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Hapur News: पिलखुवा में 50 करोड़ का फर्जी कारोबार, 13.27 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा
Hapur News: हापुड़ के पिलखुवा में आरके ट्रेडर्स ने बोगस आईटीसी के जरिए 11.85 करोड़ की कर देयता समायोजित की। मौके पर फर्म गायब मिलने पर मालिक पर होगी एफआईआर।
Hapur News :- कागजों में करोड़ों रुपये का कारोबार और धरातल पर फर्म का कोई अस्तित्व ही नहीं! जीएसटी के नाम पर फर्जीवाड़े का ऐसा ही बड़ा मामला पिलखुवा में सामने आया है। यहां संचालित बताई जा रही आरके ट्रेडर्स ने महज कुछ महीनों में 50.62 करोड़ रुपये का कारोबार दर्शाकर 11.85 करोड़ रुपये की कर देयता बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के माध्यम से समायोजित कर ली। सीजीएसटी विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा की जांच में न तो घोषित पते पर फर्म मिली और न ही उसके संचालक अमित कुमार से संपर्क हो सका। विभागीय जांच में कुल 13.27 करोड़ रुपये के कर अपवंचन का खुलासा हुआ है। मामले में अब फर्म मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
पंजीकरण के बाद करोड़ों का कारोबार दिखाया
सीजीएसटी विभाग के अंतर्गत पिलखुवा की आरके ट्रेडर्स ने 27 मई 2025 को जीएसटी पंजीकरण कराया था। फर्म ने गारमेंट्स की खरीद-बिक्री के उद्देश्य से पंजीकरण लिया था। विभागीय जांच के अनुसार, फर्म ने मई से नवंबर 2026 के बीच 50.62 करोड़ रुपये का टर्नओवर दर्शाया। इस कारोबार के आधार पर बनने वाली 11.85 करोड़ रुपये की कर देयता को बोगस आईटीसी के जरिये समायोजित कर दिया गया। बड़े स्तर पर हुए इस लेनदेन को संदिग्ध मानते हुए विभाग ने जांच शुरू की।
घोषित पते पर नहीं मिली फर्म, मालिक का फोन भी बंद
मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच नवंबर 2026 को विशेष अनुसंधान शाखा रेंज-बी गाजियाबाद की टीम ने आरके ट्रेडर्स के घोषित व्यापार स्थल पर पहुंचकर जांच की। मौके पर टीम को फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला। आसपास के लोगों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी ने भी वहां इस नाम से कारोबार संचालित होने की पुष्टि नहीं की।इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने जीएसटी पोर्टल पर दर्ज मोबाइल नंबर के माध्यम से फर्म स्वामी अमित कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला। मौके पर फर्म का नहीं मिलना और संचालक से संपर्क न हो पाना जांच में सामने आए फर्जीवाड़े को और गंभीर बनाता है।
चार राज्यों की फर्मों से जुटाई 11.44 करोड़ की बोगस आईटीसी
जांच में सामने आया कि आरके ट्रेडर्स ने अलग-अलग राज्यों में पंजीकृत ऐसी फर्मों से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल की, जिनके अस्तित्व पर सवाल खड़े हुए हैं। विभागीय जांच के अनुसार, फर्म ने राजस्थान की बोगस एवं अस्तित्वहीन फर्म से 5.33 करोड़ रुपये, जम्मू-कश्मीर की फर्म से 2.15 करोड़ रुपये, मेरठ की फर्म से 1.71 करोड़ रुपये और प्रयागराज की बोगस फर्म से 2.23 करोड़ रुपये की आईटीसी प्राप्त की।इस प्रकार कुल 11.44 करोड़ रुपये की बोगस आईटीसी हासिल की गई। जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जी आईटीसी को आगे दिल्ली की फर्मों को पास ऑन किया गया। इससे दूसरे राज्यों तक फैले फर्जी बिलिंग और आईटीसी के नेटवर्क के जरिये कर चोरी किए जाने की आशंका सामने आई है।
62.19 लाख की आईटीसी ब्लॉक, पंजीकरण निरस्त करने की तैयारी
विभाग ने राजस्व की सुरक्षा के लिए तत्काल कार्रवाई करते हुए फर्म के क्रेडिट लेजर में उपलब्ध 62.19 लाख रुपये की आईटीसी ब्लॉक कर दी है। इसके साथ ही फर्म का जीएसटी पंजीकरण निरस्त करने के लिए केंद्रीय प्राधिकारी को पत्र भेजा गया है।जांच में यह भी सामने आया कि फर्म ने 1.83 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आईटीसी क्लेम करते हुए रिटर्न दाखिल किया था। विभाग अब इस पूरे लेनदेन की पड़ताल कर रहा है।
फर्म मालिक के खिलाफ दर्ज होगी प्राथमिकी
सीजीएसटी विभाग की ओर से फर्म स्वामी अमित कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा जिन व्यापारियों और फर्मों से आरके ट्रेडर्स ने आईटीसी प्राप्त की तथा जिन फर्मों को बोगस आईटीसी पास ऑन की गई, उनके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे जा रहे हैं।इस कार्रवाई से फर्जी फर्मों के माध्यम से जीएसटी चोरी करने वाले नेटवर्क पर शिकंजा कसने की उम्मीद है। जांच टीम में विशेष अनुसंधान शाखा रेंज-बी गाजियाबाद के उपायुक्त विमल कुमार और राज्यकर अधिकारी सतीश त्रिपाठी शामिल रहे।


