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Hardoi News: हरदोई में ट्रेन में मिलीं चार मासूम बहनें, मां की मौत के बाद बेसहारा थीं बच्चियां
Hardoi News: हरदोई में कानपुर-बालामऊ पैसेंजर ट्रेन में चार मासूम बहनें अकेली मिलीं। चाइल्ड हेल्पलाइन ने बच्चियों को संरक्षण में लेकर काउंसलिंग कराई और बाल कल्याण समिति के आदेश पर अस्थायी आश्रय दिलाया।
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Hardoi News: कानपुर-बालामऊ पैसेंजर ट्रेन में बुधवार शाम चार मासूम बहनों के मिलने से रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की स्थिति को लेकर चिंता सामने आई। करीब शाम सात बजे ट्रेन संख्या 54336 के जनरल कोच में चार बच्चियां संदिग्ध हालत में दिखाई दीं। रेलवे सुरक्षा बल ने बच्चियों से पूछताछ की तो उनके अकेले होने और परिवार से बिछड़ने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामले की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1098 पर दी गई।सूचना मिलने के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन के परियोजना समन्वयक अनूप तिवारी के निर्देशन में टीम सक्रिय हुई। टीम ने रेलवे सुरक्षा बल के सहयोग से चारों बच्चियों को अपने संरक्षण में लिया। रात में उन्हें चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय लाया गया, जहां उनके रहने और सुरक्षा की व्यवस्था की गई। अगले दिन टीम ने बच्चियों की काउंसलिंग कर उनके बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
जनपद बाराबंकी के रहने वाले बताई जा रही है बच्चियां
काउंसलिंग के दौरान बच्चियों ने अपने नाम निशा, उम्र करीब छह वर्ष, काजल करीब चार वर्ष, छुटकी करीब पांच वर्ष और जानवी करीब तीन वर्ष बताए। बच्चियों ने अपने पिता का नाम बबलू बताया और अपना गांव मसूदनगर, जनपद बाराबंकी बताया। बातचीत में उन्होंने बताया कि उनकी मां की काफी समय पहले मौत हो चुकी है। पिता के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
बच्चियों की बातों से यह भी सामने आया कि उनके पास रहने के लिए कोई स्थायी ठिकाना नहीं था। चारों बहनें एक-दूसरे का सहारा बनकर मांगकर अपना भोजन जुटाती थीं। इसी दौरान वे ट्रेन में पहुंच गईं और रेलवे सुरक्षा बल की नजर उन पर पड़ गई।चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने बच्चियों के बताए पते और अन्य जानकारियों के आधार पर उनके परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया। हालांकि अभी तक परिवार के किसी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया है। टीम की ओर से परिजनों की तलाश लगातार जारी है।अग्रिम कार्रवाई के लिए चारों बहनों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के आदेश के बाद सभी बच्चियों को राजकीय विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरण, हरदोई में अस्थायी आश्रय दिलाया गया है। अब उनके परिवार का पता लगाने के साथ उनकी सुरक्षा और देखभाल की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।


