क्या बीजेपी सपा के PDA फाॅर्मूले का तोड़ निकाल पाएगी? समझिए पूरा गणित

पार्टियां अपनी एक एक विचारधारा से बाहर निकलकर वोट बैंक बढ़ाने की जुगत में लग गई हैं। यही कारण है कि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी अपनी पुरानी पहचान मुस्लिम-यादव (M-Y) फैक्टर से आगे निकलकर पीडीए

Alakha Singh
Published on: 6 Jun 2026 8:33 PM IST
yogi adityanath vs akhilesh yadav
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yogi adityanath vs akhilesh yadav

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 के लेकर राजनीतिक दलों के ने अपनी-अपनी बिसात बिछाना शुरू कर दी है। यूपी में सभी पार्टियां हर हाल में अपना गढ़ मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहीं। पार्टियां अपनी एक एक विचारधारा से आगे बढ़कर वोट बैंक बढ़ाने की जुगत में लग गई हैं। यही कारण है कि अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी अपनी पुरानी पहचान मुस्लिम-यादव (M-Y) फैक्टर से आगे निकलकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फाॅर्मूला तैयार किया है। इसी प्रकार अब भाजपा भी पीडीए की काट में गैर-याादव ओबीसी मतदाताओं व अन्य सामाजिक समूहों को पार्टी से जोड़ने में लगी है।

प्रदेश में जातिवाद को लेकर चल रही लड़ाई को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी एसबीएसपी के नेता ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में सपा के पीडीए फाॅर्मूले को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होने आरोप लगाया है कि अखिलेश यादव की पार्टी में गैर यादव ओबीसी और पिछड़े वर्ग के लोग पार्टी के भीतर ही लगातार भेदभाव का शिकार हो रहे हैं। राजभर ने कहा कि पीडीए का नारा एक महज चुनावी नारा है, क्योंकि इस समाज से आने वाले लोगों को सपा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा।

क्या है यूपी का जातीय गणित?

सीएसडीएस के रिसर्च और 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में उच्च वर्ग के लोग 18 फीसदी हैं जिनमें 7 फीसदी ब्राह्मण, 7 फीसदी ठाकुर या राजपूत, दो फीसदी वैश्य और दो फीसदी अन्य अपर कास्ट है।

वहीं ओबीसी और पिछड़ों की बात करें तो प्रदेश में कुल 38 फीसदी ओबीसी हैं जिनमें 11 फीसदी यादव, 16 फीसदी अन्य ओबीसी, 5 फीसदी कुर्मी, 4 फीसदी मौर्य कुशवाहा और दो फीसदी जाट हैं। वही पिछड़ों में एससी वर्ग के लोग 20 फीसदी हैं जिनमें जाटव 12 फीसदी और अन्य एससी 8 फीसदी हैं। इसके अलावा अल्पसंख्यकों की बात करें तो इनकी संख्या राज्य में करीब 20 फीसदी है जिसमें सबसे ज्यादा करीब 19 फीसदी मुस्लिम आबादी है।

ऐसे समय में जब सपा पीडीए कार्ड चल रही है, भाजपा ने भी नाॅन ओबीसी नेताओं को प्रमुखता देकर उनसे जुड़े वोटरों को साधने का प्रयास किया है।

सपा के पीडीए को मात देगी भाजपा की नई चाल?

मई में अपने संगठन का विस्तार करते हुए भाजपा ने नाॅन-यादव ओबीसी और शेड्यूल कास्ट पर काफी फोकस किया है। भाजपा की इस चाल से समझा जा रहा है कि ऐसा सपा के पीडीए गठजोड़ को मात देने के लिए किया गया है। भाजपा के संगठन विस्तार में शामिल हुए हैं वे ओबीसी नेता जैसे भूपेंद्र चैधरी, हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश सिंह राजपूत और एससी नेता कृष्णा पासवान हैं। यही सब दिखाता है कि भाजापा ओबीसी और एससी को काफी प्रतिनिधित्व दे रही है।

सपा को क्या फायदा ?

समाजवादी पार्टी की पीडीए रणनीति लोकसभा चुनाव 2024 में काफी सफल रही। यही कारण है कि पार्टी को राज्य में अब तक सबसे बड़ी सफलता मिली। पार्टी ने 80 में से 37 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की। खास बात यह भी है कि सपा से जीतने वाले लोकसभा प्रत्याशियों में 25 ओबीसी समुदाय से हैं, जबकि पार्टी ने सिर्फ 5 ही यादव प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। यानी सपा अपने पारंपरिक वोटबैंक यादव ओबीसी से आगे निकलकर गैर यादव ओबीसी पर ज्यादा फोकस किया है।

सपा के नेतृत्व में यूपी में इंडिया गठबंधन की रणनीति काम आई और गठबंधन को 80 में 43 सीटों पर कामयाबी मिली। खासकर सपा ने अयोध्या फैजाबाद की बहुचर्चित सीट भी जीत ली।

इसके अलावा समाजवादी पार्टी भाजपा के हिन्दुत्व का काट ढूंढ़ने के लिए भी अपनी रणनीति तैयार की है। इसी के परिणाम स्वरूप अखिलेश यादव ने इटावा में केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण कराया और बड़े मंगल पर हनुमान जी के मंदिर पर भंडारा भी किया। इसके अलावा हिन्दू परंपराओं को मान्यता देता हुए संगम में डुबकी भी लगाई थी।

इसके अलावा अखिलेश यादव ने 27 मई को प्रदेश सरकार पर यह भी आरोपी लगाया कि फर्जी एनकाउंटर, हिरासत में जो मौतें हो रही हैं और बुल्डोजर एक्शन हो रहा है वह पीडीए समुदाय के लोगों के साथ हो रहा है। सपा ने गैर यादव ओबीसी समुदायों जैसे कुर्मी, निषाद, लोधी, राजभर और भार में भी अपनी पहुंच बढ़ाई है। इन समुदायों से जुड़े लोगों को संगठन में पद दिए हैं।

अखिलेश यादव ने हाल में रामचरितमानस को सांस्कृतिक संविधान बताया जो कि उनकी पार्टी के 2023 के बयान से बिल्कुल उलट है।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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