UP News: जापान के साथ ग्लोबल फ्यूचर बनाएगा यूपी, सीएम योगी ने रखा रोडमैप

UP News: UP-Japan Investment Meet में सीएम योगी ने जापान को केवल निवेशक नहीं, को-क्रिएटर बताया। यामानाशी की MSME कंपनियों के लिए ₹600 करोड़ फंड और डेडिकेटेड डेस्क की घोषणा हुई।

Newstrack Network
Published on: 21 Aug 2026 8:09 PM IST
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UP News (Image Credit-Social Media)

लखनऊ, 21 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और जापान के रिश्ते अब केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि लॉन्ग-टर्म, ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप के रूप में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे। जापान के प्रिसिजन और टेक्नोलॉजी को उत्तर प्रदेश के स्केल, युवा शक्ति और टैलेंट से जोड़ते हुए प्रदेश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में काम होगा।

शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के वेलेडक्टरी सेशन में मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान उत्तर प्रदेश के लिए केवल इन्वेस्टर नहीं, बल्कि को-क्रिएटर है। एमओयू को प्रोडक्शन, प्रोडक्शन को ग्लोबल एक्सपोर्ट और निवेश को रोजगार में बदलना सरकार का लक्ष्य है। 2047 के भारत के उद्योग आज डिजाइन हो रहे हैं और उत्तर प्रदेश चाहता है कि जापान के साथ मिलकर इन उद्योगों का भविष्य तैयार किया जाए।

जापानी भाषा में मुख्यमंत्री ने दिया दोस्ती और साझेदारी का संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में जापानी भाषा का प्रयोग करते हुए जापानी प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने “कोनिचिवा मिनासान” कहकर सभी जापानी अतिथियों का अभिवादन किया और भारत-जापान के मजबूत होते संबंधों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। संबोधन के समापन पर मुख्यमंत्री ने जापानी भाषा में “अरिगातो गोजाइमासु” कहकर प्रतिनिधिमंडल और उपस्थित जापानी अतिथियों का आभार जताया। जापानी भाषा में मुख्यमंत्री के इस आत्मीय संवाद ने कार्यक्रम में सांस्कृतिक जुड़ाव और दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास का संदेश दिया। सीएम योगी के इस भाव ने उपस्थित मेहमानों का उत्साहवर्धन भी किया।

जापान के साथ बातचीत अब स्ट्रांग बिजनेस पार्टनरशिप में बदल रही

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ दिन पूर्व जापान की धरती पर जो संकल्प लिया गया था, आज लखनऊ की धरती पर उसे साकार रूप लेते हुए देखा जा रहा है। जापान में हुई बातचीत अब स्ट्रांग बिजनेस पार्टनरशिप में बदल रही है, जो उत्तर प्रदेश में इन्वेस्टमेंट, इंडस्ट्री और एम्प्लॉयमेंट के नए अवसरों का आधार बनेगी। यह भारत-जापान के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और यामानाशी के संबंधों में भी नई साझेदारी के युग की शुरुआत है। जापान ने दुनिया को दिखाया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद डिसिप्लिन, विल पावर, हाई क्वालिटी स्टैंडर्ड, इनोवेशन और नेशन फर्स्ट की भावना के साथ सही दिशा में प्रयास किया जाए तो कोई भी चुनौती मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। जापान आज विश्व की प्रमुख इकोनॉमिक एंड इंडस्ट्रियल पावर के रूप में स्थापित है। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स और हाई क्वालिटी मैन्युफैक्चरिंग के साथ क्लीनलीनेस और कलेक्टिव रिस्पॉन्सिबिलिटी के लिए भी उसकी पूरी दुनिया में अलग पहचान है। काइजेन, मोनोजुकुरी और ‘वा’ यानी सामाजिक सामंजस्य जापान की लाइफस्टाइल और वर्क कल्चर के महत्वपूर्ण आधार हैं। इन मूल्यों की झलक जापान के एडमिनिस्ट्रेशन, इंडस्ट्री, एजुकेशन और सोशल लाइफ के हर क्षेत्र में दिखाई देती है। शिंकानसेन, यानी जापान की बुलेट ट्रेन, टेक्निकल एफिशिएंसी, पंक्चुअलिटी, सेफ्टी और रिलायबिलिटी के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। यह जापान की उस सोच का प्रतीक है, जहां टेक्नोलॉजी के साथ प्रिसिजन, स्पीड के साथ सेफ्टी और डेवलपमेंट के साथ रिलायबिलिटी को समान महत्व दिया जाता है।

