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Hathras News: आजाद हिंद फौज के साहसी सिपाही थे जांबाज चौधरी हरि सिंह, देशभक्ति की मिसाल कायम की
Hathras News: हाथरस के जांबाज चौधरी हरि सिंह आजाद हिंद फौज के साहसी सिपाही थे। उनकी वीरता और देशभक्ति आज भी लोगों के लिए प्रेरणा है।
Hathras News(Photo-Social Media)
Hathras News: यह देश आजाद हिंद फौज के सच्चे सिपाही चौधरी हरी सिंह को कभी नहीं भूल सकेगा। जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ 9 माह जेल में बिताए थे। उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कठोर यात्राएं भी झेली थी। आजाद हिंद फौज के साहसी सिपाही चौधरी हरि सिंह सादाबाद के गांव कुरसंडा के निवासी थे। उनका जन्म 4 अप्रैल 1917 को गांव कुरसंडा के चौधरी वीरी सिंह के यहां हुआ था। अंग्रेजी अत्याचारों से कुपित चौधरी बचपन से ही क्रांतिकारी हो गए। चौधरी साहब 1938 में राजा महेंद्र प्रताप के माध्यम से आजाद हिंद फौज की एक टुकड़ी के कमांडर नियुक्त हुए उसके बाद अंग्रेजों से उन्होंने लोहा लेना शुरू कर दिया था।
हरि सिंह एक तेज तर्रार सिपाही थे। जहां भी जरूरत पड़ी उन्होंने सुभाष चंद्र बोस के साथ अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया खासकर 1940 से 1942 तक उन्होंने अपनी टुकड़ी के साथ कई स्थानों पर अंग्रेजों की फौज को करारी शिकस्त भी दी थी लेकिन चौधरी हरी सिंह और सुभाष चंद्र बोस को 1943 में एक स्थान से गिरफ्तार कर लिया गया वे अंग्रेजी जेल में कठोर यातनाएं झेलते रहे और करीब 9 माह बाद वह अंग्रेजों की जेल तोड़कर भाग छूटे । चौधरी साहब जंग के दौरान आजादी के सपूतों में गजब का उत्साह जगा कर आसानी से जंग जीत जाते थे। इसके लिए नेताजी द्वारा कई बार उनकी सराहना की गई थी। आज भी आजाद हिंद फौज के इस वीर सिपाही का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। 16 जून 1995 को आजाद हिंद फौज का यह सिपाही पंच तत्व में विलीन हो गया।।
साथी के साथ निभाई मित्रता
स्वजन बताते हैं कि हरिसिंह के जीवन का वह साहसिक घटनाओं से भरा हुआ है। वर्ष 1942 में अंग्रेजों के साथ लड़ाई के समय उनका एक मित्र गौरी सिंह निवासी नगला बड़ा सादाबाद बुरी तरह जख्मी हो गया। अंग्रेजों की गोली लगने से बेहोश हुए साथी को हरि सिंह अपने कंधे पर लादे आठ दिन पैदल चले। सुरक्षित स्थान पर उपचार कराने के बाद मित्र को सुरक्षित घर भेज दिया। इससे उन्हें मित्रता की मिशाल पेश की।
अंग्रेजों की जेल तोड़ भागे
आजाद हिंद फौज की जहां भी आंग्रेजों से लड़ाई होती उसमें यह वीर सिपाही सबसे आगे रहते। स्वजन बताते है एक बार सुभाष चंद्र बोस के साथ उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेजी जेल में कठोर यातनाएं सहते रहे हुए नौ माह बाद जेल को तोड़ कर भाग में गए। आजादी के बाद वह पुलिस भर्ती होकर देश की सेवा करते रहे। 16 जून 1995 को आजाद हिंद फौज का यह सिपाही पंचतत्व में विलीन हो गया।


