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हापुड़: 45 साल से रामलीला कलाकारों की सेवा कर रहीं 95 वर्षीय कांती अम्मा
Hapur News: हापुड़ के धौलाना में 95 वर्षीय कांती अम्मा पिछले 45 वर्षों से रामलीला के कलाकारों को अपने हाथों से पकौड़ी खिलाकर कर रही हैं प्रभु श्रीराम की भक्ति।
Hapur News :- भक्ति की कोई उम्र नहीं होती और न ही भगवान की आराधना केवल मंदिरों तक सीमित है। कभी सेवा ही पूजा बन जाती है, तो कभी किसी के चेहरे की मुस्कान में प्रभु के दर्शन होने लगते हैं। धौलाना की 95 वर्षीय कांती अम्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जो पिछले 45 वर्षों से रामलीला के कलाकारों को अपने हाथों से पकौड़ी खिलाकर प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट कर रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह और सेवा का जज्बा लोगों को भावुक करने के साथ ही भक्ति का सच्चा अर्थ समझा रहा है।
चार दशक से अधिक समय से निभा रहीं सेवा का संकल्प
धौलाना में हर वर्ष रामलीला का आयोजन होता है। जैसे ही रामलीला का मंचन शुरू होने का समय आता है, कांती अम्मा भी अपनी सेवा में जुट जाती हैं। रामलीला परिसर में पकौड़ी का स्टाल लगाकर वह कलाकारों के लिए अपने हाथों से नाश्ता तैयार करती हैं और उन्हें प्रेमपूर्वक पकौड़ी खिलाती हैं। पिछले 45 वर्षों से चली आ रही उनकी यह सेवा अब केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण की पहचान बन चुकी है।
रामलीला के कलाकारों के लिए कांती अम्मा का यह स्नेह किसी अपने के प्यार से कम नहीं है। उनके हाथों से बनी पकौड़ी में केवल स्वाद ही नहीं, बल्कि वर्षों की श्रद्धा, अपनापन और निस्वार्थ सेवा का भाव भी जुड़ा है। उनके लिए कलाकारों को भोजन कराना महज नाश्ता खिलाना नहीं, बल्कि रामकाज में अपना योगदान देना है।
95 साल की उम्र, लेकिन सेवा का जज्बा बरकरार
आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ लोगों की दिनचर्या सीमित हो जाती है, लेकिन कांती अम्मा के लिए रामलीला का समय आज भी विशेष महत्व रखता है। उनकी आस्था और समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह वर्षों से इस सेवा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाती आ रही हैं। उनके चेहरे पर संतोष और मन में प्रभु श्रीराम के प्रति विश्वास उनकी भक्ति की कहानी खुद बयां करता है।कांती अम्मा बताती हैं कि रामलीला के कलाकारों को अपने हाथों से पकौड़ी खिलाकर उन्हें असीम आनंद मिलता है। वह इस कार्य को भगवान श्रीराम की सेवा मानती हैं। उनके लिए यही पूजा है और यही प्रभु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का सबसे सहज माध्यम।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनीं कांती अम्मा
युवा रामलीला मंच के संयोजक अभिषेक तोमर के अनुसार, कांती अम्मा वर्षों से रामलीला के कलाकारों की सेवा करती आ रही हैं। उनकी श्रद्धा, स्नेह और समर्पण रामलीला से जुड़े लोगों के लिए प्रेरणास्रोत है। 95 वर्ष की उम्र में भी उनकी सेवा भावना यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति के लिए बड़े-बड़े अनुष्ठानों से अधिक जरूरी निर्मल मन और निस्वार्थ भाव है।
पकौड़ी की खुशबू में घुली है 45 साल की आस्था
धौलाना की रामलीला में जहां मंच पर प्रभु श्रीराम की लीला का मंचन होता है, वहीं मंच के पीछे कांती अम्मा की सेवा भी श्रद्धा की एक अलग कहानी लिखती है। उनके हाथों से तैयार पकौड़ी कलाकारों के लिए नाश्ता भर नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है।
कांती अम्मा की यह अनूठी सेवा बताती है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ या धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं होती। किसी की सेवा करना, प्रेम बांटना और बिना किसी स्वार्थ के अपना योगदान देना भी प्रभु की आराधना का ही रूप है। धौलाना की यह 95 वर्षीय अम्मा सचमुच उन लोगों के लिए मिसाल हैं, जो मानते हैं कि भगवान तक पहुंचने का रास्ता सच्चे मन और सेवा भाव से होकर गुजरता है।


