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Hapur News: गढ़ गंगा ने फिर दिखाया रौद्र रूप, चेतावनी निशान से ऊपर पहुंचा जलस्तर; मचा हड़कंप
Hapur News: गढ़मुक्तेश्वर-ब्रजघाट में बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का जलस्तर चेतावनी निशान से ऊपर पहुंच गया। खादर के कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ने के साथ खेत जलमग्न हो गए हैं।
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Hapur News: जनपद हापुड़ के गढ़मुक्तेश्वर-ब्रजघाट और खादर क्षेत्र में गंगा ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद गंगा के जलस्तर में दोबारा तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जलस्तर 198.40 मीटर के करीब पहुंच गया है और चेतावनी निशान से ऊपर बहने के कारण खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास भी दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर पानी घरों के आसपास तक पहुंचने की स्थिति में है। बाढ़ की आशंका के चलते खादर क्षेत्र में रहने वाले लोगों के सामने एक बार फिर सुरक्षित आवागमन, पशुओं के चारे और रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर परेशानी खड़ी हो गई है।
बिजनौर बैराज से छोड़ा गया पानी बना वजह
बताया जा रहा है कि बिजनौर बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हुई है। पानी बढ़ने के साथ ही गढ़ ब्रजघाट और आसपास के खादर क्षेत्रों में निचले इलाकों पर दबाव बढ़ गया है। नदी के किनारे बसे ग्रामीण इलाकों में प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।जलस्तर में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर गंगा के आसपास स्थित निचले क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले आई बाढ़ से वे अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि गंगा के दोबारा बढ़ते जलस्तर ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
गंगा के बढ़ते पानी से खादर क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई गांवों के संपर्क मार्गों पर भी पानी का असर पड़ा है। रास्ते प्रभावित होने के कारण ग्रामीणों को मुख्य मार्गों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।कुछ स्थानों पर पानी खेतों तक पहुंचने के बाद फसलों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। किसानों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि बाढ़ का पानी खेतों में जमा होने से तैयार फसलें प्रभावित हो रही हैं। लगातार बाढ़ की स्थिति बनी रहने पर नुकसान और बढ़ने की आशंका है।
फसलों को भारी नुकसान, किसानों की बढ़ी चिंता
खादर क्षेत्र में खेती ग्रामीणों की आय का प्रमुख साधन है। ऐसे में खेतों में पानी भरने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण पहले ही फसलों को नुकसान हो चुका है और अब दोबारा जलस्तर बढ़ने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।किसानों को फसल के साथ-साथ पशुओं के लिए चारे की चिंता भी सताने लगी है। कई स्थानों पर जलभराव के कारण खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
घरों के आसपास पहुंचा पानी, ग्रामीणों में दहशत
गंगा का पानी कई स्थानों पर घरों के आसपास तक पहुंचने लगा है। इससे ग्रामीण परिवारों में दहशत का माहौल है। लोग अपने जरूरी सामान और पशुओं को लेकर चिंतित हैं। निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीण लगातार नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सबसे बड़ी समस्या आवागमन की होती है। गांवों से बाहर निकलने वाले रास्तों पर पानी आने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को आने-जाने में विशेष परेशानी का सामना करना पड़ता है।


