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Gorakhpur News: चाय पर मिले विनोद तावड़े-संजय निषाद, आरक्षण से मुकदमों तक हुई अहम चर्चा
Gorakhpur News: गोरखपुर में विनोद तावड़े और संजय निषाद की चाय पर मुलाकात में NDA समन्वय, निषाद आरक्षण, मझवार-तुरहा और मुकदमों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
Gorakhpur News (Image Credit-Newstrack)
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने गोरखपुर में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद से मुलाकात की। शुक्रवार देर शाम हुई इस मुलाकात में NDA के सहयोगी दलों के बीच समन्वय के साथ-साथ निषाद समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात करीब एक घंटे चली।
तावड़े डॉ. संजय निषाद के पादरी बाजार स्थित आवास पहुंचे थे। संजय निषाद ने उन्हें चाय पर आमंत्रित किया था। तावड़े के पहुंचने पर उनका पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया। इस दौरान संजय निषाद के पुत्र एवं पूर्व सांसद प्रवीण निषाद, विधायक सरवन निषाद समेत परिवार के सदस्य और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
सहयोगी दलों के समन्वय पर हुई बातचीत
मुलाकात का एक प्रमुख विषय भाजपा और निषाद पार्टी के बीच राजनीतिक एवं संगठनात्मक समन्वय रहा। तावड़े इन दिनों गोरखपुर क्षेत्र के दौरे पर हैं और पार्टी संगठन, जनप्रतिनिधियों तथा जमीनी स्तर की चुनावी तैयारियों का फीडबैक ले रहे हैं। गोरखपुर क्षेत्र में उन्होंने सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठन और बूथ स्तर की तैयारियों की समीक्षा भी की।
ऐसे में सहयोगी दल के प्रमुख नेता से सीधे मुलाकात को 2027 की तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण संगठनात्मक संवाद के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि इस मुलाकात में सीटों या चुनावी समझौते को लेकर कोई विशिष्ट निर्णय सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
आरक्षण का मुद्दा भी बातचीत में रहा
संजय निषाद ने मुलाकात के दौरान निषाद समाज से जुड़े आरक्षण और जातीय पहचान से संबंधित मुद्दों को भी उठाया। विशेष रूप से मझवार और तुरहा/तुरैहा समुदाय की परिभाषा और उनसे जुड़े प्रमाणपत्र के विषय को लेकर लंबे समय से मांगें सामने आती रही हैं।
यह मुद्दा निषाद पार्टी की राजनीति का पुराना प्रमुख विषय रहा है। पार्टी लंबे समय से निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद, धीवर, कहार, तुरहा समेत कई अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल समुदायों के साथ उनके संबंध और प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों को लेकर आवाज उठाती रही है।
हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि अनुसूचित जाति की संवैधानिक सूची में बदलाव का अधिकार केवल संसद के माध्यम से निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होता है। इसलिए राज्य स्तर पर इस विषय से जुड़े शासनादेश, प्रमाणपत्र और प्रशासनिक व्याख्या अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं।
मझवार और तुरहा को परिभाषित करने की मांग
निषाद समाज की ओर से लंबे समय से यह मांग उठाई जाती रही है कि मझवार और तुरहा/तुरैहा जैसी जातीय पहचान से जुड़े नामों और उनके पर्यायवाची समुदायों को लेकर स्पष्टता हो, ताकि पात्र लोगों को जाति प्रमाणपत्र और संबंधित संवैधानिक लाभ प्राप्त करने में दिक्कत न आए।
2017-19 के दौरान भी इस मुद्दे को लेकर निषाद पार्टी ने आंदोलन किए थे। 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 17 अतिपिछड़ी जातियों से संबंधित प्रमाणपत्रों के मुद्दे पर शासनादेश जारी होने की बात पार्टी की ओर से लगातार कही जाती रही है।
यही वजह है कि तावड़े और संजय निषाद की बातचीत में यह विषय केवल सामाजिक मुद्दा नहीं बल्कि कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक—तीनों स्तरों से जुड़ा विषय बनकर सामने आया।
आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों का मुद्दा
बैठक में एक और महत्वपूर्ण विषय निषाद समाज के आंदोलनों के दौरान कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों का रहा।
डॉ. संजय निषाद ने तावड़े के सामने रेलवे से जुड़े आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग रखी। उनके अनुसार आंदोलन से जुड़े दो मुकदमों में से एक पुलिस स्तर पर वापस हो चुका है, जबकि दूसरा अभी लंबित है।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निषाद पार्टी के आंदोलनात्मक इतिहास में रेलवे ट्रैक और आरक्षण से जुड़े आंदोलन प्रमुख रहे हैं। पार्टी की ओर से 2015 के कसरवल रेल ट्रैक आंदोलन समेत कई पुराने आंदोलनों को आरक्षण की मांग से जोड़ा जाता रहा है।
अब इन पुराने मुकदमों को वापस लेने का विषय सहयोगी दल के शीर्ष नेतृत्व के सामने उठाया गया है।
तावड़े के दौरे के बीच हुई मुलाकात
विनोद तावड़े का गोरखपुर दौरा भी 2027 चुनाव की तैयारियों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने गोरखपुर क्षेत्र में संगठन के पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया। तावड़े ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर सक्रिय रहने और जनता से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया।
गोरखपुर क्षेत्र में पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों से जुड़े सामाजिक समीकरण भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषणों में निषाद, कुर्मी, सैंथवार और राजभर जैसे समुदायों के बीच राजनीतिक प्रभाव और प्रतिनिधित्व को लेकर प्रतिस्पर्धा का उल्लेख किया गया है।
मुलाकात का राजनीतिक संदेश क्या?
तावड़े और संजय निषाद की मुलाकात को तीन स्तरों पर देखा जा सकता है—NDA समन्वय, निषाद समाज से जुड़े लंबित मुद्दे और 2027 की संगठनात्मक तैयारी।
एक तरफ भाजपा प्रदेश प्रभारी लगातार संगठन के नेताओं और जनप्रतिनिधियों से फीडबैक ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं के साथ सीधे संवाद भी कर रहे हैं। ऐसे में संजय निषाद के साथ चाय पर हुई यह बैठक भाजपा और निषाद पार्टी के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
फिलहाल इस मुलाकात से किसी नए राजनीतिक समझौते या सीट बंटवारे की घोषणा सामने नहीं आई है। लेकिन आरक्षण, मझवार-तुरहा की परिभाषा और कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों जैसे मुद्दों को सीधे भाजपा के प्रदेश प्रभारी के सामने रखना यह बताता है कि सहयोगी दल अपनी सामाजिक और राजनीतिक मांगों को 2027 की तैयारियों के बीच प्रभावी तरीके से उठाना चाहते हैं।


