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Hardoi News: हरदोई बीएसए पर रिश्वत मांगने का आरोप, पांच लाख रुपये की मांग को लेकर दर्ज हुई एफआईआर
Hardoi News: हरदोई में बीएसए पर 5 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप, एफआईआर दर्ज, शिक्षा विभाग में हड़कंप।
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Hardoi News: हरदोई के बेसिक शिक्षा विभाग में विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 61 शिक्षकों से जुड़े अभिलेखों के गायब होने के मामले में विभागीय कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजित सिंह एक नए विवाद में घिर गए। उनके खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोप में शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है।यह मामला गोंडा जनपद के तरबगंज क्षेत्र स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर दर्ज किया गया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी संस्था को शासन स्तर से ईसीसीई (अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन) एजुकेटरों की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कार्य सौंपा गया था। इस प्रक्रिया के तहत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 210 पदों के लिए चयन संबंधी कार्य किया जाना था।संस्था का कहना है कि सेवायोजन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त हजारों आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डाटा उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद आगे की कार्रवाई और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया।
राशि न देने की स्थिति में संस्था को ब्लैकलिस्ट कराने और जमा सुरक्षा धनराशि जब्त कराने की चेतावनी दी गई
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अनुबंध होने के करीब छह माह बाद जब संस्था के प्रतिनिधियों ने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया, तब बीएसए कार्यालय में बुलाकर पांच लाख रुपये की मांग की गई।शिकायतकर्ता का दावा है कि राशि न देने की स्थिति में संस्था को ब्लैकलिस्ट कराने और जमा सुरक्षा धनराशि जब्त कराने की चेतावनी दी गई।एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि कथित दबाव के चलते संस्था की ओर से दो लाख रुपये दिए गए, लेकिन इसके बावजूद शेष धनराशि की मांग जारी रही।
आरोप है कि लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता रहा, जिससे संस्था के कार्य प्रभावित हुए।पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान दोनों पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। उधर, शिक्षा विभाग में एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पूरे प्रकरण पर सभी की नजरें पुलिस जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हुई हैं।


