Hardoi News: विधानसभा में गूंजा किसानों के पट्टे का मुद्दा, संक्रमणीय भूमि की मांग को मिली नई मजबूती

Hardoi News: विधानसभा में किसानों की पट्टे की भूमि को संक्रमणीय बनाने का मुद्दा उठने से लंबे समय से अधिकार की मांग कर रहे किसानों को नई उम्मीद मिली है। सरकार से लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की मांग तेज हो गई है।

Pulkit Sharma
Published on: 7 Aug 2026 7:04 PM IST
Hardoi News: विधानसभा में गूंजा किसानों के पट्टे का मुद्दा, संक्रमणीय भूमि की मांग को मिली नई मजबूती
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Hardoi News: लंबे समय से अपनी पट्टे की जमीन पर पूर्ण अधिकार पाने के लिए संघर्ष कर रहे किसानों की आवाज अब विधानसभा तक पहुंच गई है। कछौना क्षेत्र से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय को विधान परिषद के सभापति अशोक अग्रवाल ने मानसून सत्र के दौरान सदन में उठाया। उनके इस प्रयास से उन सैकड़ों किसानों में नई उम्मीद जगी है, जिनकी पट्टे पर मिली भूमि वर्षों बाद भी संक्रमणीय नहीं हो सकी है।

जानकारी के अनुसार, सरकार की योजनाओं के तहत गरीब और भूमिहीन परिवारों को खेती के लिए ग्राम समाज की भूमि पट्टे के रूप में आवंटित की जाती है। इसके लिए भूमि प्रबंधन समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर पात्र लाभार्थियों का चयन किया जाता है, जिसके बाद उपजिलाधिकारी की स्वीकृति मिलने पर पट्टा जारी होता है। लेकिन कई मामलों में निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद भूमि का दर्जा संक्रमणीय नहीं हो पाता, जिससे किसानों को अपनी ही जमीन पर अधिकार संबंधी अनेक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

नियम 115 के अंतर्गत इस विषय को उठाते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया

किसानों का कहना है कि वर्षों पहले पट्टा मिलने के बाद भी उन्हें बार-बार तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। भूमि का पूरा स्वामित्व न मिलने से वे न तो उस पर आसानी से ऋण ले पाते हैं और न ही अन्य कानूनी सुविधाओं का लाभ उठा पाते हैं। इससे उनका समय और धन दोनों व्यर्थ होता है।सभापति अशोक अग्रवाल ने विधानसभा में नियम 115 के अंतर्गत इस विषय को उठाते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजस्व संहिता के अनुसार निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद पात्र किसानों की असंक्रमणीय भूमि को नियमानुसार संक्रमणीय बनाया जाना चाहिए, ताकि उन्हें अपने अधिकारों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।सदन में यह मुद्दा उठने के बाद किसानों के बीच सकारात्मक माहौल बना है। उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस दिशा में जल्द प्रभावी कदम उठाएगी और वर्षों से लंबित मामलों का समाधान होगा। यदि ऐसा होता है तो हजारों किसानों को राहत मिलेगी और वे अपनी भूमि पर पूर्ण अधिकार के साथ खेती कर सकेंगे, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति भी मजबूत होगी।

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