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Hapur News: बाग में काम कर रहे कामगार पर बंदरों के झुंड का हमला, मची अफरा-तफरी
Hapur News: हापुड़ के एक बाग में काम कर रहे कामगार पर बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
Hapur News(Photo-Social Media)
Hapur News: हापुड़ जिले के सिंभावली क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। गांव ढाना स्थित एक बाग में बुधवार को सफाई और देखरेख का काम कर रहे कामगार पर अचानक बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया। बंदरों के हमले में कामगार घायल हो गया। उसके शोर मचाने पर आसपास खेतों में काम कर रहे किसानों और मजदूरों ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह बंदरों को भगाया और घायल को बचाया। इसके बाद उसे उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ले जाया गया।
बाग में काम कर रहा था कामगार, अचानक टूट पड़ा बंदरों का झुंड
जानकारी के अनुसार, गांव फरीदपुर गुंसाई निवासी नागेंद्र गिरी पिछले काफी समय से गांव ढाना स्थित एक बाग में देखरेख का काम करते हैं। बुधवार को भी वह रोजाना की तरह बाग में सफाई और अन्य कामकाज में जुटे हुए थे। इसी दौरान अचानक बंदरों का एक झुंड वहां पहुंच गया।बताया गया कि बंदरों ने अचानक नागेंद्र गिरी पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से वह घबरा गए और खुद को बचाने के लिए शोर मचाने लगे। उनकी आवाज सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे किसान और मजदूर मौके की ओर दौड़े। लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बंदरों के झुंड को वहां से भगाया।
शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीण, बचाई कामगार की जान
बंदरों के हमले के बाद घायल नागेंद्र को ग्रामीणों की मदद से उपचार के लिए पीएचसी पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार कराया गया। घटना के बाद बाग और आसपास के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों में भी डर का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के झुंड के कारण खेतों और बागों में काम करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
आबादी से लेकर खेतों तक बढ़ा बंदरों का आतंक
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सिंभावली क्षेत्र के गांवों में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बंदर केवल जंगल और बागों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों में भी पहुंचकर लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। कई बार बंदर घरों में घुसकर सामान उठा ले जाते हैं, वहीं रास्ते में लोगों पर झपटने और हमला करने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में खड़ी फसलों को भी बंदरों के झुंड से काफी नुकसान हो रहा है। किसान फसल बचाने के लिए खेतों में निगरानी करने को मजबूर हैं। विशेष रूप से अकेले खेत या बाग में काम करने वाले लोगों को बंदरों के हमले का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से की ठोस कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से बंदरों के बढ़ते आतंक से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि ग्रामीणों और किसानों को राहत मिल सके। ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते बंदरों की समस्या पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। बागों, खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में बंदरों के झुंड के कारण बच्चों, बुजुर्गों और कामगारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।


