Gonda News: शादी का वादा टूटा तो टावर पर चढ़ी युवती, गोंडा में हंगामा

Gonda News: गोंडा के छपिया क्षेत्र में शादी अधर में लटकने और संवाद टूटने से आहत युवती मोबाइल टावर पर चढ़ गई, पुलिस ने समझाकर सुरक्षित उतारा।

Radheshyam Mishra
Published on: 22 May 2026 7:43 PM IST
Girls climb tower to climb tower, riots in Gonda
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शादी का वादा टूटा तो टावर पर चढ़ी युवती, गोंडा में हंगामा (Photo- Newstrack)

Gonda News: गोंडा। छपिया थाना क्षेत्र के हथियागढ़ बाजार में शुक्रवार को हुई एक घटना ने केवल लोगों का ध्यान ही नहीं खींचा, बल्कि समाज में रिश्तों, वादों और युवतियों की सामाजिक स्थिति को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। प्रेमी द्वारा शादी का वादा पूरा न किए जाने से आहत एक युवती मोबाइल टावर पर चढ़ गई। करीब दो घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों की समझाइश से उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

पहली नजर में यह मामला प्रेम प्रसंग में विवाद का लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की परिस्थितियां कहीं अधिक जटिल दिखाई देती हैं। जानकारी के अनुसार छपिया थाना क्षेत्र के रायपुर गांव की रहने वाली 23 वर्षीय रेशमा का कहना है कि करीब तीन वर्ष पहले दोनों परिवारों की सहमति से उसकी शादी बलरामपुर जनपद के सादुल्लाह नगर थाना क्षेत्र निवासी अमित से तय हुई थी। परिवारों के बीच बातचीत और सहमति बनने के बाद युवती भविष्य को लेकर आश्वस्त थी।

बताया जाता है कि इसके बाद युवक रोजगार के लिए मुंबई चला गया। समय बीतता गया, लेकिन शादी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। युवती का आरोप है कि युवक ने संपर्क करना भी कम कर दिया और बाद में फोन उठाना बंद कर दिया। इस स्थिति ने उसे मानसिक रूप से परेशान कर दिया। उसने पहले पुलिस से भी शिकायत की थी और दोनों पक्षों को बातचीत के लिए थाने बुलाया गया था, लेकिन उससे पहले ही युवती ने टावर पर चढ़कर विरोध दर्ज कराया।

सामाजिक दबाव और असमंजस की स्थिति

ग्रामीण समाज में जब किसी युवती की शादी की बात परिवारों की सहमति से तय हो जाती है, तो वह केवल एक व्यक्तिगत संबंध नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और भविष्य की योजनाओं से भी जुड़ जाता है। ऐसे में यदि किसी कारणवश रिश्ता अधर में लटक जाए या एक पक्ष संपर्क से दूर हो जाए, तो सबसे अधिक मानसिक और सामाजिक दबाव अक्सर युवती को ही झेलना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवादहीनता और अनिश्चितता तनाव को और बढ़ा देती है। यदि किसी कारणवश विवाह संभव न हो, तो दोनों पक्षों को स्पष्ट बातचीत और कानूनी-सामाजिक प्रक्रिया के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष को मानसिक पीड़ा या सामाजिक असहजता का सामना न करना पड़े।

पुलिस कर रही है मामले की पड़ताल

घटना की सूचना मिलने पर हथियागढ़ चौकी प्रभारी शिवकुमार यादव महिला पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और काफी प्रयास के बाद युवती को सुरक्षित नीचे उतार लिया। छपिया थानाध्यक्ष प्रबोध कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों से बातचीत की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

गोंडा की यह घटना केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों का उदाहरण भी है, जहां अधूरी उम्मीदें, सामाजिक दबाव और संवाद की कमी किसी व्यक्ति को चरम कदम उठाने के लिए मजबूर कर सकती हैं। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता, समय पर संवाद और कानूनी सहायता ही समाधान का सबसे बेहतर रास्ता माना जाता है।

Shashi kant gautam

Shashi kant gautam

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Experienced Hindi Journalist with 6 Years of Experience

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