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Firozabad News: नगर निगम घोटाले में विधायक मनीष असीजा समेत 11 को कोर्ट का नोटिस
Firozabad News: फिरोजाबाद नगर निगम घोटाला मामले में विधायक मनीष असीजा समेत 11 लोगों को कोर्ट का नोटिस, 31 अक्टूबर को पेश होने के निर्देश।
Firozabad News(Photo-Social Media)
Firozabad News: फिरोजाबाद नगर निगम में हुए करोड़ों रुपये के कथित निर्माण घोटाले के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शिवसेना जिला प्रमुख पं. राजीव कुमार शर्मा द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई करते हुए CJM विजय कुमार ने पूर्व नगर पालिका चेयरमैन और वर्तमान विधायक मनीष असीजा समेत 11 लोगों को नोटिस जारी कर 31 अक्टूबर 2026 को कोर्ट में तलब किया है। यह नोटिस 6 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया था। पं. राजीव कुमार शर्मा के अधिवक्ता संजीव कुलश्रेष्ठ द्वारा प्रस्तुत तर्कों के आधार पर कोर्ट ने सभी विपक्षियों से जवाब तलब किया है।
इन अधिकारियों और कर्मचारियों को मिला नोटिस
कोर्ट ने मनीष असीजा पूर्व चेयरमैन व वर्तमान विधायक के अलावा डी. के. सिन्हा तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, अनिल कुमार तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, दिनेश सचान तत्कालीन सहायक अभियंता, राम शंकर राम सहायक अभियंता, प्रभाकर निरंजन तत्कालीन अवर अभियंता, ओ. पी. निगम तत्कालीन अवर अभियंता, अतुल पाण्डेय तत्कालीन सहायक अभियंता, सुरेन्द्र रावत निर्माण लिपिक, प्रमोद यादव निर्माण लिपिक व संबंधित पटल सहायक के खिलाफ नोटिस जारी किया है।
क्या है आरोप?
अधिवक्ता संजीव कुलश्रेष्ठ ने बताया कि विपक्षीगणों के कार्यकाल में नगर में महापुरुषों की मूर्तियां, भव्य द्वार और पार्कों का निर्माण कराया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन निर्माण कार्यों से जुड़ी कोई भी पत्रावली नगर निगम में मौजूद नहीं है। जबकि बिल-वाउचर और ऑर्डर शीट यह साबित करते हैं कि इन निर्माणों के लिए सरकारी खजाने से धन जारी हुआ था।
आरोप है कि निर्माण स्थलों पर लगी पट्टिकाओं से स्पष्ट होता है कि ये सभी कार्य उन्हीं के कार्यकाल में करोड़ों-अरबों रुपये के सरकारी धन से कराए गए। इसके अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराणा प्रताप की मूर्तियां बनवाने के लिए जयपुर भेजी गई थीं, जो आज तक बनकर नहीं आई हैं। इसमें करोड़ों रुपये के गबन का आरोप है।
शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि जब-जब उन्होंने इन निर्माण कार्यों में अनियमितता और मूर्तियों को लगवाने की मांग को लेकर शिकायत की, तब-तब उनके साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने बताया कि नगर निगम में पत्रावलियां न होने की जानकारी स्वयं 23 सितंबर 2020 को अतुल पाण्डेय द्वारा शपथ पत्र पर दी गई थी, जिस पर निर्माण लिपिक सुरेन्द्र रावत और प्रमोद यादव के भी हस्ताक्षर हैं। जबकि पूरा शहर जानता है कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर जातिवाद को बढ़ावा देते हुए कई मूर्तियां, द्वार और पार्क बनाए गए हैं।


