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Hapur News: गढ़मुक्तेश्वर खादर में टली बाढ़ की आफत, घटा जलस्तर
Hapur News:गढ़मुक्तेश्वर के खादर में पांच दिन में गंगा का जलस्तर तेजी से घटा, जलभराव और चारे की परेशानी कम हुई, प्रशासन ने बाढ़ की संभावना से राहत जताई।
गढ़मुक्तेश्वर खादर में टली बाढ़ की आफत, घटा जलस्तर(Photo- Newstrack)
Hapur News: पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हुई बारिश के बाद गंगा नदी के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी ने गढ़मुक्तेश्वर के खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी थी। कई दिनों तक लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण गंगा का पानी गांवों की ओर बढ़ने लगा था और कई स्थानों पर लोगों के घरों की दहलीज तक पानी पहुंच गया था। खेतों में पानी भरने के साथ ही ग्रामीणों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो गया था।हालात ऐसे हो गए थे कि खादर क्षेत्र के ग्रामीणों को हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ की आशंका सताने लगी थी। ग्रामीण लगातार गंगा के जलस्तर पर नजर बनाए हुए थे। वहीं प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें भी स्थिति पर निगरानी रख रही थीं। हालांकि अब गंगा के जलस्तर में तेजी से गिरावट आने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
पांच दिन में तेजी से नीचे आया गंगा का जलस्तर
पिछले करीब पांच दिनों में गंगा के जलस्तर में तेजी से कमी आई है। पानी घटने के साथ ही खादर क्षेत्र के गांवों में पैदा हुई जलभराव की स्थिति भी धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। जिन रास्तों और खेतों में पानी भरा हुआ था, वहां भी अब पानी कम होने लगा है।जलस्तर घटने के बाद ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी भी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। लोग खेतों की ओर जाने लगे हैं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी पहले की अपेक्षा आसान होने लगी है।
घरों की दहलीज तक पहुंच गया था गंगा का पानी
गंगा का जलस्तर बढ़ने के दौरान खादर क्षेत्र के कई गांवों में स्थिति चिंताजनक हो गई थी। नदी का पानी गांवों के आसपास पहुंचने के साथ ही ग्रामीणों में बाढ़ का डर बढ़ गया था। कई परिवारों को अपने पशुओं और घरेलू सामान को सुरक्षित स्थानों पर रखने की चिंता सताने लगी थी।गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण खेतों में भी पानी भर गया था। इससे किसानों की परेशानी बढ़ गई थी। वहीं ग्रामीणों के आवागमन पर भी असर पड़ा था।
नक्का कुआं रोड पर हुआ भारी जलभराव
गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर गढ़मुक्तेश्वर नगर क्षेत्र में भी देखने को मिला था। नक्का कुआं रोड पर भारी जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क पर पानी जमा होने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को काफी दिक्कत हुई।वहीं खादर क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी जलभराव और खराब रास्तों के कारण स्कूल आने-जाने में परेशानी उठानी पड़ी थी। अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी।
चारे के संकट ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी
बाढ़ जैसे हालात के बीच सबसे बड़ी समस्या पशुपालकों के सामने खड़ी हुई। खेतों और आसपास के क्षेत्रों में पानी भरने के कारण हरा चारा उपलब्ध कराने में परेशानी होने लगी थी। ग्रामीणों को अपने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था दूर-दराज के क्षेत्रों से करनी पड़ रही थी।
अब गंगा का जलस्तर कम होने के बाद खेतों और संपर्क मार्गों से पानी निकलने लगा है। इससे पशुपालकों और किसानों को भी राहत मिली है।
हर साल बढ़ता है गंगा का जलस्तर
गढ़मुक्तेश्वर का खादर क्षेत्र हर साल गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश होने के बाद गंगा में पानी बढ़ने से खादर क्षेत्र के गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों की निगाहें लगातार गंगा के जलस्तर पर बनी रहती हैं।इस बार भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंचने के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अब पानी तेजी से घटने के कारण स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
प्रशासन ने ली राहत की सांस
गंगा का जलस्तर कम होने के बाद प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। अधिकारियों द्वारा लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों को भी नदी के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।एसडीएम श्रीराम सिंह ने बताया कि गंगा का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है। वर्तमान स्थिति सामान्य है और अब बाढ़ आने की कोई संभावना नहीं है। प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है।
पानी घटा तो लौटने लगी गांवों की रौनक
गंगा का पानी कम होते ही खादर क्षेत्र के ग्रामीणों के चेहरे पर भी राहत नजर आने लगी है। पिछले कई दिनों से बाढ़ की आशंका के कारण जहां लोग परेशान थे, वहीं अब सामान्य गतिविधियां शुरू होने लगी हैं। खेतों से पानी कम होने के बाद किसान अपनी फसलों की स्थिति देखने पहुंच रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि गंगा का जलस्तर इसी तरह कम होता रहा तो जल्द ही स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि बाढ़ का खतरा टलता नजर आ रहा है और खादर क्षेत्र में जिंदगी धीरे-धीरे फिर से अपनी रफ्तार पकड़ रही है।


