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Hapur News: सोने की महंगाई से बढ़ा बंधेल और गोल्ड प्लेटिंग का कारोबार, बना रोजगार का जरिया
Hapur News: सोने जैसे चमकदार और किफायती जेवरों की मांग बढ़ी, महाराष्ट्र के कारीगरों ने हुनर से कारोबार को दी नई पहचान, घरों तक पहुंचा रोजगार का यह काम।
सोने की महंगाई से बढ़ा बंधेल और गोल्ड प्लेटिंग का कारोबार, बना रोजगार का जरिया (Photo- Newstrack)
Hapur News: सोने की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के लिए सोने के आभूषण खरीदना मुश्किल कर दिया है। शादी-विवाह, त्योहारों और दूसरे मांगलिक अवसरों पर गहने पहनने का शौक रखने वाले लोग अब अपनी जेब के हिसाब से नए विकल्प तलाश रहे हैं। इसी बदलते बाजार में हापुड़ के बंधेल और गोल्ड प्लेटिंग वाले आभूषणों का कारोबार तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। आकर्षक डिजाइन, चमक-दमक और सोने जैसे लुक के कारण इन आभूषणों की मांग बढ़ रही है। खास बात यह है कि असली सोने के मुकाबले इनकी कीमत काफी कम होती है, जिससे सीमित बजट वाले ग्राहक भी अपनी पसंद के गहने खरीद पा रहे हैं।
हापुड़ की सराफा मंडी में बंधेल आभूषणों का कारोबार कोई नया नहीं है, लेकिन सोने की कीमतों में तेजी ने इस बाजार को नई संभावनाएं दी हैं। यहां तैयार होने वाले आभूषण अपनी बारीक कारीगरी, आकर्षक बनावट और पारंपरिक डिजाइन के लिए जाने जाते हैं। महाराष्ट्र से आए कुशल कारीगरों ने अपने हुनर और अनुभव से इस कारोबार को विशेष पहचान दिलाई है। अब यह काम केवल सराफा दुकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शहर की गलियों और घरों तक पहुंचकर कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है।
सोने जैसे दिखते हैं बंधेल के आभूषण, कीमत में काफी सस्ते
बंधेल आभूषणों की सबसे बड़ी खासियत इनकी बनावट और कीमत है। इनकी बाहरी चमक और डिजाइन सामान्य सोने के आभूषणों जैसी दिखाई देती है। हालांकि, इनकी संरचना असली सोने के जेवरों से अलग होती है। बंधेल आभूषणों में सोने के साथ अन्य धातुओं का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है। इसी अनुपात के आधार पर इनकी गुणवत्ता, वजन और कीमत निर्धारित होती है।
बाजार में कुछ बंधेल आभूषणों में सोने की मात्रा 30 से 40 प्रतिशत तक बताई जाती है, जबकि शेष हिस्से में अन्य धातुओं का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इनकी कीमत सामान्य सोने के जेवरों की तुलना में कम रहती है। ग्राहक अपनी आर्थिक स्थिति और पसंद के अनुसार अलग-अलग डिजाइन और वजन के आभूषण खरीद सकते हैं।
शादी-विवाह और पारिवारिक आयोजनों में भारी-भरकम आभूषण पहनने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए भी यह एक किफायती विकल्प बनकर उभरा है। हालांकि, इनकी खरीदारी करते समय सोने की वास्तविक मात्रा और धातुओं के अनुपात की जानकारी लेना बेहद जरूरी है।
बंधेल और गोल्ड प्लेटिंग में होता है बड़ा अंतर
सराफा बाजार में बंधेल और गोल्ड प्लेटिंग वाले आभूषणों को लेकर कई बार ग्राहक भ्रमित हो जाते हैं। देखने में दोनों तरह के जेवर लगभग एक जैसे चमकदार दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इनकी निर्माण प्रक्रिया अलग होती है।
बंधेल आभूषणों में सोने और दूसरी धातुओं का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है, जबकि गोल्ड प्लेटिंग वाले आभूषणों में किसी अन्य धातु के ऊपर सोने की बहुत पतली परत चढ़ाई जाती है। प्लेटिंग की मोटाई और गुणवत्ता के आधार पर इनकी चमक और टिकाऊपन अलग-अलग हो सकता है।
इसलिए ग्राहकों को केवल आभूषण की चमक या डिजाइन देखकर उसकी कीमत का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। खरीदारी के दौरान यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जेवर बंधेल है, गोल्ड प्लेटेड है या वास्तविक सोने का बना हुआ है। दुकानदार से आभूषण में इस्तेमाल धातुओं और सोने की मात्रा का लिखित विवरण लेना भी जरूरी है।
