नशे पर सरकार का बड़ा वार! 12% से ज्यादा अल्कोहल वाली Cough Syrup पर सख्ती, बिन पर्चे की बिक्री बंद

High Alcohol Cough Syrup: केंद्र सरकार ने 12% से ज्यादा अल्कोहल वाली कफ सिरप और ओरल टॉनिक की बिक्री पर सख्ती कर दी है। अब ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे नहीं मिलेंगी। नए नियम के तहत इन्हें शेड्यूल H1 में शामिल किया गया है और जनवरी 2027 से यह व्यवस्था लागू होगी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 10 July 2026 9:23 AM IST
High Alcohol Cough Syrup
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High Alcohol Cough Syrup: देश में कफ सिरप (Cough Syrup) और टॉनिक (Tonic) का नशे के रूप में बढ़ते गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 (Drugs Rules, 1945) में संशोधन करते हुए ज्यादा अल्कोहल वाली ओरल दवाओं (Oral Medicines) को अब शेड्यूल एच1 (Schedule H1) श्रेणी में शामिल कर दिया है। इस फैसले के बाद ऐसी दवाएं अब मेडिकल स्टोर पर बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं बेची जा सकेंगी।

किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम?

सरकार की ओर से जारी नए नियम के मुताबिक दो शर्तों को पूरा करने वाली सभी ओरल लिक्विड दवाओं को अब शेड्यूल एच1 के दायरे में रखा जाएगा।

पहली शर्त यह है कि दवा की पैकिंग 30 मिलीलीटर से बड़ी हो। दूसरी शर्त यह है कि उस दवा में इथाइल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) की मात्रा 12 प्रतिशत से अधिक हो।

जो भी दवाएं इन दोनों मानकों को पूरा करेंगी, वे अब शेड्यूल एच1 सूची का हिस्सा होंगी।

शेड्यूल H1 में पहले से शामिल हैं संवेदनशील दवाएं

सरकार ने जिन दवाओं को शेड्यूल एच1 (Schedule H1) में शामिल किया है, उसी सूची में पहले से नींद की गोलियां, तेज असर वाली दर्द निवारक दवाएं और ऐसी दवाएं भी शामिल हैं जिनका नशे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।

अब ज्यादा अल्कोहल वाली कफ सिरप और टॉनिक भी इसी श्रेणी में आ जाएंगी, जिससे इनकी बिक्री और निगरानी पहले की तुलना में काफी सख्त हो जाएगी।

शेड्यूल K की छूट भी खत्म

सरकार ने इस संशोधन के तहत शेड्यूल के (Schedule K) में भी बदलाव किया है। पहले कुछ दवाओं को नियमों और बिक्री में विशेष छूट मिलती थी, लेकिन अब 30 मिलीलीटर से बड़ी पैकिंग और 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवाओं को यह छूट नहीं मिलेगी।

सरकार का उद्देश्य इन दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) से लेकर रिटेल (Retail) स्तर तक पूरी सप्लाई चेन (Supply Chain) पर कड़ी निगरानी रखना है।

अब क्या बदलेगा?

अब तक इस तरह की दवाएं आसानी से मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध हो जाती थीं। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद इन्हें बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं खरीदा जा सकेगा।

इन दवाओं की बिक्री करने वाले दुकानदारों को पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। साथ ही दवा की बोतल पर चेतावनी वाला लेबल लगाना भी अनिवार्य होगा।

सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि कई मामलों में इन कफ सिरप और टॉनिक का इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता रहा है।

पहले जारी किया गया था ड्राफ्ट

सरकार ने इस नियम का ड्राफ्ट अक्टूबर 2025 में ही सार्वजनिक किया था, ताकि लोग इस पर अपनी राय या आपत्ति दर्ज करा सकें।

इसके लिए 30 दिन का समय भी दिया गया था, लेकिन इस दौरान किसी भी तरह की आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। इसके बाद सरकार ने दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड (Drug Technical Advisory Board) से भी इस विषय पर चर्चा की और अब इसे अंतिम रूप देकर कानून बना दिया गया है।

जनवरी 2027 से शुरू होगी सख्ती

सरकार के मुताबिक यह नया नियम राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित होने के छह महीने बाद लागू होगा। यानी करीब जनवरी 2027 से इस पर पूरी तरह अमल शुरू हो जाएगा।

इस दौरान दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों को अपनी पैकिंग, लेबलिंग और बिक्री की प्रक्रिया नए नियमों के अनुसार बदलने का समय मिलेगा। इसके बाद ज्यादा अल्कोहल वाली कफ सिरप और टॉनिक की बिक्री निर्धारित नियमों के तहत ही की जा सकेगी।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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