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रेलवे ट्रैक पर मिली थी नर्सिंग छात्रा की लाश, 4 दिन बाद कब्र से क्यों निकलवाया गया शव?
Firozabad Nursing Student Death: फिरोजाबाद में दलित नर्सिंग छात्रा प्रीति की संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने कब्र से शव निकलवाया। कॉलेज प्रबंधन पर हत्या और यौन हिंसा की कोशिश के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस CCTV फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच कर रही है।
Dalit Nursing Student Case
Firozabad Nursing Student Death: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में दलित नर्सिंग छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मैनपुरी की रहने वाली जीएनएम प्रथम वर्ष की छात्रा प्रीति का शव 28 अक्टूबर की सुबह कॉलेज से करीब 300 मीटर दूर रेलवे ट्रैक पर मिला था। परिवार ने कॉलेज प्रबंधन पर यौन हिंसा की कोशिश और हत्या का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वारदात को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव रेलवे ट्रैक पर रखा गया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने निजी नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य और उनके बेटे के खिलाफ हत्या, दुष्कर्म के प्रयास और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम (SC-ST Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने और जांच से असंतुष्ट परिजनों ने 31 अक्टूबर को छात्रा का शव कब्र से बाहर निकलवाकर प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि मामले की दोबारा पोस्टमार्टम (Postmortem) जांच कराई जाए।
कॉलेज प्रबंधन पर उत्पीड़न और हत्या के आरोप
प्रीति फिरोजाबाद के मटसैना थाना क्षेत्र स्थित एक निजी नर्सिंग कॉलेज के छात्रावास (Hostel) में रहकर पढ़ाई कर रही थी। उसके भाई रोहित ने आरोप लगाया है कि कॉलेज प्रबंधन से जुड़े लोग छात्रा पर अनुचित संबंध बनाने का दबाव डालते थे। परिवार का कहना है कि प्रीति ने इस बारे में उन्हें पहले भी जानकारी दी थी।
परिजनों के मुताबिक, 27 अक्टूबर की रात छात्रा को छात्रावास से बाहर बुलाया गया था। इसके बाद उसकी मौत हो गई। परिवार ने कॉलेज के प्राचार्य सुरेश चंद्र दक्ष और उनके बेटे यश दक्ष को इस मामले में आरोपी बनाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और आरोपी पिता-पुत्र का विस्तृत पक्ष भी सामने नहीं आया है।
CCTV फुटेज में रात ढाई बजे अकेले बाहर जाती दिखी छात्रा
पुलिस की शुरुआती जांच (Initial Investigation) में घटना से जुड़ा एक अलग पहलू सामने आया है। क्षेत्राधिकारी तेजस त्रिपाठी के मुताबिक, कॉलेज और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों (CCTV Cameras) की फुटेज में छात्रा रात करीब ढाई बजे अकेले छात्रावास की चहारदीवारी पार करके बाहर जाती दिखाई दे रही है।
पुलिस ने रेलवे ट्रैक के आसपास लगे कैमरों की फुटेज भी खंगाली है। ट्रेन चालक के बयान और घटनास्थल से जुड़े दूसरे साक्ष्यों के आधार पर छात्रा के ट्रेन की चपेट में आने की आशंका की जांच की जा रही है। हालांकि, फुटेज में छात्रा का अकेले बाहर जाना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसने आत्महत्या की थी।
पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट (Suicide Note) नहीं मिला है। इसके अलावा छात्रा के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (Call Detail Record) भी जांच के दायरे में है, ताकि उसकी मौत से पहले हुई बातचीत और संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर परिवार को संदेह, कब्र से निकलवाया शव
छात्रा के शव का पोस्टमार्टम चिकित्सकों के पैनल ने किया था। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी (Videography) भी कराई गई थी। पुलिस के एक अधिकारी का दावा है कि पोस्टमार्टम के शुरुआती निष्कर्ष परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं करते। हालांकि, विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में यौन हिंसा, मौत की वास्तविक वजह और शरीर पर चोटों की प्रकृति को लेकर अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है।
29 अक्टूबर को प्रीति के शव को मैनपुरी स्थित उसके पैतृक गांव में दफना दिया गया था। लेकिन जांच से संतुष्ट नहीं होने पर परिवार ने 31 अक्टूबर की सुबह शव को कब्र से बाहर निकलवाया और उसे लेकर फिरोजाबाद पहुंच गया। परिजनों ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने, आरोपियों की गिरफ्तारी, संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई और आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान तनाव, पुलिस की निगरानी में दोबारा दफनाया गया शव
छात्रा के शव को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव बढ़ गया, जब ग्रामीणों ने सड़क अवरुद्ध करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। बाद में अधिकारियों ने परिवार को समझाया और शव को वापस मैनपुरी भेजा गया। वहां पुलिस की निगरानी में छात्रा के शव को दोबारा दफना दिया गया।
फिरोजाबाद के क्षेत्राधिकारी तेजस त्रिपाठी के अनुसार, पुलिस मामले की हर संभावित दिशा से जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
छात्रा की मौत से जुड़े तीन बड़े सवाल
इस पूरे मामले में अभी कई अहम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रीति रात में छात्रावास से बाहर क्यों निकली और रेलवे ट्रैक तक कैसे पहुंची? क्या उसकी मौत से पहले उसके साथ कोई आपराधिक घटना हुई थी? दूसरा सवाल कॉलेज प्रबंधन पर लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। पुलिस जांच में इन आरोपों की पुष्टि के लिए कौन-कौन से साक्ष्य सामने आते हैं, यह देखना अहम होगा।
तीसरा महत्वपूर्ण सवाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर है। परिवार रिपोर्ट के निष्कर्षों से संतुष्ट नहीं है और दोबारा जांच की मांग कर रहा है। ऐसे में मौत की असल वजह, शरीर पर मिले निशान और अन्य चिकित्सकीय साक्ष्यों की पड़ताल जरूरी है। छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था और छात्राओं की शिकायतों पर कॉलेज प्रबंधन की प्रतिक्रिया भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।
फिलहाल प्रीति की मौत को हत्या या आत्महत्या मानने से पहले पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का सामने आना जरूरी है। मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


