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Gonda Bank Scam: इंडियन बैंक इम्प्लाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी में करोड़ों का खेल, 69 पर FIR
Gonda Bank Scam: गोंडा में इंडियन बैंक इम्प्लाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी में 3.60 करोड़ रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर 69 पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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Gonda Bank Scam: उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद में इंडियन बैंक इम्प्लाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है। मामले में कोर्ट के आदेश पर 69 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा सोसाइटी के सचिव रविन्द्र श्रीवास्तव की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर कोतवाली नगर में दर्ज किया गया है।
दर्ज मुकदमे में तत्कालीन सचिव, वरिष्ठ प्रबंधक, प्रबंधक, हेड कैशियर, प्रधान रोकड़िया समेत कुल 69 पदाधिकारियों और कर्मचारियों को नामजद किया गया है। आरोप है कि लंबे समय तक सोसाइटी में वित्तीय अनियमितताएं कर बड़ी रकम का गबन किया गया।
फर्जी लोन और दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप
मुकदमे में लगाए गए आरोपों के अनुसार वर्ष 1997 से 2020 तक इलाहाबाद बैंक, जो अब इंडियन बैंक के नाम से जाना जाता है, की प्रधान शाखा गोंडा में तैनात कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से फर्जी लोन वितरण किया और दस्तावेजों में हेराफेरी की।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन अनियमितताओं के कारण मूल रूप से 3 करोड़ 60 लाख 16 हजार रुपये का गबन हुआ। बताया गया है कि यदि इस राशि पर ब्याज को भी जोड़ दिया जाए तो यह रकम बढ़कर 4 करोड़ 90 लाख 8 हजार 373 रुपये से अधिक हो जाती है।
रकम लौटाने का हुआ था अनुबंध
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब गबन का मामला सामने आया तो आरोपियों से रकम वापस कराने के लिए लिखित अनुबंध कराया गया था। हालांकि बाद में आरोपियों ने अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया और कोई धनराशि वापस नहीं की गई।
सोसाइटी सचिव रविन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार मामले में कार्रवाई के लिए दो बार आईजीआरएस और अन्य उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्याय पाने के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय के आदेश के बाद कोतवाली नगर पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस ने शुरू की जांच
कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिकायतकर्ता ने उठाए जांच प्रक्रिया पर सवाल
प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि रोडवेज चौकी प्रभारी ने पहले की गई शिकायत की जांच रिपोर्ट में धन गबन के अपराध को स्वीकार किया था। इसके बावजूद यह कहा गया कि तत्कालीन सचिव राजीव कुमार के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की जांच एलडीएम गोंडा स्तर पर चल रही है।
इसी आधार पर पहले मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने चार बार पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री से भी शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिसके बाद मुकदमा दर्ज हो सका।
पहले भी सामने आ चुके हैं बड़े घोटाले
गोंडा में सहकारी बैंकों से जुड़े वित्तीय घोटालों की यह पहली घटना नहीं है। हाल ही में यूपी कोऑपरेटिव बैंक की एक शाखा में 21 करोड़ 47 लाख 78 हजार रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था। अब इंडियन बैंक इम्प्लाइज क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी में सामने आए इस कथित गबन ने एक बार फिर वित्तीय संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल कोर्ट के आदेश पर दर्ज मुकदमे के बाद मामले की जांच जारी है और सभी की निगाहें आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


