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Hapur News: रिश्वत में गई नौकरी, फिर खंभे पर चढ़ा लाइनमैन; अफसरों तक पहुंचे फोटो
Hapur News: सेवा समाप्ति के दो साल बाद भी बिजली के काम में सक्रिय रविंद्र; खंभों पर चढ़कर काम करते फोटो पहुंचे अधिकारियों तक, बिजलीघर के जेई बोले-‘आप खुद समझदार हैं...’
Hapur Lineman Bribery Case
Hapur News :-ऊर्जा निगम में नौकरी गई, सेवा समाप्त हो गई, लेकिन बिजली के खंभों और लाइनों पर काम करने का सिलसिला नहीं थमा। पटना मुरादपुर बिजलीघर से जुड़ा यह मामला अब कई सवाल खड़े कर रहा है। करीब दो साल पहले पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में जांच के बाद सेवा से बर्खास्त किया गया लाइनमैन रविंद्र एक बार फिर बिजली के कार्यों में सक्रिय नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, खंभों पर चढ़कर बिजली से जुड़े कार्य करते हुए उसके फोटो भी सामने आने और जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचने की बात कही जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कर्मचारी की सेवा समाप्त हो चुकी है तो वह आखिर किसके आदेश पर बिजली के खंभों और लाइनों पर काम कर रहा है? यदि वह अधिकृत कर्मचारी नहीं है तो उसे बिजली जैसे जोखिम भरे कार्य करने की अनुमति किस स्तर से मिली? और यदि निगम को उसकी जरूरत पड़ रही है तो सेवा समाप्ति के बाद उसके काम करने की स्थिति क्या है? पांच हजार रुपये की रिश्वत के आरोप से शुरू हुआ था मामला
बताया जाता है कि करीब दो वर्ष पहले मोहल्ला चौराहा निवासी वसीम के घर के बाहर नगर पालिका की स्ट्रीट लाइट लगी थी। ऊर्जा निगम के पटना मुरादपुर बिजलीघर की टीम ने वहां जांच के दौरान बिजली चोरी का मामला बताया था। आरोप है कि इसी दौरान उपभोक्ता से पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई।
इस कथित बातचीत की ऑडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुई थी। मामला सामने आने के बाद ऊर्जा निगम स्तर से जांच कराई गई। जांच में रविंद्र को दोषी पाए जाने के बाद उसकी सेवा समाप्त कर दी गई थी।यानी जिस मामले में विभागीय कार्रवाई के बाद कर्मचारी की नौकरी चली गई, उसी कर्मचारी का दो साल बाद फिर बिजली के काम में दिखाई देना अब विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
बर्खास्त कर्मचारी के हाथ में फिर बिजली के खंभे?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि रविंद्र बिजली से जुड़े कार्यों में लगातार सक्रिय है। उसके द्वारा बिजली के खंभों पर चढ़कर काम किए जाने के फोटो भी जिम्मेदार अधिकारियों तक भेजे जाने की बात सामने आई है।मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बिजली के खंभों, लाइनों और विद्युत उपकरणों पर काम करने के लिए तकनीकी दक्षता के साथ अधिकृत व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होता है। ऐसे में यदि कोई सेवा समाप्त कर्मचारी विभागीय कर्मचारी नहीं होने के बावजूद इस तरह के कार्य करता है तो दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है।
हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
बिजली के तारों और खंभों पर काम करना बेहद जोखिम भरा होता है। मामूली लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में सेवा समाप्त कर्मचारी को बिजली के कार्य में लगाए जाने की स्थिति उपभोक्ताओं के साथ-साथ निगम के अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता पैदा करती है।अगर काम के दौरान हादसा हो जाए, किसी व्यक्ति को करंट लग जाए या बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचे तो जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होगी? यही सवाल इस पूरे प्रकरण को गंभीर बना रहा है।
जेई का बयान और बढ़ा रहा सवाल
मामले में पटना मुरादपुर बिजलीघर के अवर अभियंता बिजेंद्र से जब सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि बिजलीघर पर तैनात दूसरा लाइनमैन सड़क हादसे में घायल हो गया हैबिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसलिए काम कराने के लिए रविंद्र को बुलाया गया था।जेई का यह बयान अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। यदि रविंद्र की सेवा समाप्त हो चुकी है तो क्या उसे दोबारा विद्युत कार्य में लगाने के लिए कोई लिखित आदेश जारी हुआ था? क्या वह विभाग की ओर से अधिकृत था? यदि हां तो किस अधिकारी ने उसे अधिकृत किया? और यदि नहीं, तो बर्खास्त कर्मचारी को बिजली के खंभों पर चढ़कर काम करने की अनुमति कैसे मिली?