जापान का इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस और यूपी की युवा शक्ति मिलकर रचेंगे नई कहानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट्स, हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और मॉडर्न ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश का लक्ष्य केवल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम तैयार करना है, जो इंडस्ट्री को स्पीड, आम नागरिक को सेफ्टी और इन्वेस्टर्स को रिलायबिलिटी दे सके। जापान के पास इंडस्ट्रियल एक्सीलेंस की असाधारण विरासत है, जबकि उत्तर प्रदेश के पास सीखने, सृजन करने और नेतृत्व करने के लिए तैयार युवाओं की ऊर्जावान पीढ़ी है। यूपी के युवाओं को ऐसी स्किल, प्रिसिजन और वर्क कल्चर से जोड़ा जाएगा, जिसकी मांग टोक्यो से लेकर दुनिया के किसी भी एडवांस मैन्युफैक्चरिंग हब तक हो। लैंग्वेज उन्हें जापान से, टेक्निकल स्किल इंडस्ट्री से और जापानी वर्क कल्चर उन्हें ग्लोबल स्टैंडर्ड से जोड़ेगा। आज ग्लोबल कंपनियां ऐसे स्थान की तलाश में हैं, जहां रेजिलिएंस, रिलायबिलिटी, ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए डायवर्सिफिकेशन और बड़े पैमाने पर ग्रोथ की क्षमता हो। उत्तर प्रदेश इन चारों आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता रखता है।

600 करोड़ के फंड से बढ़ेगा जापानी निवेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन दिनों में जापानी डेलीगेशन के साथ हुई बातचीत में वर्किंग रिलेशनशिप मजबूत करने, उत्तर प्रदेश की पॉलिसीज और बिजनेस एनवायरमेंट को समझने तथा निवेश के अवसरों पर विस्तृत चर्चा हुई। जापानी प्रतिनिधियों ने प्रदेश में पॉलिसी रिफॉर्म और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हुए सुधारों की सराहना की है। उन्होंने सीमलेस अप्रूवल, लैंड अलॉटमेंट की सरल प्रक्रिया और रिड्यूस्ड कंप्लायंसेज को सकारात्मक बदलाव बताया। वहीं मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक क्लस्टर्स, इंडस्ट्रियल पार्क्स और बेहतर कनेक्टिविटी को निवेश के लिए महत्वपूर्ण सकारात्मक पहलू माना। सीएम ने कहा कि इन सुविधाओं के कारण प्रदेश में निर्मित उत्पादों की देश के अलग-अलग हिस्सों में सीमलेस मूवमेंट संभव हो रही है। यामानाशी के साथ सहयोग को अब मजबूत और संस्थागत व्यवस्था में बदला जाएगा। इन्वेस्ट यूपी में डेडिकेटेड यामानाशी डेस्क स्थापित की जाएगी, जो यामानाशी सरकार, वहां के उद्योगों और निवेशकों के साथ निरंतर समन्वय करेगी। दोनों पक्ष इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्री की आवश्यकताओं, अप्रूवल्स और सामने आ रही चुनौतियों की हर 90 दिन में कोऑर्डिनेशन के साथ रिव्यू करेंगे, ताकि किसी भी स्तर पर कोई गैप न रहे। इससे एमओयू के क्रियान्वयन से लेकर निवेश तक की पूरी प्रक्रिया को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यामानाशी के गवर्नर को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने यामानाशी की एमएसएमई कंपनियों के उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए 600 करोड़ रुपये का फंड घोषित किया है। यह उत्तर प्रदेश में जापानी उद्योग के बढ़ते विश्वास का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

यामानाशी मॉडल को जापान के अन्य प्रिफेक्चर्स तक विस्तार देंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि फरवरी 2026 की जापान यात्रा के दौरान जापानी सीईओज, बिजनेस एसोसिएशंस और इंडस्ट्री डेलिगेशंस के साथ व्यापक चर्चा हुई थी। इन चर्चाओं में उत्तर प्रदेश सरकार और जापान के अन्य प्रीफेक्चर्स के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी थी। अब यामानाशी के साथ विकसित मॉडल को जापान के अन्य प्रिफेक्चर्स तक भी विस्तार दिया जाएगा। इसके लिए यामानाशी के गवर्नर ने सहयोग की इच्छा जताई है। प्रसन्नता का विषय है कि उत्तर प्रदेश की गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने जापानी डेलिगेशन के साथ एमओयू किया है। इसी तरह की साझेदारी यूपी के अन्य विश्वविद्यालयों और जापान के विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के बीच भी विकसित की जाएगी। हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग प्रोफेशनल्स के साथ-साथ पॉलिटेक्निक, नर्सिंग ग्रेजुएट्स और अन्य टेक्निकल कोर्सेज के छात्रों को जापानी लैंग्वेज में प्रशिक्षित करने तथा उनके लिए रोजगार और ट्रेनिंग के अवसरों का विस्तार किया जाएगा। जापानी कंपनियों के साथ मिलकर उनकी सेक्टर-स्पेसिफिक मैनपावर जरूरतों को समझा जाएगा और उसी आधार पर उत्तर प्रदेश में विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किए जाएंगे। हमारा लक्ष्य इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार स्किल और स्किल के अनुसार एंप्लॉयमेंट का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। इससे जापानी कंपनियों को प्रशिक्षित वर्कफोर्स और उत्तर प्रदेश के युवाओं को ग्लोबल इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के अनुरूप रोजगार के अवसर मिलेंगे।

