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Gonda News: जेल में भोजन घोटाले के आरोप, रिहा बंदियों बोले- 20 रुपये में बिक रही सब्जी
Gonda News: रिहा बंदियों ने गोण्डा मण्डल कारागार में खराब भोजन, सब्जी बेचने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, जेल प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार।
Gonda District Jail News
Gonda News: उत्तर प्रदेश के गोण्डा मण्डल कारागार की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जेल से रिहा हुए कुछ बंदियों ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कारागार के भीतर भोजन व्यवस्था में अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के गंभीर आरोप लगाए हैं। बंदियों का दावा है कि जेल में निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा, जबकि पैसे लेकर अतिरिक्त सब्जी बेचने का भी खेल चल रहा है।
मीनू के अनुसार नहीं मिल रहा भोजन
रिहा बंदियों के अनुसार जेल में मिलने वाला भोजन निर्धारित मानकों से काफी अलग है। उनका कहना है कि सब्जी के नाम पर अक्सर केवल कटहल की रसेदार सब्जी दी जाती है, जिसका स्वाद मीठा होता है। साग में सिर्फ एक-दो टुकड़े आलू मिलते हैं, जबकि दाल बेहद पतली और पानी जैसी होती है। रोटियां भी आधी कच्ची और आधी पकी परोसी जाती हैं।
बंदियों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले नाश्ते में मिलने वाला चना और गुड़ बंद कर दिया गया है। अब उसकी जगह पानी जैसी पतली दलिया और चाय दी जाती है, जिसे अधिकांश बंदी पीना भी पसंद नहीं करते।
20 रुपये में एक चम्मच सब्जी बेचने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जेल परिसर के भीतर बड़े भगोने में सब्जी लाकर 15 से 20 रुपये में एक चम्मच सब्जी बेची जाती है। बंदियों का कहना है कि जिनके पास पैसे होते हैं, वही अतिरिक्त भोजन खरीदकर खा पाते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों को भूखे पेट रहना पड़ता है।
निरीक्षण के दिन ही सुधर जाती है व्यवस्था
रिहा बंदियों का दावा है कि जब जिला प्रशासन या अन्य अधिकारी निरीक्षण के लिए जेल पहुंचते हैं, तभी भोजन और अन्य व्यवस्थाएं अचानक बेहतर हो जाती हैं। उनका आरोप है कि डर के कारण कोई भी बंदी अधिकारियों के सामने वास्तविक स्थिति बताने की हिम्मत नहीं करता।
पारदर्शिता बढ़ाने की मांग
बंदियों ने जेल प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि जेल प्रशासन को एक सोशल मीडिया ग्रुप बनाना चाहिए, जिसमें जिलाधिकारी (DM), जिला जज और पुलिस अधीक्षक (SP) को भी जोड़ा जाए। साथ ही प्रत्येक बैरक में वितरित किए जाने वाले भोजन की तस्वीरें प्रतिदिन अपलोड की जाएं। उन्होंने यह भी मांग की कि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को केवल बंदियों से पूछताछ करने के बजाय सीसीटीवी फुटेज की भी जांच करनी चाहिए।
जेल प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार
इन आरोपों पर जेलर आफताब अंसारी ने सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि मण्डल कारागार में निर्धारित मीनू के अनुसार ही भोजन तैयार कराया जाता है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं और जेल अधीक्षक नियमित रूप से भोजन की गुणवत्ता की जांच करते हैं। उनके अनुसार जेल से रिहा हुए बंदियों द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत और निराधार हैं।
जांच की उठी मांग
रिहा बंदियों के आरोपों और जेल प्रशासन के इनकार के बीच अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। यदि भोजन व्यवस्था पूरी तरह निर्धारित मानकों के अनुसार है, तो जेल के भीतर 20 रुपये में सब्जी बेचने जैसे आरोप क्यों सामने आ रहे हैं? इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होने पर ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।


