Hapur News: नाबालिग से दुष्कर्म और जबरन गर्भपात का आरोप, स्टाफ नर्स समेत छह पर केस

Hapur News : हापुड़ में नाबालिग से दुष्कर्म और जबरन गर्भपात का मामला, स्टाफ नर्स समेत छह पर केस, डीएनए जांच होगी।

Avnish Pal
Published on: 18 Jun 2026 9:01 AM IST
Hapur News:  नाबालिग से दुष्कर्म और जबरन गर्भपात का आरोप, स्टाफ नर्स समेत छह पर केस
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Hapur News :-जनपद में एक नाबालिग किशोरी से कथित दुष्कर्म और उसके बाद गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात कराए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने मुख्य आरोपित, उसके परिजनों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर तैनात एक स्टाफ नर्स समेत छह लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने जांच कमेटी गठित कर पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।

सहेली के घर गई थी किशोरी, वहीं हुआ पहला दुष्कर्म

पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार छह नवंबर 2025 को उनकी नाबालिग पुत्री पड़ोस में अपनी सहेली के घर गई थी। आरोप है कि इसी दौरान सहेली के भाई दुष्यंत ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपित ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी, जिसके कारण वह भयभीत हो गई और किसी को घटना की जानकारी नहीं दे सकी।परिजनों के अनुसार 15 नवंबर 2025 को आरोपित ने एक बार फिर किशोरी को अपने घर बुलाया और दोबारा दुष्कर्म किया। लगातार हुए शोषण के कारण किशोरी गर्भवती हो गई।

गर्भ ठहरने पर बनाया समझौते का दबाव

परिजनों का आरोप है कि जब किशोरी के गर्भवती होने की जानकारी आरोपित पक्ष को मिली तो उन्होंने मामले को दबाने के लिए समझौते का दबाव बनाना शुरू कर दिया। पीड़ित परिवार पर लगातार धमकियां दी गईं और सामाजिक दबाव भी बनाया गया।शिकायत में कहा गया है कि दो जून 2026 को आरोपित पक्ष के लोगों ने पीड़िता और उसके पिता पर गर्भपात कराने के लिए दबाव डाला। विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।

यूपीआई से भेजे गए 20 हजार रुपये, फिर कराया गया गर्भपात

पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपितों ने मामले को दबाने के उद्देश्य से यूपीआई के माध्यम से उनके खाते में 20 हजार रुपये भेजे। इसके बाद उसी दिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात स्टाफ नर्स की मदद से किशोरी का गर्भपात करा दिया गया।परिजनों का कहना है कि गर्भपात पूरी तरह दबाव और साजिश के तहत कराया गया, ताकि दुष्कर्म के मामले के महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट किए जा सकें।

स्टाफ नर्स समेत छह आरोपितों पर दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि मामले की जांच के बाद मुख्य आरोपित दुष्यंत, पप्पू, अंजु, कुंवरपाल, संतगिर तथा पीएचसी पर तैनात स्टाफ नर्स सीमा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।उन्होंने बताया कि पुलिस मेडिकल रिकॉर्ड, बैंक खातों के लेनदेन, मोबाइल कॉल डिटेल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सीएमओ ने गठित की जांच कमेटी

मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. किशोर कुमार अहूजा ने बताया कि पीएचसी में कथित रूप से कराए गए गर्भपात की जांच के लिए एक विशेष कमेटी गठित की गई है।उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नहर में मिला भ्रूण बना जांच का अहम सुराग

इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब चार जून को क्षेत्र की एक नहर में एक भ्रूण बरामद हुआ था। उस समय पुलिस ने भ्रूण को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया था।थाना प्रभारी सुरेश कुमार के अनुसार आशंका जताई जा रही है कि नहर में मिला भ्रूण इसी मामले से जुड़ा हो सकता है। पुलिस अब वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।

डीएनए टेस्ट से खुलेगा राज

पुलिस के अनुसार नहर से बरामद भ्रूण और मुख्य आरोपित के डीएनए नमूनों की जांच कराई जाएगी। यदि दोनों का डीएनए मेल खाता है तो यह जांच का सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है।अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी निगाहें

नाबालिग से दुष्कर्म, कथित जबरन गर्भपात और सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की भूमिका जैसे गंभीर आरोपों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच, डीएनए रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला न केवल दुष्कर्म बल्कि साक्ष्य मिटाने और चिकित्सा नियमों के गंभीर उल्लंघन का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

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