महाराष्ट्र के कारीगरों ने हापुड़ को दिलाई अलग पहचान
हापुड़ में बंधेल आभूषणों के कारोबार की खास पहचान यहां की कारीगरी है। महाराष्ट्र से आए कारीगरों ने अपने पारंपरिक हुनर और तकनीक के दम पर इस काम को आगे बढ़ाया है। इन कारीगरों की मेहनत से साधारण धातुओं को आकर्षक आभूषणों का रूप दिया जाता है।
आभूषण तैयार करने की प्रक्रिया में डिजाइन बनाने से लेकर ढलाई, घिसाई, जोड़ाई और फिनिशिंग तक कई चरण शामिल होते हैं। हर चरण में बारीकी और अनुभव की जरूरत होती है। यही वजह है कि कुशल कारीगरों की भूमिका इस कारोबार में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
समय के साथ इस काम का दायरा भी बढ़ा है। अब कई छोटे कारोबारी और कारीगर घरों में ही आभूषण तैयार करने का काम कर रहे हैं। तैयार माल सराफा दुकानों और दूसरे व्यापारियों तक पहुंचाया जाता है। इससे शहर में छोटे स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।
दुकानों से निकलकर घरों तक पहुंचा कारोबार, बना कुटीर उद्योग
बंधेल आभूषणों का कारोबार अब पारंपरिक सराफा दुकानों की चारदीवारी से बाहर निकल चुका है। शहर के कई इलाकों में छोटे स्तर पर आभूषण तैयार करने का काम किया जा रहा है। घरों और छोटी कार्यशालाओं में कारीगर अपनी क्षमता के अनुसार उत्पादन करते हैं। इससे कम पूंजी में रोजगार और कारोबार शुरू करने की संभावनाएं भी बनी हैं।
इस कारोबार से केवल आभूषण तैयार करने वाले कारीगर ही नहीं, बल्कि डिजाइनिंग, फिनिशिंग, थोक आपूर्ति और बिक्री से जुड़े लोग भी लाभान्वित हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर विकसित हो रहा यह काम हापुड़ के सराफा व्यापार को एक नया आयाम दे रहा है।
सोने की महंगाई के बीच कम कीमत में आकर्षक आभूषण उपलब्ध कराने वाला यह कारोबार आने वाले समय में और विस्तार हासिल कर सकता है।
हॉलमार्क देखकर न करें जल्दबाजी, शुद्धता की जांच है जरूरी
बंधेल और प्लेटिंग वाले आभूषणों के बाजार में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उनकी वास्तविक शुद्धता और पहचान का है। ग्राहकों को खरीदारी के समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी आभूषण पर 22 कैरेट या 916 लिखा देखकर उसे स्वतः असली सोना मान लेना सही नहीं है।
बीआईएस हॉलमार्क और छह अंकों वाले एचयूआईडी कोड की प्रामाणिकता जांचना जरूरी है। इसके लिए बीआईएस के आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, हॉलमार्क का उद्देश्य सोने की शुद्धता और निर्धारित मानकों की पुष्टि करना है। इससे यह अपने आप स्पष्ट नहीं होता कि कोई आभूषण बंधेल है या प्लेटिंग वाला।
ग्राहकों को यह भी समझना चाहिए कि केवल दूसरी धातु के ऊपर सोने की परत चढ़ाकर तैयार किए गए आभूषण को वास्तविक सोने का जेवर बताकर बेचना भ्रामक हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले आभूषण की वास्तविक संरचना, सोने की मात्रा, कैरेट, वजन और कीमत की जानकारी जरूर लें।
बिल में दर्ज कराएं पूरी जानकारी, तभी सुरक्षित रहेगी खरीदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, कम कीमत के आकर्षण में आकर बिना जानकारी के आभूषण खरीदना नुकसानदायक हो सकता है। ग्राहक को दुकानदार से यह स्पष्ट पूछना चाहिए कि आभूषण में कितना सोना इस्तेमाल हुआ है और उसमें कौन-कौन सी अन्य धातुएं शामिल हैं।
खरीदारी के समय पक्का बिल लेना चाहिए। बिल में आभूषण का प्रकार, वजन, सोने की मात्रा, धातुओं का विवरण और कुल कीमत स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। इससे भविष्य में आभूषण की गुणवत्ता या कीमत को लेकर विवाद होने की स्थिति में ग्राहक के पास खरीदारी का प्रमाण रहेगा।
कुल मिलाकर, सोने की बढ़ती कीमतों ने हापुड़ के सराफा बाजार में बंधेल और प्लेटिंग आभूषणों के कारोबार को नई गति दी है। किफायती कीमत, आकर्षक डिजाइन और कारीगरों के हुनर ने इस बाजार को नई पहचान दी है। लेकिन चमक-दमक के बीच ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे आभूषण की असली पहचान समझकर ही खरीदारी करें।


