UP News: यूपी में फर्जी डॉक्टरों पर बड़ा एक्शन, 41 पर FIR की तैयारी; 14 हजार डिग्रियों की होगी जांच

UP News: यूपी में 41 आयुर्वेदिक डॉक्टरों पर फर्जी डिग्री से पंजीकरण का आरोप है। FIR की तैयारी के साथ 2010 से पंजीकृत 14 हजार से अधिक डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच होगी।

Newstrack Network
Published on: 24 Aug 2026 11:46 PM IST
Fake Ayurvedic Doctors
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Fake Ayurvedic Doctors (Image Credit-Social Media)

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिना वैध डिग्री के प्रैक्टिस कर रहे फर्जी डॉक्टरों और उनके मददगार विभागीय तंत्र पर प्रशासन का कड़ा शिकंजा कस गया है। फर्जी डिग्रियों के सहारे पंजीयन हासिल करने वाले 41 आयुर्वेदिक डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दे दी गई है। इसके साथ ही राज्य में पिछले 15 वर्षों (2010 के बाद) के दौरान आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में पंजीकृत हुए करीब 14 हजार से अधिक डॉक्टरों की डिग्रियों, अंकतालिकाओं और इंटर्नशिप प्रमाणपत्रों की व्यापक स्क्रूटनी शुरू कर दी गई है।

NCISM की जांच में खुला फर्जीवाड़ा, सीएम से शिकायत के बाद एक्शन

प्रदेश में BAMS और BUMS की डिग्री पूरी करने के बाद कानूनी तौर पर प्रैक्टिस करने के लिए आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में अनिवार्य पंजीकरण कराना होता है। वर्ष 2025 में पांच संदिग्ध डॉक्टरों के सामने आने के बाद 'भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग' (NCISM) की केंद्रीय टीम ने लखनऊ पहुंचकर पड़ताल की। जांच में पाया गया कि 41 डॉक्टरों ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित 'श्री कृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल' के नाम से फर्जी डिग्रियां लगाकर बोर्ड में पंजीयन हासिल किया था।

रजिस्ट्रार डॉ. अखिलेश कुमार वर्मा द्वारा इन सभी का पंजीयन निरस्त किए जाने के बावजूद बोर्ड स्तर पर इनके खिलाफ कोई कानूनी FIR दर्ज नहीं कराई गई, बल्कि संबंधित जिलों के क्षेत्रीय अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गई। 4 अगस्त को मामले की सीधी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से किए जाने के बाद शासन स्तर पर हड़कंप मचा और बोर्ड नियंत्रक ने शनिवार को 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की औपचारिक तहरीर दी।

15-15 लाख रुपये में फर्जी पंजीयन का खेल

मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार राय ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि इस फर्जीवाड़े में प्रति डॉक्टर 15-15 लाख रुपये की अवैध वसूली कर फर्जी दस्तावेजों पर पंजीयन जारी किए गए। शिकायत में सामने आया है कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच:

एनआईए जयपुर (NIA Jaipur): 10 डॉक्टरों ने राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के नाम से फर्जी डिग्री लगाकर पंजीकरण कराया।

मंदसौर इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा (मध्य प्रदेश): 5 डॉक्टरों ने इस संस्थान के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यूपी में प्रैक्टिस का लाइसेंस हासिल किया।

बोर्ड के नियंत्रक मदन सिंह गर्ज्याल के अनुसार, 2010 से अब तक पंजीकृत सभी डॉक्टरों के दस्तावेजों की गहराई से जांच कराई जा रही है। जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने पर संबंधित डॉक्टरों के पंजीयन तत्काल रद्द कर आपराधिक केस दर्ज कराए जाएंगे। इसके साथ ही, इस सिंडिकेट में मिलीभगत रखने वाले बोर्ड के कर्मचारियों, तत्कालीन अधिकारियों और क्षेत्रीय आयुर्वेदिक-यूनानी अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय व कानूनी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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