Gonda News: गोंडा में सरकारी जमीन पर पुराने कब्जे की जांच तेज, तीन दशक पुराना मामला फिर सुर्खियों मे

Gonda News: आयुक्त के निर्देश पर गोंडा समेत चार जिलों में सरकारी जमीनों की जांच तेज हुई है। जेल रोड स्थित करीब 30 साल पुराने विद्यालय प्रकरण पर भी कार्रवाई की तैयारी है अब।

Radheshyam Mishra
Published on: 8 Aug 2026 10:07 PM IST
Investigation of old encroachment on government land intensifies in Gonda
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गोंडा में सरकारी जमीन पर पुराने कब्जे की जांच तेज, तीन दशक पुराना मामला फिर सुर्खियों में (Photo- Newstrack)

Gonda News: मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल द्वारा सरकारी जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटवाए जाने को लेकर दिए गए सख्त निर्देश के बाद चारों जिलों में जांच तेज हो गई है। इस क्रम में मंडल मुख्यालय पर जेल रोड पर स्थित एक सरकारी जमीन का मामला फिर चर्चा में है।

आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने जिलों में जिला विद्यालय निरीक्षकों एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से अनधिकृत विद्यालयों की जांच करा लें। यदि कोई विद्यालय सरकारी भूमि पर संचालित पाया जाता है या नियमों के विपरीत मान्यता प्राप्त की गई है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

आयुक्त के निर्देश के बाद मंडल मुख्यालय पर नगर पालिका परिषद की सार्वजनिक भूमि पर करीब 30 वर्षों पूर्व अनधिकृत कब्जा करके बनाए गए विद्यालय का प्रकरण एक बार फिर चर्चा में है।

ये है पूरा मामला

जानकार बताते हैं कि इस भूमि को लेकर वर्ष 1997 में विद्यालय प्रबंधन ने सिविल न्यायालय में वाद योजित करके 2008 में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत से स्थगनादेश (स्टे) प्राप्त कर लिया था। यह मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है और प्रभावी पैरवी के अभाव में अभी स्टे समाप्त नहीं हुआ है। आरोप है कि विद्यालय ने विभाग से मान्यता भी प्राप्त कर ली है।

आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ग्राम सभा एवं नगर निकायों की सरकारी भूमि से जुड़े न्यायालयों में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी कराई जाए, ताकि अनावश्यक स्थगनादेश समाप्त कराकर मामलों का शीघ्र निस्तारण कराया जा सके।

उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा पहले से ही ग्राम सभा एवं नगर निकायों की सार्वजनिक भूमि का चिन्हांकन कर उन्हें अवैध कब्जों से मुक्त कराने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। मंडलायुक्त द्वारा लंबे समय से लंबित ऐसे मामलों को अब प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित कराने पर जोर दिया जा रहा है।

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