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Hardoi News: भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: शाहाबाद और बिलग्राम के अधिशासी अधिकारी निलंबित
हरदोई में रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में दो अधिशासी अधिकारी निलंबित, विभागीय जांच शुरू।
Hardoi News
Hardoi News: उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति के तहत नगर विकास विभाग ने हरदोई जनपद में तैनात दो अधिशासी अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लेते हुए दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
स्थानीय निकाय निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार नगर पालिका परिषद शाहाबाद में तैनात अधिशासी अधिकारी कृष्ण कुमार सोनकर पर रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। इस संबंध में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) एवं प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय हरदोई तथा नगर पालिका परिषद शाहाबाद के अध्यक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई की गई। आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें पद से हटाते हुए विभागीय कार्यवाही भी प्रारंभ कर दी गई है।
इसी क्रम में नगर पालिका परिषद बिलग्राम के अधिशासी अधिकारी नीलाव शल्या के खिलाफ भी कड़ा कदम उठाया गया है। उन पर एक ठेकेदार से भुगतान के बदले कथित तौर पर कमीशन और रिश्वत मांगने के आरोप लगे थे। मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद बढ़ा और पुलिस में एफआईआर भी दर्ज हुई। जिलाधिकारी हरदोई सहित अन्य अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ने उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
स्थानीय निकाय निदेशक अनुज कुमार झा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्थानीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार, वित्तीय गड़बड़ी या पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों और रिपोर्टों के आधार पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर दृढ़ता से काम कर रही है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा तथा प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद द्वारा भी विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश लगातार दिए जाते रहे हैं। हरदोई के दोनों मामलों में प्राप्त तथ्यों और अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है, जिससे साफ संदेश गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शासन किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।


