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Hapur News: ई-रजिस्ट्री के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, तहसील में कामकाज ठप
Hapur News: हापुड़ तहसील में ई-रजिस्ट्री और फ्रंट ऑफिस व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही, जिससे उप निबंधक कार्यालय और अन्य कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे और आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
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Hapur News: जनपद की तहसील में इन दिनों दो बड़े आंदोलनों के चलते कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। एक ओर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के पदाधिकारी मंगलवार से विभिन्न मांगों को लेकर तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ई-रजिस्ट्री और फ्रंट ऑफिस व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं एवं बैनामा लेखकों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। गुरुवार को भी हड़ताल जारी रहने के कारण तहसील में आने वाले सैकड़ों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।तहसील परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में गतिविधियां बेहद सीमित दिखाई दीं। अपने जरूरी कार्यों, जमीनों के बैनामे, दस्तावेज पंजीकरण और न्यायालय संबंधी मामलों को लेकर पहुंचे लोग घंटों इंतजार करने के बाद निराश होकर वापस लौटने को मजबूर हुए।
दूसरे दिन भी बंद रहा उप निबंधक कार्यालय का कामकाज
बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों ने उप निबंधक कार्यालय में प्रस्तावित फ्रंट ऑफिस व्यवस्था और ई-बैनामा प्रक्रिया के विरोध में अपना आंदोलन जारी रखा। हड़ताल के चलते दस्तावेजों के पंजीकरण का कार्य लगभग पूरी तरह प्रभावित रहा।अधिवक्ताओं ने न्यायालयों के साथ-साथ उप निबंधक कार्यालय में भी कार्य नहीं किया, जिससे जमीनों की खरीद-फरोख्त, रजिस्ट्री और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं ठप पड़ गईं। सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हुई जो दूरदराज के गांवों और कस्बों से अपने कार्यों के लिए तहसील पहुंचे थे।
बार एसोसिएशन ने सरकार के फैसले पर जताई कड़ी नाराजगी
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा लागू की जा रही ई-रजिस्ट्री और फ्रंट ऑफिस व्यवस्था अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं के हितों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा और जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।पदाधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद पारंपरिक रूप से इस कार्य से जुड़े हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा। उनका आरोप है कि सरकार तकनीकी व्यवस्था लागू कर स्थानीय स्तर पर वर्षों से रोजगार कर रहे लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
फोटोग्राफर, कंप्यूटर ऑपरेटर और स्टांप विक्रेताओं की भी बढ़ी चिंता
अधिवक्ताओं का कहना है कि ई-बैनामा प्रक्रिया लागू होने से केवल वकील और दस्तावेज लेखक ही प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि तहसील परिसर के बाहर वर्षों से काम कर रहे फोटोग्राफर, कंप्यूटर ऑपरेटर, फोटोकॉपी संचालक और स्टांप विक्रेता भी बेरोजगारी की मार झेलेंगे।उनका दावा है कि तहसील व्यवस्था से जुड़े इन छोटे कारोबारियों की आय का बड़ा हिस्सा बैनामा और दस्तावेजी कार्यों पर निर्भर है। यदि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाती है तो इन लोगों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
आमजन को भुगतनी पड़ रही दोहरी मार
तहसील में एक तरफ भाकियू टिकैत का धरना और दूसरी तरफ अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण आम नागरिकों को दोहरी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों, जमीन खरीदने-बेचने वालों, वादकारियों और अन्य सरकारी कार्यों के लिए आने वाले लोगों को लगातार दूसरे दिन भी मायूस होकर लौटना पड़ा।कई लोगों ने बताया कि वे जरूरी दस्तावेजों और रजिस्ट्री संबंधी कार्यों के लिए सुबह से तहसील पहुंचे थे, लेकिन हड़ताल के कारण उनका कोई काम नहीं हो सका। लोगों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
समाधान नहीं निकला तो बढ़ सकती है परेशानी
बार एसोसिएशन और बैनामा लेखकों का कहना है कि यदि सरकार और प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं तहसील में लगातार प्रभावित हो रहे कामकाज को देखते हुए आमजन की परेशानी भी बढ़ती जा रही है।अब सभी की निगाहें प्रशासन और बार एसोसिएशन के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में रजिस्ट्री, न्यायालयी और राजस्व संबंधी कार्यों पर इसका और व्यापक असर पड़ सकता है।