बौद्ध सर्किट से जापानी पर्यटकों को यूपी की ओर आकर्षित करेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बौद्ध सर्किट के माध्यम से जापानी पर्यटकों के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम करेगी। इस संबंध में यहां एक एमओयू भी संपन्न हुआ है। उत्तर प्रदेश भारत का प्रमुख स्पिरिचुअल टूरिज्म हब है और यहां आध्यात्मिक, बौद्ध, कल्चरल और हेरिटेज टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। जापान में आयोजित होने वाले टूरिज्म फेस्टिवल में उत्तर प्रदेश की भागीदारी के माध्यम से भारत की संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और हॉस्पिटैलिटी को वहां प्रस्तुत किया जाएगा।

ग्रीन हाइड्रोजन पर मिलकर करेंगे काम

सीएम ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी यामानाशी के साथ सहयोग को अगले चरण तक ले जाया जाएगा। आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। इसी मॉडल की तर्ज पर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जा सकते हैं, ताकि रिसर्च एंड डेवलपमेंट, न्यू टेक्नोलॉजी के एडॉप्शन और क्लीन एनर्जी में इनोवेशन को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। यामानाशी के साथ एक पायलट प्रोजेक्ट विकसित करने पर सहमति हुई है, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार मिलकर इंप्लीमेंट करेगी। इसके लिए भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच टेक्नोलॉजी एवं बिजनेस पार्टनरशिप विकसित की जाएगी। यूपी के उद्यमी और इन्वेस्टर इस टेक्नोलॉजी को अपनी-अपनी इंडस्ट्री में लागू करने के लिए आगे आ सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर उनके डेलिगेशन को यामानाशी प्रीफेक्चर की यात्रा पर भेजा जाएगा, ताकि वे वहां इन कार्यों का अनुभव कर सकें। साथ ही, उद्योग जगत के साथ समन्वय कर एक उपयुक्त ऑफ-टेकर की पहचान की जाएगी, जिससे पायलट परियोजना को बड़े स्तर पर विस्तार योग्य कमर्शियल मॉडल में बदला जा सके। अक्टूबर 2026 में यामानाशी में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल हाइड्रोजन समिट में उत्तर प्रदेश अपना डेलिगेशन अवश्य भेजेगा।

जापानी जीसीसी कंपनियों को यूपी में निवेश और बिजनेस सेटअप का न्योता

मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) की स्थापना के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। उन्होंने जापानी जीसीसी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में आने, निवेश करने और अपना बिजनेस सेटअप करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि इस विषय में एक एमओयू भी संपन्न हुआ है। प्रदेश का लक्ष्य केवल निवेश लाना नहीं, बल्कि जापान के साथ लॉन्ग-टर्म, ट्रस्ट-बेस्ड पार्टनरशिप विकसित करना है। जापानी कंपनियां यूपी में निवेश और उत्पादन करें तथा यहां से पूरे भारत और ग्लोबल मार्केट तक पहुंच बनाएं, यही सरकार का प्रयास है। भारत और जापान ऐसे देश हैं, जिन्होंने अपनी विरासत और परंपरा को दैनिक जीवन और कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाए रखा है। जापान की संस्कृति हजारों वर्षों की समृद्ध परंपरा से विकसित हुई है और उस पर शिंतो तथा बौद्ध परंपराओं का गहरा प्रभाव रहा है। भारतीय जीवन पद्धति भी प्रकृति के प्रति सम्मान, समाज के प्रति दायित्व और समस्त मानवता को एक परिवार मानने की भावना पर आधारित है। हमारी संस्कृति का संदेश ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ है। 2047 में भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी का महोत्सव मनाएगा। तब हमारी आकांक्षा है कि उत्तर प्रदेश में काम कर रही जापानी कंपनियां केवल यह न कहें कि हमने भारत में निवेश किया है, अपितु गर्व से कहें कि हमने अपना ग्लोबल फ्यूचर उत्तर प्रदेश से बनाया है। उत्तर प्रदेश एक रिलायबल और लॉन्ग-टर्म पार्टनर के रूप में जापान के साथ खड़ा है।

इस अवसर पर यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी, यामानाशी प्रीफेक्चर के वाइस गवर्नर जुनिची इशिदेरा, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, यूपी ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार और गवर्नर यामानाशी के साथ आए उच्चस्तरीय डेलीगेशन के इंडस्ट्री लीडर्स, सीईओज व अन्य अतिथिगण उपस्थित रहे।

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