Jalaun News: उरई मेडिकल कॉलेज विवाद फिर गरमाया, पुराने मामलों पर सवाल

Jalaun News: उरई मेडिकल कॉलेज में तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के विवाद का मामला फिर चर्चा में, व्यापारिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

Afsar Haq
Published on: 22 May 2026 9:58 PM IST
Urai Medical College controversy heated up again, old matters questioned
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उरई मेडिकल कॉलेज विवाद फिर गरमाया, पुराने मामलों पर सवाल (Photo- Newstrack)

Jalaun News: उरई। राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में मरीजों और तीमारदारों के साथ कथित अभद्रता एवं मारपीट के आरोपों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में भाजपा नेता के परिवार के साथ इमरजेंसी वार्ड में हुए विवाद के बाद पिछले कई वर्षों में सामने आए ऐसे मामलों की चर्चा फिर शुरू हो गई है। स्थानीय व्यापारिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में रात के समय अक्सर तीमारदारों और जूनियर डॉक्टरों के बीच विवाद की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच और स्थायी समाधान की आवश्यकता है।

ताजा विवाद ने बढ़ाई चर्चा

18 मई 2026 की रात भाजपा के पूर्व जिला कोषाध्यक्ष एवं पूर्व सभासद बृजकिशोर गुप्ता ‘रिप्पू’ अपनी पुत्री को पेट दर्द की शिकायत पर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि उपचार शुरू कराने को लेकर हुई कहासुनी बाद में विवाद में बदल गई। घटना में दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

घटना के बाद व्यापारिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया। डॉक्टरों द्वारा शुरू की गई हड़ताल भी प्रशासनिक समझाइश के बाद समाप्त हो गई।

पुराने मामलों का भी हो रहा उल्लेख

स्थानीय लोगों द्वारा वर्ष 2017 की एक चर्चित घटना का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें मेडिकल कॉलेज परिसर के बाहर हुए विवाद के बाद मारपीट और वाहन में आग लगाने के आरोप लगे थे। इसी प्रकार अप्रैल 2026 में एक धार्मिक स्थल से जुड़े व्यक्ति द्वारा भी इमरजेंसी वार्ड में अभद्र व्यवहार की शिकायत किए जाने का दावा किया गया था। हालांकि इन मामलों में संबंधित पक्षों के अपने-अपने आरोप रहे हैं और कई प्रकरण पुलिस जांच का विषय रहे हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग

व्यापारिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बार-बार सामने आने वाले विवादों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। वहीं डॉक्टरों के संगठनों का भी पक्ष है कि कई बार चिकित्साकर्मियों को भी दबाव और असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नजर

सूत्रों के अनुसार मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उच्च स्तर पर शिकायत की है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, ताकि मेडिकल कॉलेज का वातावरण सुरक्षित और मरीजों के अनुकूल बनाया जा सके।

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में चिकित्साकर्मियों और तीमारदारों के बीच बेहतर संवाद, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था तथा शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत बनाकर ऐसे विवादों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

Shashi kant gautam

Shashi kant gautam

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Experienced Hindi Journalist with 6 Years of Experience

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