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Jalaun: 50 साल से रावण-मेघनाद के पुतले बना रहा मुस्लिम परिवार, कोंच में दिखती है गंगा-जमुनी तहजीब
Jalaun News: जालौन के कोंच में 174वें ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव की तैयारियां जारी हैं। यहां मुस्लिम कारीगर मुकीम अहमद और उनका परिवार पिछले करीब 50 वर्षों से रावण और मेघनाद के पुतले बना रहा है।
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Jalaun News: जालौन के कोंच नगर में 174वें ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव के बीच दशहरे की तैयारियां जोरों पर हैं। धनुताल मैदान में मुस्लिम कारीगर करीब 50 वर्षों से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए 40 से 45 फीट ऊंचे रावण और मेघनाद के पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। आस्था, कला और आपसी भाईचारे की यह अनूठी मिसाल कोंच की गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत कर रही है।
जालौन के कोंच नगर में दशहरा महोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है। धनुताल मैदान में रावण और मेघनाद के विशालकाय पुतले तैयार किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इन पुतलों को बनाने की जिम्मेदारी मुस्लिम कारीगर कई दशकों से निभाते आ रहे हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती यह परंपरा धार्मिक सद्भाव और आपसी सौहार्द का संदेश दे रही है।कारीगर मुकीम अहमद और उनका परिवार दशहरे के लिए पुतले तैयार करने में जुटा है। करीब पांच दशक से चले आ रहे इस काम में बांस, कागज और अन्य सामग्रियों की मदद से 40 से 45 फीट ऊंचे पुतलों को आकार दिया जाता है। कारीगरों के लिए यह केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि परंपरा को जीवित रखने और भाईचारे की विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है।
कोंच का दशहरा अन्य स्थानों से अलग पहचान रखता है। यहां रावण और मेघनाद के पुतलों को मैदान में रस्सियों और रथों के सहारे दौड़ाया जाता है। इसके साथ ही राम-रावण युद्ध का सजीव मंचन दर्शकों को आकर्षित करता है। राम, लक्ष्मण और हनुमान के साथ रावण और मेघनाद के युद्ध के दृश्य रामलीला को खास बनाते हैं। लक्ष्मण को शक्ति लगने का प्रसंग भी मंचन का हिस्सा होता है।174 वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक रामलीला और दशहरा मेले में हर साल हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार भी करीब 25 हजार लोगों के जुटने की उम्मीद है। अंत में बुराई के प्रतीक रावण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा।


