Jalaun News: श्मशान न होने से खेत में हुआ अंतिम संस्कार, बारिश में कंधों पर ले जाना पड़ा शव

Jalaun News: जालौन के हैदलपुर गांव में श्मशान घाट न होने से परिजनों ने बारिश और कीचड़ के बीच खेत में अंतिम संस्कार किया, ग्रामीणों ने जल्द श्मशान निर्माण की मांग उठाई।

Afsar Haq
Published on: 6 Aug 2026 8:39 PM IST
Jalaun News: श्मशान न होने से खेत में हुआ अंतिम संस्कार, बारिश में कंधों पर ले जाना पड़ा शव
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Jalaun News: जालौन में गुरुवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने ग्रामीण सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी। गांव में श्मशान घाट नहीं होने के कारण परिजनों को बुजुर्ग का अंतिम संस्कार बारिश के बीच खेत में करना पड़ा। दलदली रास्ते के चलते शव और अंतिम संस्कार की सामग्री ग्रामीणों ने कंधों पर ढोकर पहुंचाई।

आटा थाना क्षेत्र के ग्राम हैदलपुर निवासी मदन वर्मा (70) का बुधवार को बीमारी के चलते निधन हो गया था। गुरुवार सुबह भी रुक-रुककर बारिश होती रही। गांव तक पक्की सड़क बनी है, लेकिन श्मशान घाट न होने के कारण परिजनों ने गांव से करीब 500 मीटर दूर स्थित खेत में अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। खेत तक जाने वाला चकरोड लगातार बारिश से कीचड़ और दलदल में बदल गया था, जिससे कोई वाहन वहां तक नहीं पहुंच सका।

ग्रामीणों ने शव को कंधों पर उठाकर खेत तक पहुंचाया। वहीं लकड़ियां, उपले और अन्य सामग्री को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल से ढककर पैदल ले जाया गया। खेत में भी बूंदाबांदी के बीच तिरपाल तानकर चिता तैयार की गई, जहां मृतक के छोटे भाई पप्पू वर्मा ने मुखाग्नि दी।

ग्रामीणों ने बताया कि मदन वर्मा पिछले करीब एक माह से फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित थे। उनका कहना है कि गांव में आज तक श्मशान घाट नहीं बन सका है। हर बारिश में अंतिम संस्कार के लिए खेत या नदी किनारे जाना पड़ता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र श्मशान घाट निर्माण की मांग की है।बीडीओ महेवा अरुण कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। गांव में श्मशान घाट निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजा जा रहा है, ताकि समस्या का स्थायी समाधान कराया जा सके।

Afsar Haq
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Afsar Haq

वरिष्ठ संवाददाता, जालौनafsarhaq@newstracksite.vocalwire.com

अफसर हक वरिष्ठ पत्रकार हैं और 2015 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, अमर उजाला और लोक भार्ती जैसे प्रतिष्ठानों से जुड़े रहे हैंं। आपने विभिन्न विषयों पर धारदार रिपोर्टिंग से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

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