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Hapur News: 25 साल पुराने पिलखुवा तिहरे हत्याकांड में बड़ा मोड़, तत्कालीन विवेचक पर विभागीय कार्रवाई
Hapur News: हापुड़ के पिलखुवा के चर्चित तिहरे हत्याकांड में 25 साल बाद नया मोड़ आया है। तत्कालीन विवेचक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है, पेंशन पर भी असर पड़ सकता है।
Hapur News(Photo-Social Media)
Hapur News: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद के पिलखुवा में करीब 25 वर्ष पहले हुए बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड और उससे जुड़े दूसरे हत्याकांड की जांच एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। इस बार मामला सीधे उस समय के विवेचक और तत्कालीन थाना प्रभारी तक पहुंच गया है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर पूरन सिंह मेहरा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। उन पर जांच में कथित गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं, जिसके चलते अब उनकी पूरी पेंशन तक रोके जाने की कार्रवाई हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार का बड़ा कदम
उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के 20 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में अदालत में अनुपालन शपथपत्र दाखिल किया है। शपथपत्र में बताया गया है कि तत्कालीन विवेचक रहे सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर पूरन सिंह मेहरा के खिलाफ सिविल सेवा विनियमावली के अनुच्छेद 351-ए के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।शासन ने इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ पुलिस मुख्यालय को आगे की कार्रवाई शीघ्र पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं। शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह एक विशेष परिस्थितियों वाला मामला है और इसे भविष्य में अन्य मामलों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।
सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार यह कार्रवाई वर्ष 2001 के केस क्राइम संख्या 221/2001 तथा वर्ष 2002 के केस क्राइम संख्या 228/2002 की जांच में सीबीआई द्वारा इंगित की गई कथित गंभीर कमियों के आधार पर शुरू की गई है।बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने स्थानीय पुलिस की विवेचना में कई गंभीर खामियां चिन्हित की थीं। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2019 में सीबीआई को रिपोर्ट पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। सीबीआई ने 1 फरवरी 2022 को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन विवेचक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की थी।
1 अगस्त को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
सरकारी अभिलेखों के अनुसार सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर पूरन सिंह मेहरा को 1 अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2001 के चर्चित तिहरे हत्याकांड की विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए बिना मात्र 18 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया।इसके अलावा आरोप है कि घटनास्थल से बरामद रक्तरंजित वस्तुओं को समय पर फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) नहीं भेजा गया। साथ ही कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज नहीं कराए गए। नोटिस में कहा गया है कि इन कथित कमियों का असर अभियोजन पर पड़ा और आरोपितों को इसका लाभ मिला।
15 दिन में जवाब नहीं दिया तो पूरी पेंशन रुक सकती है
कारण बताओ नोटिस में सेवानिवृत्त अधिकारी से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ तो उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकतरफा निर्णय लिया जा सकता है। विभागीय कार्रवाई के तहत उनकी पूरी पेंशन रोके जाने तक का प्रावधान लागू किया जा सकता है। साथ ही उन्हें संबंधित दस्तावेजों का निरीक्षण करने का अवसर भी दिया गया है।
क्या था पिलखुवा का बहुचर्चित तिहरा हत्याकांड?
यह मामला 24 जुलाई 2001 का है, जब पिलखुवा में व्यापारी राजेंद्र प्रसाद गर्ग की पुत्रवधू सीमा तथा उनके दो मासूम बच्चों की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। स्थानीय पुलिस ने जांच के बाद कई लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।बाद में इस मामले के मुख्य आरोपित बताए गए नितिन गर्ग को जमानत मिलने के बाद 16 जुलाई 2002 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के संबंध में अलग मुकदमा दर्ज हुआ और मामला और अधिक चर्चित हो गया।
एसआईटी से लेकर सीबीआई जांच तक पहुंचा मामला
नितिन गर्ग की मां द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद अदालत ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आदेश दिया। एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई जांच का रास्ता खुला। अब उसी जांच के निष्कर्षों और सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश के बाद तत्कालीन विवेचक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।


