Hapur News: 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और रुद्राभिषेक का महत्व

Hapur News: 11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा, रुद्राभिषेक, शुभ मुहूर्त और अभिषेक के धार्मिक महत्व को लेकर ज्योतिर्विद ने दी विस्तृत जानकारी।

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Published on: 31 July 2026 4:46 PM IST
Shravan Shivratri on August 11
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11 अगस्त को श्रावण शिवरात्रि, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और रुद्राभिषेक का महत्व (Photo- Social Media)

Hapur News: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस बार श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि 11 अगस्त (मंगलवार) को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करने और रात्रि के चारों प्रहर में पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।देवलोक कॉलोनी स्थित श्री ज्योतिष कार्यालय के ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार इस दिन भगवान शिव की विशेष उपासना, रुद्राभिषेक, शिव मंत्रों का जाप और रात्रि जागरण अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। कांवड़ यात्रा से लाया गया पवित्र गंगाजल भी त्रयोदशी के समापन और चतुर्दशी के प्रवेश काल में शिवलिंग पर अर्पित किया जाएगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

सुबह से करें व्रत का संकल्प, ऐसे करें भोलेनाथ की पूजा

पंडित सुबोध पांडेय के अनुसार श्रद्धालुओं को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद शिव मंदिर में जाकर या घर पर स्थापित शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग, भस्म, दूब, पुष्प और फल से पूजन करना चाहिए। पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप,महामृत्युंजय मंत्र, शिव चालीसा, रुद्राष्टक और शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।


चार प्रहर की पूजा का रहेगा विशेष महत्व

श्रावण शिवरात्रि पर रात्रि के चारों प्रहर में भगवान शिव का अलग-अलग सामग्री से अभिषेक करने का विधान बताया गया है।

प्रथम प्रहर: शाम 6:19 बजे से रात 9:26 बजे तक – दूध से अभिषेक।द्वितीय प्रहर: रात 9:26 बजे से 12:52 बजे तक – दही से अभिषेक।तृतीय प्रहर: रात 12:52 बजे से सुबह 3:59 बजे तक – घी से अभिषेक।चतुर्थ प्रहर: सुबह 3:59 बजे से 7:06 बजे तक – शहद एवं जल से अभिषेक।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चारों प्रहर में अलग-अलग सामग्री से किए गए अभिषेक से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं।

रुद्राभिषेक क्यों माना जाता है इतना प्रभावशाली?

ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना जाता है। अलग-अलग पदार्थों से अभिषेक करने का अलग-अलग धार्मिक महत्व बताया गया है।

शुद्ध जल से अभिषेक करने पर मानसिक शांति और पापों का क्षय होता है।गंगाजल आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।दूध से उत्तम स्वास्थ्य और संतान सुख की प्राप्ति होती है।दही से यश, प्रतिष्ठा और धन-धान्य में वृद्धि होती है।घी से आयु, ऐश्वर्य और समृद्धि प्राप्त होती है।शहद से वाणी में मधुरता आती है।

मिश्री से मानसिक संतोष मिलता है।गन्ने के रस से आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं।इत्र या गुलाब जल से सौभाग्य में वृद्धि होती है।

तिल या सरसों के तेल से शनि दोष शांत होने की मान्यता है।

काले तिल और कुशा मिश्रित जल से पितृ दोष एवं ग्रह दोषों की शांति का उल्लेख शास्त्रों में मिलता है।

कांवड़ियों के लिए भी रहेगा विशेष दिन

सावन में कांवड़ यात्रा का समापन भी शिवरात्रि के आसपास होता है। दूर-दराज से गंगाजल लेकर आने वाले लाखों शिवभक्त इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगने की संभावना है। प्रशासन भी प्रमुख शिवालयों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां करेगा।

सावन के चार सोमवार भी हैं बेहद शुभ

पंडित सुबोध पांडेय ने बताया कि इस वर्ष श्रावण मास में कुल चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिनका विशेष धार्मिक महत्व है।पहला सोमवार: 3 अगस्त,दूसरा सोमवार: 10 अगस्त,श्रावण शिवरात्रि: 11 अगस्त,तीसरा सोमवार: 17 अगस्त,चौथा सोमवार: 24 अगस्त।

शिवभक्तों के लिए विशेष संदेश

धार्मिक मान्यता है कि जो श्रद्धालु श्रावण शिवरात्रि पर सच्ची श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ व्रत रखकर भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही परिवार में सुख-शांति, आरोग्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए इस बार 11 अगस्त की श्रावण शिवरात्रि को शिव आराधना का यह दुर्लभ अवसर हाथ से न जाने दें।

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