Hapur News: कैंसर चिकित्सक से डेढ़ लाख की रिश्वत मांगने वाला कानूनगो 50 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

Hapur News: हापुड़ के धौलाना तहसील में एंटी करप्शन टीम ने कानूनगो बिजेंद्र सिंह को 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि जमीन से जुड़े मामले में कैंसर चिकित्सक से डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी।

Avnish Pal
Published on: 23 Sept 2026 3:47 PM IST
Hapur News: कैंसर चिकित्सक से डेढ़ लाख की रिश्वत मांगने वाला कानूनगो 50 हजार लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
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Hapur News: धौलाना तहसील क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसील में तैनात कानूनगो बिजेंद्र सिंह को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि कानूनगो ने ग्राम सौलाना निवासी प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह से जमीन से जुड़े मामले को लेकर डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के बाद मेरठ एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाकर कानूनगो को डॉक्टर के निजी क्लीनिक से रिश्वत की पहली किश्त लेते दबोच लिया।कानूनगो की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही धौलाना तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कार्रवाई को लेकर चर्चा शुरू हो गई। एंटी करप्शन टीम आरोपी कानूनगो को अपने साथ ले गई और उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई।

जमीन के मामले में रिश्वत मांगने का आरोप

बताया गया कि ग्राम सौलाना निवासी डॉ. केपी सिंह क्षेत्र के प्रमुख कैंसर रोग विशेषज्ञ हैं और धौलाना तहसील के गेट नंबर-1 के सामने उनका निजी कैंसर क्लीनिक संचालित होता है। डॉक्टर के अनुसार, ग्राम सौलाना में उनकी जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। जमीन की रजिस्ट्री, अद्यतन फर्द और दाखिल-खारिज के दस्तावेज होने के साथ ही जमीन पर उनका भौतिक कब्जा भी बताया गया है।आरोप है कि इसके बावजूद धौलाना तहसील में तैनात कानूनगो बिजेंद्र सिंह ने जमीन के एक हिस्से को किसी अन्य व्यक्ति की जमीन से संबंधित बताते हुए डॉक्टर पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। डॉक्टर का आरोप है कि उन्होंने कानूनगो को कई बार जमीन से संबंधित मूल दस्तावेज दिखाए, लेकिन कानूनगो ने कथित तौर पर दस्तावेजों को स्वीकार करने या देखने के बजाय मामले को निपटाने के लिए रकम की मांग की।

डेढ़ लाख रुपये मांगे जाने का आरोप

डॉ. केपी सिंह के अनुसार, कानूनगो द्वारा उनसे कथित तौर पर डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। बार-बार रकम की मांग और कथित दबाव से परेशान होकर डॉक्टर ने मामले की शिकायत मेरठ स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो से की।शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले शिकायत की सत्यता का सत्यापन कराया। सत्यापन प्रक्रिया में शिकायत सही पाए जाने के बाद आरोपी कानूनगो को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ने की योजना तैयार की गई।

क्लीनिक पर पहुंचते ही टीम ने दबोचा

योजना के तहत रिश्वत की रकम देने के लिए डॉक्टर और कानूनगो के बीच बातचीत हुई। इसके बाद रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 50 हजार रुपये देने की बात तय हुई। निर्धारित योजना के अनुसार एंटी करप्शन टीम ने अपनी निगरानी में कार्रवाई की तैयारी की।बताया गया कि जैसे ही कानूनगो बिजेंद्र सिंह 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेने के लिए डॉक्टर के क्लीनिक पर पहुंचा और रकम ली, पहले से घात लगाए एंटी करप्शन टीम के अधिकारियों ने उसे पकड़ लिया। टीम ने उसके कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद करने के बाद मौके पर आवश्यक कार्रवाई पूरी की।

तहसील में मचा हड़कंप

कानूनगो की गिरफ्तारी की जानकारी धौलाना तहसील परिसर तक पहुंचते ही वहां हड़कंप मच गया। तहसील में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच पूरे मामले को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। एंटी करप्शन टीम आरोपी कानूनगो को हिरासत में लेकर संबंधित थाने पहुंची, जहां उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है।एंटी करप्शन की कार्रवाई के बाद तहसील में तैनात अन्य कर्मचारियों में भी खलबली मची रही। कार्रवाई के दौरान टीम ने रिश्वत से जुड़े मामले में आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेज जुटाए। हालांकि मामले में आगे की विस्तृत जानकारी जांच और विधिक कार्रवाई पूरी होने के बाद सामने आएगी।

दस्तावेज होने के बावजूद दबाव बनाने का आरोप

शिकायतकर्ता डॉक्टर का मुख्य आरोप यह है कि उनके पास जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज और दाखिल-खारिज मौजूद होने के बावजूद कानूनगो द्वारा कथित रूप से दूसरे व्यक्ति की जमीन का हिस्सा बताकर उन पर दबाव बनाया जा रहा था। डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने संबंधित दस्तावेज दिखाकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन कथित तौर पर रिश्वत की मांग जारी रही।एंटी करप्शन टीम की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। मामले में आरोपी कानूनगो के खिलाफ दर्ज मुकदमे और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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