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Hapur News: अधोमानक इंजेक्शन मिलने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, ब्लड प्रेशर मरीजों पर बढ़ी चिंता
Hapur News: हापुड़ में किडनी और ब्लड प्रेशर के मरीजों को लगाए गए कुछ इंजेक्शन अधोमानक पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। पूरे जिले में जांच और निगरानी बढ़ा दी गई है।
Hapur News(Photo-Social Media)
Hapur News: किडनी और उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) के मरीजों के उपचार में इस्तेमाल होने वाले एक महत्वपूर्ण इंजेक्शन की गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद हापुड़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रदेश स्तर पर हुई जांच में फ्रूसेमाइड (IP 10 mg/ml, 2 ml Injection) का एक बैच अधोमानक (सब-स्टैंडर्ड) पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे जिले में इसके वितरण और उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी बैच के सैकड़ों इंजेक्शन जिला अस्पताल और विभिन्न सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजे जा चुके थे। रिपोर्ट सामने आने के बाद विभाग ने आनन-फानन में उपलब्ध स्टॉक को वापस मंगवाकर सुरक्षित रखवा दिया है।
एक हजार इंजेक्शन पहुंचे थे हापुड़, कई मरीजों को लग चुके थे डोज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले को इस बैच के कुल 1000 इंजेक्शन प्राप्त हुए थे। इनमें से 120 इंजेक्शन गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए थे।शुरुआती स्तर पर जांच के बाद इन्हें विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर वितरित कर दिया गया।वितरण के तहत जिला अस्पताल को 560, धौलाना सीएचसी को 100, कोठी गेट स्थित पीपीसी को 20, झड़ीना स्वास्थ्य केंद्र को 50, लोधीपुर को 50 और अलीपुर स्वास्थ्य केंद्र को 50 इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए थे।
लेकिन बाद में प्रदेश स्तर पर हुई दोबारा जांच में इसी बैच को गुणवत्ता मानकों पर फेल घोषित कर दिया गया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल रिकॉल प्रक्रिया शुरू कर दी।
लैब रिपोर्ट ने खोली पोल, गुणवत्ता मानकों पर फेल हुई दवा
जानकारी के अनुसार कौशांबी जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इस बैच का नमूना लेकर मेरठ स्थित सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा था। 21 मई को आई रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार इंजेक्शन "डिस्क्रिप्शन" और "पार्टिकुलेट मैटर" जैसे महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। इसके बाद इसे अधोमानक दवा घोषित कर दिया गया।जांच रिपोर्ट सामने आते ही उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPMSCL) ने पूरे प्रदेश में इस बैच के वितरण और उपयोग पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए।
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की मरीजों की निगरानी
सबसे बड़ी चिंता उन मरीजों को लेकर थी जिन्हें यह इंजेक्शन लगाया जा चुका था। रिपोर्ट मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मरीजों का डाटा खंगालना शुरू किया और उनसे संपर्क साधा। अधिकारियों ने मरीजों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी मरीज में इंजेक्शन के कारण गंभीर दुष्प्रभाव या स्वास्थ्य समस्या की शिकायत सामने नहीं आई है।इसके बावजूद विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
कई केंद्रों से वापस मंगवाए गए इंजेक्शन
रिपोर्ट आने के बाद धौलाना सीएचसी से 20, कोठी गेट पीपीसी से 14, झड़ीना से 40 और लोधीपुर स्वास्थ्य केंद्र से 40 इंजेक्शन वापस मंगवाए गए हैं। इन सभी इंजेक्शनों को ड्रग वेयर हाउस में सुरक्षित रख दिया गया है और इनके उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
हालांकि जिला अस्पताल में उपलब्ध अधिकांश इंजेक्शन रिपोर्ट आने से पहले ही मरीजों को लगाए जा चुके थे, जिसके चलते विभाग ने विशेष निगरानी शुरू कर दी है।
क्या है फ्रूसेमाइड इंजेक्शन और क्यों होता है इस्तेमाल?
फ्रूसेमाइड एक महत्वपूर्ण लूप डाइयूरेटिक (Water Pill) दवा है, जिसका उपयोग किडनी रोग, हार्ट फेल्योर, शरीर में सूजन, पेशाब कम बनने और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर स्थितियों के उपचार में किया जाता है।यह दवा शरीर में जमा अतिरिक्त नमक और पानी को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने का काम करती है। गंभीर मरीजों के उपचार में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है, इसलिए इसकी गुणवत्ता को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
वैकल्पिक दवा उपलब्ध कराने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के उपचार पर असर न पड़े इसके लिए अन्य बैच के इंजेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवा की कमी नहीं होने दी जाएगी।
क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी?
सीएमओ डाॅ. किशोर कुमार आहूजा ने बताया कि मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए वैकल्पिक बैच के इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जांच के बाद ही इंजेक्शन का वितरण किया गया था। अब संबंधित बैच के सभी उपलब्ध इंजेक्शन ड्रग वेयर हाउस में सुरक्षित रख दिए गए हैं और उनके उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।


