राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, अब तक उनके आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
बता दे, इस मामले में संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच और संबंधित संस्थाओं के पक्ष का इंतजार करना आवश्यक है।


