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Hardoi News: रेलवे के 157 स्टेशनों वाले जवाब में सवालों का सीधा उत्तर गायब, अधिकारियों पर उठे सवाल
Hardoi News: हरदोई से जुड़े रेलवे मामले में 157 स्टेशनों वाले जवाब पर सवाल उठे। सांसद के सवालों का सीधा उत्तर नहीं मिला।
Hardoi News(Photo-Social Media)
Hardoi News: लोकसभा में हरदोई रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास को लेकर सांसद जयप्रकाश रावत की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सांसद ने अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत हरदोई रेलवे स्टेशन से संबंधित कई बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी मांगी थी, लेकिन रेलवे की ओर से दिए गए जवाब में हरदोई की विशिष्ट जानकारी देने के बजाय उत्तर प्रदेश के 157 स्टेशनों और अमृत भारत स्टेशन योजना से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया का लंबा विवरण शामिल कर दिया गया। इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस जानकारी के लिए सांसद ने सवाल पूछा था, उसका सीधा और बिंदुवार जवाब कहां है?सांसद के सवाल में हरदोई स्टेशन के पुनर्विकास के लिए स्वीकृत निधि, परियोजना के प्रमुख घटक, अब तक हुए काम की भौतिक और वित्तीय प्रगति, मूल और संशोधित समय-सीमा, मूल स्वीकृत डिजाइन में किए गए बदलाव और संशोधित परियोजना की लागत समेत कई अहम जानकारियां मांगी गई थीं। यानी सवाल पूरी तरह हरदोई रेलवे स्टेशन की परियोजना पर केंद्रित था।
रेलवे के जवाब में शुरुआत में हरदोई स्टेशन के संबंध में कुछ सुविधाओं का उल्लेख किया गया। इसमें प्लेटफॉर्म शेल्टर, प्रतीक्षालय, पेयजल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, पैदल पार पुल आदि का जिक्र है। जवाब में यह भी बताया गया कि स्टेशन भवन का संरचनात्मक कार्य, प्लेटफॉर्म संख्या एक, दो और तीन का प्लेटफॉर्म ऊंचा करने तथा सतह सुधार का काम और प्लेटफॉर्म संख्या एक, दो, तीन, चार और पांच पर प्लेटफॉर्म शेल्टर का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा स्टेशन भवन, प्रतीक्षालय, शौचालय, 12 मीटर चौड़े पैदल पुल, पार्किंग और लिफ्ट से जुड़े कार्य शुरू होने की बात कही गई।
उत्तर में पूरे प्रदेश के स्टेशनों की सूची देना किस हद तक सवाल का सीधा जवाब माना जाए?
लेकिन इसके बाद जवाब हरदोई से निकलकर पूरे उत्तर प्रदेश की ओर चला जाता है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत मास्टर प्लान में शामिल सामान्य बिंदुओं की लंबी सूची देने के बाद उत्तर प्रदेश के 157 स्टेशनों की सूची तक पहुंच जाता है। इनमें अछनेरा, आगरा कैंट, आगरा फोर्ट, ऐशबाग, अकबरपुर जंक्शन, अलीगढ़, अमेठी, अमरोहा, आनंद नगर जंक्शन समेत कई स्टेशन शामिल हैं।यहीं से सवाल और गंभीर हो जाता है। सांसद ने हरदोई की परियोजना से जुड़े सवाल पूछे थे, ऐसे में उत्तर में पूरे प्रदेश के स्टेशनों की सूची देना किस हद तक सवाल का सीधा जवाब माना जाए? यदि हरदोई की परियोजना की लागत, संशोधित डिजाइन, समय-सीमा और अब तक के खर्च की जानकारी मांगी गई थी तो इन बिंदुओं पर स्पष्ट आंकड़े सामने आने चाहिए थे।सांसद के सवाल और रेलवे के जवाब के बीच यह अंतर अब राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन सकता है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संसद में पूछे गए स्थानीय और स्पष्ट सवालों का जवाब भी अधिकारी अपनी सुविधा के मुताबिक सामान्य जानकारी देकर टाल सकते हैं? इससे यह धारणा मजबूत होती है कि सांसद द्वारा मांगी गई ठोस जानकारी के बजाय जवाब को व्यापक विवरण में उलझा दिया गया।हरदोई की जनता अब यह जानना चाहती है कि स्टेशन के पुनर्विकास में कितना पैसा स्वीकृत हुआ, कितना खर्च हुआ, मूल डिजाइन में क्या बदलाव किए गए, परियोजना कब पूरी होनी थी और अब कब तक पूरी होगी। इन सवालों का स्पष्ट और बिंदुवार जवाब ही यह बताएगा कि अमृत भारत स्टेशन योजना में हरदोई की वास्तविक प्रगति आखिर कितनी हुई है।


