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Gonda News: सीएचसी में ओपीडी के दौरान डॉक्टर के सोने का वीडियो वायरल, मचा हड़कंप
Gonda News : गोंडा सीएचसी कर्नलगंज में ओपीडी के दौरान डॉक्टर के सोने का वीडियो वायरल, स्वास्थ्य सेवाओं पर उठे सवाल
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Gonda News:जिले की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्नलगंज की बदहाल व्यवस्था का एक और शर्मनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में ओपीडी के दौरान एक डॉक्टर मेज पर सिर रखकर सोते नजर आ रहे हैं, जबकि बाहर मरीज इलाज के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। वीडियो में सोते हुए डॉक्टर की पहचान डॉ. इमरान मोइन के रूप में की जा रही है।
वीडियो सामने आते ही सीएचसी अधीक्षक अनुज कुमार की निरंकुश कार्यशैली और स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
CMO का आदेश भी बेअसर
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2 जून 2026 को भी सीएचसी में चिकित्सकों की कुर्सियां देर तक खाली रहने और अनुपस्थिति का मामला सामने आया था। इस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 3 जून को औचक निरीक्षण कर चैंबर, ओपीडी, एक्स-रे कक्ष और उपस्थिति पंजिका की जांच की थी। कई डॉक्टर बिना अवकाश अनुपस्थित पाए गए थे और अधीक्षक को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए थे।
22 जुलाई को भी सीएमओ ने लेबर रूम, इमरजेंसी और ओपीडी का निरीक्षण कर सख्त निर्देश दिए थे। लेकिन इसके बाद भी स्थिति जस की तस है। सुबह 8 बजे शुरू होने वाली ओपीडी में 9:15 बजे तक कई डॉक्टर नदारद रहते हैं और मरीज लौटने को मजबूर हैं।
भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीएचसी अब रेफरल यूनिट बन गई है। ड्यूटी के समय डॉक्टर नदारद रहते हैं और अपने सरकारी आवास पर फीस लेकर मरीज देखते हैं। इमरजेंसी में भी स्टाफ नहीं मिलता।
पहले भी यहां कई विवाद सामने आ चुके हैं। 7 जून को एक महिला मरीज से फार्मासिस्ट अशोक वर्मा पर छेड़खानी का आरोप लगा था। अस्पताल परिसर में दवाओं को जलाने, मरीजों को एक्स-रे शीट न देकर फोटो खिंचवाने जैसे वीडियो भी वायरल हुए थे।
अधीक्षक की कार्यशैली पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि अधीक्षक की मनमानी और दलालों का बोलबाला चरम पर है। शासन और जिला प्रशासन का भी जिम्मेदारों में कोई डर नहीं है।इस पूरे प्रकरण पर स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी की अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
लोगों का सवाल: सुधार कब?
इस घटना के बाद लोगों का सवाल है कि क्या यही है "योगी सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सेवा"? निरीक्षण के बाद भी सुधार क्यों नहीं हो रहा? आखिर अधीक्षक और लापरवाह चिकित्सकों पर कार्रवाई कब होगी?


