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Hardoi News: रेलवे स्टेशन पर निरीक्षण को लेकर उठे सवाल, सदस्य की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
Hardoi News: हरदोई रेलवे स्टेशन पर किए गए निरीक्षण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। निरीक्षण के दौरान एक सदस्य की मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई, जिससे पूरे मामले पर पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है।
Hardoi News(Photo-Social Media)
Hardoi News: उत्तर प्रदेश के हरदोई रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार दोपहर उस समय चर्चाओं का दौर शुरू हो गया, जब समर्थकों के साथ पहुंचे डीआरयूसीसी (डिविजनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी) से जुड़े इंजीनियर अनुज कुमार मिश्रा ने स्टेशन परिसर का निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक चले इस दौरे के दौरान रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी भी बनी रही, लेकिन निरीक्षण से अधिक इसकी प्रक्रिया और अधिकारों को लेकर सवाल उठते दिखाई दिए।बताया जाता है कि इससे पहले भी कुछ माह पूर्व इंजीनियर अनुज कुमार मिश्रा द्वारा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया गया था। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि उस निरीक्षण के बाद स्टेशन पर कोई उल्लेखनीय बदलाव देखने को नहीं मिला। इस बार निरीक्षण से पहले रेलवे अधिकारियों को भेजे गए एक पत्र ने नई बहस को जन्म दे दिया।
सूत्रों के अनुसार संबंधित पत्र भाजपा के कमल चिन्ह वाले लेटर पैड पर भेजा गया था। पत्र में अनुज कुमार मिश्रा का परिचय मंडल उपभोक्ता सलाहकार समिति सदस्य, लखनऊ मंडल के रूप में दिया गया था। साथ ही उन्हें निवर्तमान राज्यसभा सांसद के निजी सचिव और हरदोई के पूर्व जेल विजिटर के रूप में भी उल्लेखित किया गया था। यह पत्र उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को संबोधित था, जिसकी प्रतिलिपि मंडल रेल प्रबंधक, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, स्टेशन अधीक्षक, आरपीएफ, जीआरपी सहित अन्य विभागों को भेजी गई थी।
निरीक्षण के दौरान उनकी पत्नी और कई समर्थकों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही। लोगों के बीच यह सवाल उठता रहा कि रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान गैर-अधिकृत व्यक्तियों को साथ ले जाने की अनुमति किस आधार पर दी गई। वहीं कुछ लोगों ने यह भी सवाल खड़ा किया कि हरदोई जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति के अन्य सदस्यों की भूमिका इस मामले में क्या है।स्टेशन परिसर में पूरे निरीक्षण के दौरान फोटो और वीडियो बनते रहे, जिससे यात्रियों और कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं सुनाई देती रहीं। फिलहाल निरीक्षण से जुड़े अधिकारों, प्रक्रियाओं और अनुमति को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि रेलवे प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


