हापुड़ पनीर घोटाला: 18 यूनिटों से गायब दूध खरीद का हिसाब, विभाग ने मांगा पूरा रिकॉर्ड

Hapur News: रोजाना सैकड़ों किलो पनीर बनाने वाली इकाइयां जांच में नहीं दिखा सकीं दूध खरीद का रिकॉर्ड, तालाब किनारे और कबाड़ के पास भी मिला पनीर निर्माण

Avnish Pal
Published on: 3 Sept 2026 8:49 PM IST
हापुड़ पनीर घोटाला: 18 यूनिटों से गायब दूध खरीद का हिसाब, विभाग ने मांगा पूरा रिकॉर्ड
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Hapur News :-जिले में पनीर की बढ़ती खपत के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच ने इसके निर्माण और गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग की जांच के दौरान 18 पनीर निर्माण इकाइयां ऐसी मिलीं, जहां रोजाना सैकड़ों किलो पनीर तैयार किया जा रहा था, लेकिन संबंधित इकाइयां जांच के दौरान पनीर बनाने में इस्तेमाल होने वाले दूध की खरीद का पर्याप्त रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सकीं।दूध से पनीर बनने की पूरी प्रक्रिया को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। अब विभाग ने सभी संबंधित फर्मों को नोटिस जारी कर दूध खरीद, दूध की मात्रा, खरीद दर, आपूर्तिकर्ता और पनीर उत्पादन का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग इन आंकड़ों का मिलान कर यह जांच करेगा कि दर्ज दूध खरीद और पनीर उत्पादन में कोई असामान्यता तो नहीं है।

दूध का हिसाब नहीं तो उत्पादन पर उठे सवाल

जांच में सामने आया कि कुछ इकाइयों में पनीर का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जा रहा था, लेकिन अधिकारियों के सामने दूध खरीद से संबंधित रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इसके बाद विभाग ने संबंधित कारोबारियों से दस्तावेज मांगे हैं।अब जांच का मुख्य बिंदु यही है कि संबंधित इकाइयों ने कितना दूध खरीदा और उससे कितनी मात्रा में पनीर तैयार किया। विभाग दूध की खरीद और पनीर उत्पादन के आंकड़ों का मिलान करेगा। यदि रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है तो उसके कारणों की भी जांच की जाएगी।

तालाब किनारे और कबाड़ के पास बनता मिला पनीर

मामला सिर्फ रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में कुछ इकाइयों में स्वच्छता व्यवस्था भी चिंताजनक मिली। अधिकारियों के अनुसार कुछ स्थानों पर तालाब के किनारे, कबाड़ के ढेर के पास और बदबूदार वातावरण में पनीर तैयार किया जा रहा था।खाद्य पदार्थों के निर्माण के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण जरूरी है। ऐसे में गंदगी और दुर्गंध वाले स्थानों पर पनीर का उत्पादन मिलने से उसकी गुणवत्ता और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। विभाग ने मानकों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों को सुधार के निर्देश दिए हैं और कुछ स्थानों पर स्थिति ठीक होने तक उत्पादन रोकने की कार्रवाई भी की गई है।

नोटिस के जवाब के बाद तय होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित फर्मों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। नोटिस के जवाब और उपलब्ध कराए गए।दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

यदि किसी इकाई में खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन, रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितता या अन्य गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित फर्म के खिलाफ जुर्माना लगाने के साथ पनीर निर्माण पर रोक और लाइसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

विभाग की नजर पनीर के ‘दूध वाले गणित’ पर

जांच के बाद अब खाद्य सुरक्षा विभाग पनीर कारोबार की पूरी सप्लाई चेन को खंगालने की तैयारी में है। दूध कहां से खरीदा गया, कितनी मात्रा में खरीदा गया, किस कीमत पर खरीदा गया और उससे कितना पनीर तैयार किया गया—इन सभी बिंदुओं का रिकॉर्ड जांचा जाएगा।

इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पनीर निर्माण में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं और उत्पादन से जुड़े दस्तावेज वास्तविक स्थिति से मेल खाते हैं या नहीं।

यदि दूध ही नहीं ले रहे हैं तो पनीर कैसे बनाया जा रहा है?’

उपायुक्त खाद्य सुरक्षा चंद्रशेखर मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य मानकों से किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। पनीर जैसे खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर विभाग पूरी गंभीरता से जांच कर रहा है।उन्होंने कहा कि संबंधित इकाइयों को नोटिस जारी कर दूध खरीद और पनीर उत्पादन का पूरा विवरण मांगा गया है। “यदि दूध ही नहीं ले रहे हैं तो पनीर कैसे बनाया जा रहा है। नोटिस का उत्तर मिलने के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

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